इस यूरोपीय देश में अज़ान पर लग सकती है रोक, नमाज़ को लेकर बड़ा फैसला!

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यूरोप में बढ़ते आव्रजन और इस्लामीकरण पर चल रही बहस के बीच, डेनमार्क अब एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। देश की सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर के माध्यम से नमाज़ के लिए दी जाने वाली अज़ान पर कानूनी प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रही है। डेनमार्क के आव्रजन मंत्री मॉर्टन बोडस्कोव ने कहा कि नमाज़ के लिए दी जाने वाली अज़ान की आवाज़ डेनमार्क की पहचान का हिस्सा नहीं है और लोगों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि वे किसी यूरोपीय शहर के बजाय इस्लामाबाद के किसी शहर में पहुंच गए हैं।

बोडस्कोव ने डेनिश समाचार एजेंसी से कहा, 'नमाज़ के लिए दी जाने वाली अज़ान डेनमार्क की छतों के ऊपर सुनाई नहीं देनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यह तय करने के लिए कानूनी समीक्षा कर रही है कि ऐसा प्रतिबंध देश के संविधान के दायरे में आता है या नहीं।

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हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। डेनिश संविधान सार्वजनिक रूप से धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, इसलिए सरकार को ऐसे कानून की संवैधानिक वैधता का भी आकलन करना होगा।

डेनमार्क में यह बहस नई नहीं है। स्थानीय शोर-नियंत्रण नियम पहले से ही राजधानी कोपेनहेगन सहित कई क्षेत्रों में लाउडस्पीकर पर अज़ान के उपयोग पर प्रतिबंध लगाते हैं। इसके अलावा, 2023 में सरकार ने धार्मिक ग्रंथों के अपमान पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून बनाया था। क़ुरान जलाने की घटनाओं के बाद कई मुस्लिम देशों ने तीखी नाराज़गी जताई थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया था।

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डेनमार्क में लगभग 2,70,000 मुसलमान रहते हैं और पूरे देश में लगभग 100 मस्जिदें हैं। ऐसे में अज़ान पर संभावित प्रतिबंध को मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़े निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

हाल के वर्षों में कई यूरोपीय देशों में आव्रजन, हिजाब, धार्मिक पहचान और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर बहस तेज़ हुई है। कई देशों में दक्षिणपंथी और आव्रजन-विरोधी समूहों ने दावा किया है कि बड़े पैमाने पर आव्रजन यूरोपीय सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित कर रहा है।

बोडस्कोव ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में भी कहा था कि डेनमार्क में रहने का कानूनी अधिकार न रखने वाले विदेशियों को चरणबद्ध तरीके से देश से निष्कासित किया जाएगा। उन्होंने इसे सरकार की सख्त आव्रजन नीति का हिस्सा बताया।

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सरकार प्रतिबंध की तैयारी कर रही है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा। संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, और किसी भी नए कानून को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इसलिए सरकार फिलहाल कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रही है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिक्सेन की सरकार पहले भी अपनी सख्त आव्रजन नीतियों को लेकर सुर्खियों में रही है।

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