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कैंसर के इलाज में नई उम्मीद! भारत में लॉन्च हुई अमेरिकी कंपनी की नई दवा, कीमत ₹2.15 लाख
भारत में कैंसर के उपचार के क्षेत्र में एक नया विकल्प सामने आया है। अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनी एली लिली एंड कंपनी ने अपनी कैंसर-रोधी दवा टेन्स्ट्राइव को भारतीय बाजार में लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह दवा उन मरीजों के लिए लाभदायक हो सकती है, जिनका कैंसर RET नामक एक विशेष जीन परिवर्तन (म्यूटेशन) से जुड़ा हुआ है। हालांकि, इस दवा की कीमत काफी अधिक है; इसके एक बॉक्स में 14 दिनों के इलाज के लिए पर्याप्त दवा होती है।
कैंसर वर्तमान में दुनिया की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है, और भारत में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में, मरीजों और डॉक्टरों दोनों के लिए नई दवा का बाजार में आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि टेन्स्ट्राइव पारंपरिक कीमोथेरेपी की तरह सभी कैंसर कोशिकाओं को प्रभावित करने के बजाय सीधे जीन परिवर्तन को लक्ष्य बनाती है। सरल शब्दों में कहें तो, सभी कैंसर एक जैसे नहीं होते। कुछ मरीजों में विशेष जीन परिवर्तन (म्यूटेशन) पाए जाते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को तेज करते हैं; RET जीन में होने वाला परिवर्तन भी ऐसा ही एक बदलाव है। टेन्स्ट्राइव इसी परिवर्तन पर कार्य करती है।
यह दवा उन कैंसर मरीजों के लिए बनाई गई है, जिनके RET जीन में परिवर्तन (म्यूटेशन) होता है। यह जीन परिवर्तन कैंसर कोशिकाओं को तेजी से बढ़ने के संकेत देता है। टेन्स्ट्राइव इन गलत संकेतों को अवरुद्ध करने का काम करती है, जिससे ट्यूमर की वृद्धि को धीमा करने में मदद मिलती है। यह सीधे बीमारी के मूल कारण को प्रभावित करने का प्रयास करती है। मरीजों को यह दवा दिन में दो बार लेनी होती है। एली लिली इंडिया के अध्यक्ष विंसलो टकर के अनुसार, कैंसर के इलाज में जीन-आधारित और सटीक उपचार का युग तेजी से विस्तार कर रहा है। इस संदर्भ में टेन्स्ट्राइव जैसी दवाएं भारतीय मरीजों को आधुनिक, लक्षित उपचार का एक नया विकल्प प्रदान कर सकती हैं।
एक बॉक्स की कीमत क्या है?
टेन्स्ट्राइव भारत में चार डोज़ में उपलब्ध है: 40 मिलीग्राम, 80 मिलीग्राम, 120 मिलीग्राम और 160 मिलीग्राम की गोलियां। मरीजों को इसे दिन में दो बार लेना आवश्यक है। कंपनी ने बताया कि दवा के एक बॉक्स की कीमत लगभग ₹2.15 लाख है और इसमें 14 दिनों के उपचार के लिए पर्याप्त दवा होती है। पिछले कुछ वर्षों में कैंसर उपचार की दुनिया तेजी से विकसित हुई है। पहले जहां अधिकांश मरीजों के लिए एक जैसी दवाएं और उपचार उपलब्ध थे, वहीं अब जीन-आधारित उपचार पर अधिक जोर दिया जा रहा है। डॉक्टर पहले मरीज की बीमारी से जुड़े जीनों की जांच करते हैं और उसके बाद उसी के अनुसार उपचार तय करते हैं।

