सूरत में प्राइवेट स्कूलों के बजाय बच्चों का रुझान सरकारी स्कूलों की तरफ क्यों बढ़ रहा? क्या स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा है बड़ी वजह?

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सूरत। गुजरात में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्यभर में ‘शाला प्रवेशोत्सव’ (स्कूल प्रवेशोत्सव) मनाया जा रहा है। इसी क्रम में राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी सूरत पहुंचे और नगर प्राथमिक शिक्षा समिति द्वारा संचालित विभिन्न स्कूलों में जाकर नए विद्यार्थियों का स्वागत किया। सूरत के स्कूल नंबर 45 और 46 में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छोटे बच्चों का पारंपरिक तरीके से कुमकुम के चरणचिह्नों के साथ स्वागत किया गया और उन्हें शिक्षा के मंदिर में प्रवेश दिलाया गया। इस अवसर पर केवल प्रवेशोत्सव ही नहीं, बल्कि सूरत की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर भी विशेष चर्चा हुई।

इस मौके पर हर्ष संघवी ने देश के कुछ हिस्सों में समय-समय पर उठने वाले भाषा विवादों पर परोक्ष रूप से टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग रोजगार, व्यापार और बेहतर भविष्य की तलाश में सूरत आते हैं। यहां बसने वाले सभी परिवार अब सूरत और गुजरात परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जिस परिवार को अपने बच्चों को जिस भाषा में पढ़ाना है, सरकार और सूरत महानगरपालिका उस भाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सरकार की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।

संघवी बोले- सूरत शहर बड़े दिल वाला, बाहर से आए लोग पहले भारतीय

संघवी ने सूरत की विशेषता बताते हुए कहा कि यह शहर बड़े दिल वाला शहर है। यहां देश के हर कोने से आए लोगों को बाहरी या परप्रांतीय नहीं माना जाता, बल्कि सभी को सूरत का नागरिक, गुजराती और सबसे पहले भारतीय समझा जाता है। उन्होंने कहा कि सूरत में कभी भाषा के आधार पर विवाद या भेदभाव की स्थिति नहीं बनी। यहां विभिन्न भाषाओं में पढ़ाई की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि अभिभावक अपनी पसंद के माध्यम में बच्चों को शिक्षा दिला सकें। यही सूरत की सबसे बड़ी ताकत है।

सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधरा, अभिभावकों का भरोसा बढ़ा

गृह मंत्री ने सरकारी स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस शैक्षणिक वर्ष में 4,708 विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों से नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है। उनके अनुसार यह बदलाव दर्शाता है कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता में लगातार सुधार हुआ है और अभिभावकों का भरोसा बढ़ा है। 

उन्होंने कहा कि पहले सरकारी स्कूलों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की धारणाएं थीं, लेकिन अब आधुनिक सुविधाएं, बेहतर शिक्षण व्यवस्था और प्रशिक्षित शिक्षकों के कारण अभिभावक सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता देने लगे हैं।

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जिले में 21 हजार से ज्यादा छात्रों ने सरकारी स्कूलों में लिया दाखिला

हर्ष संघवी ने बताया कि केवल सूरत जिले में ही इस वर्ष 21,113 नए विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है। यह संख्या दर्शाती है कि सरकारी शिक्षा के प्रति लोगों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रारंभिक शिक्षा की मजबूत नींव मानी जाने वाली ‘बालवाटिका’ में भी इस वर्ष 9,028 बच्चों का नया प्रवेश हुआ है। इससे स्पष्ट है कि अभिभावक बच्चों की शुरुआती शिक्षा के लिए भी सरकारी संस्थानों को चुन रहे हैं।

एसएमसी और शिक्षण समिति 2 लाख बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रही

मंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल स्कूल में दाखिले तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास का माध्यम है। इसलिए सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचे और कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने सूरत महानगरपालिका और नगर प्राथमिक शिक्षा समिति की कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 1,99,186 बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य महानगरपालिका और शिक्षा समिति द्वारा किया जा रहा है।

स्कूलों को डिजिटल बनाया जा रहा, इसलिए बढ़ रहा रुझान

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में स्कूलों को और अधिक आधुनिक बनाया जाएगा। डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लासरूम, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए पूरी टीम मिशन मोड में काम कर रही है। संघवी ने विश्वास जताया कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में लगातार सुधार के कारण भविष्य में और अधिक अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में दाखिला दिलाने के लिए आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सूरत जिस तरह प्रगति कर रहा है, वह पूरे राज्य के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।

गुजरात का शाला प्रवेशोत्सव अभियान एक नजर में

  • गुजरात में ‘शाला प्रवेशोत्सव’ अभियान की शुरुआत वर्ष 2003 में की गई थी।
  • राज्य सरकार के अनुसार इस अभियान ने स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर में बड़ी कमी लाने में मदद की है।
  • मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हाल ही में कहा कि 2003 में जहां ड्रॉपआउट दर लगभग 35% थी, वह अब घटकर करीब 0.85% रह गई है।
  • वर्ष 2025-26 के प्रवेशोत्सव के दौरान राज्य सरकार ने लाखों विद्यार्थियों को बालवाटिका, कक्षा 1, 9 और 11 में नामांकित करने का लक्ष्य रखा है। 
  • गुजरात सरकार के आंकड़ों के अनुसार प्रवेशोत्सव के पहले दो दिनों में ही 1.31 लाख से अधिक विद्यार्थियों का स्कूलों में प्रवेश कराया गया।

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