अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावे मामले में SIT की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे, किस पर गिरेगी गाज? क्या बदल जाएगा मंदिर का कामकाज?

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में मंदिर प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने, संदिग्ध कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और ट्रस्ट के पुनर्गठन जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत पड़ताल के लिए एसआईटी ने अतिरिक्त समय भी मांगा है। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय एसआईटी ने करीब एक सप्ताह तक अयोध्या में रहकर जांच की। टीम ने मंदिर प्रशासन, कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ की। रिपोर्ट में लगभग 150 लोगों से पूछताछ का उल्लेख किया गया है। इससे पहले भी जांच टीम ने रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, दान पेटियों की गिनती और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया का अध्ययन किया था। 

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने कुछ कर्मचारियों और संबंधित लोगों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे समेत कुछ अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसियों द्वारा पहले ही कुछ आरोपियों की निशानदेही पर नकदी बरामद की जा चुकी है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। 

रिपोर्ट में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत बताई

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत बताई है। टीम का मानना है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे, नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की निगरानी के लिए अधिक जवाबदेह और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इसी कारण ट्रस्ट के पुनर्गठन की सिफारिश की गई है। साथ ही किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मंदिर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो सके। 

पिछले वर्षों के चढ़ावे और दान का ऑडिट कराने की भी सिफारिश

रिपोर्ट में पिछले वर्षों के चढ़ावे और दान का विशेष ऑडिट कराने की भी सिफारिश की गई है। अधिकारियों का मानना है कि नियमित और स्वतंत्र ऑडिट से भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को रोका जा सकता है। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एसआईटी ने मंदिर में साप्ताहिक ऑडिट और नकद चढ़ावे का दैनिक रिकॉर्ड रखने जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया है। 

पीएमओ तक पहुंची एसआईटी की रिपोर्ट

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने रिपोर्ट का अध्ययन शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चर्चा के बाद रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और गृह मंत्रालय तक भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के पुनर्गठन और संभावित नए सदस्यों को शामिल करने जैसे मुद्दों पर आगे निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि सरकार या ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। 

सियासत भी गरमा गई है…विपक्ष हो रहा आक्रामक

इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने देश के चारों शंकराचार्यों को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप और मार्गदर्शन की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल धनराशि का मामला नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है।

दोषियों के खिलाफ नार्को टेस्ट जैसी कार्रवाई की मांग

उधर, श्रीराम सेना ने भी राम जन्मभूमि थाने में ज्ञापन देकर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, निष्पक्ष जांच कराने और नार्को टेस्ट जैसी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई से ही श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहेगा। गौरतलब है कि यह पूरा मामला मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के बाद सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। जांच अभी जारी है और विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताओं की वास्तविक सीमा क्या थी और किन लोगों की जिम्मेदारी तय होगी। फिलहाल सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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