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सूरत में निर्माणाधीन पुल के दो पिलरों के बीच लगाया गया गर्डर का हिस्सा अचानक झुक गया
सूरत में एक बार फिर निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक घटना सामने आई है। रेलवे गोदाम के ऊपर बन रहे निर्माणाधीन पुल के दो मजबूत पिलरों के बीच लगाया गया गर्डर का पूरा हिस्सा अचानक एक तरफ झुक गया। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस पुल का इतना बड़ा हिस्सा झुक जाने से आसपास के लोगों में भी भय का माहौल फैल गया। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए किसी दुर्घटना के होने से पहले इस झुके हुए पूरे ढांचे को तोड़कर मलबा हटाने का काम किया।
इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गए हैं। वहीं दूसरी ओर, ऐसा लग रहा है कि नगर निगम के उच्च अधिकारी इस पूरे मामले पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों का आधिकारिक तौर पर कहना है कि यह कोई दुर्घटना या हादसा नहीं है, बल्कि पुल की डिजाइन सेंस (डिजाइन परिवर्तन) बदली जा रही थी, इसलिए इंजीनियरिंग योजना के अनुसार इस हिस्से को स्वेच्छा से तोड़ा गया है।
इस संबंध में रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आधिकारिक स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वायरल हो रहा यह वीडियो यहां का नहीं है, बल्कि लगभग डेढ़ महीने पुराना है। पिलर के ऊपर जो गर्डर रखा गया था, उसका अस्थायी सहायक ढांचा हटाते समय यह गर्डर अचानक मुड़ गया था। इस घटना के बाद तुरंत तकनीकी जांच की गई थी और सुरक्षा के मद्देनजर इसे तोड़कर वहां से पूरी तरह डिस्मेंटल (हटाने) का निर्णय लिया गया था। अब इस स्थान पर नया गर्डर कास्ट करके लगाया जाएगा।
अधिकारी हेमंत अग्रवाल (स्ट्रक्चर DPM) ने बताया कि ड्रॉइंग में बदलाव होने के कारण इस हिस्से को हटाया जा रहा है और अब जो भी काम होगा वह संशोधित ड्रॉइंग के अनुसार ही किया जाएगा। पिलरों के बीच गर्डर टूटने के सोशल मीडिया पर वायरल हुए फोटो और वीडियो के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कुछ भी नहीं है, ड्रॉइंग बदलने के कारण इसे हटाना ही पड़ रहा है और इसमें किसी की कोई लापरवाही नहीं है।
वहीं अन्य अधिकारी राहुल राघव (लायज़न मैनेजर) का कहना है कि गर्डर टूटा नहीं है। बल्कि ड्रॉइंग के अनुसार आगे का काम बढ़ाने के लिए इसे डिस्मेंटल किया जा रहा है। जब पत्रकार ने उन्हें मोबाइल में वायरल वीडियो दिखाकर पूछा कि यह उनके ही पिलर जैसा दिखाई देता है और इस बारे में उनका क्या कहना है।
घटना का विवरण यह है कि सूरत शहर में ट्रैफिक की समस्या कम करने के लिए मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्टेशन हब परियोजना के तहत सहारा दरवाजा से लेकर सूरत मुख्य रेलवे स्टेशन के पिछले हिस्से से वराछा लंबे हनुमान रोड तक एक एलिवेटेड रोड तैयार किया जा रहा है। लगभग 5 किलोमीटर लंबी इस पुल परियोजना को सिटको (SITCO) कंपनी द्वारा लगभग 496 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। उस समय गर्डर के झुकने की घटना सामने आने के बाद प्रशासन द्वारा तुरंत सुरक्षा संबंधी कदम उठाकर जोखिम वाले हिस्से को हटाने की कार्रवाई पूरी कर दी गई थी और फिलहाल परियोजना का कार्य आगे बढ़ रहा है।
भले ही प्रशासन कितने भी दावे करे, लेकिन जिस प्रकार का लाइव वीडियो वायरल हुआ है, उसमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि पुल का हिस्सा बिना किसी पूर्व तैयारी के अचानक झुक गया था और उसके बाद प्रशासन ने अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए जल्दबाजी में उसे तोड़ दिया था। इंजीनियरों और विशेषज्ञों के अनुसार, यदि डिजाइन बदलनी ही थी तो इसकी पहले से घोषणा क्यों नहीं की गई? यह पूरी घटना अब उच्च स्तरीय जांच का विषय बन गई है। सच्चाई और भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारियां निष्पक्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगी।

