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पुणे के वैज्ञानिकों ने विकसित की नई नैनोमेडिसिन, जो बिना गंभीर दुष्प्रभावों के स्तन कैंसर कोशिकाओं को निशाना बना सकती है
भारतीय वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पुणे स्थित अघारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (ARI) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी उन्नत नैनोमेडिसिन विकसित की है, जो स्तन कैंसर की कोशिकाओं की पहचान कर उनके विकास और जीवित रहने के लिए जिम्मेदार जीनों को निष्क्रिय कर सकती है।
यह शोध भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत कार्यरत ARI के नैनोबायोसाइंस समूह द्वारा किया गया है। इस अध्ययन के परिणाम प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका Advanced Healthcare Materials में प्रकाशित हुए हैं।
कैसे काम करती है यह नई तकनीक?
वैज्ञानिकों ने “MUC1-Targeted Silica Nanocarrier” नामक एक विशेष नैनोमेडिसिन विकसित की है। स्तन कैंसर कोशिकाओं की सतह पर MUC1 नामक प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह नई दवा इसी प्रोटीन की पहचान कर सीधे कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचती है।
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कैंसर कोशिकाओं के भीतर पहुंचने के बाद यह नैनोमेडिसिन MCL-1 और Survivin नामक दो महत्वपूर्ण जीनों को निष्क्रिय कर देती है। ये जीन कैंसर कोशिकाओं को जीवित रहने और तेजी से बढ़ने में मदद करते हैं। इनके निष्क्रिय होने पर कैंसर कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं।
भारतीय वैज्ञानिकों की टीम का योगदान
इस महत्वपूर्ण शोध में वैज्ञानिक नीलाद्रि हलधर, राजकुमार सामंत, सुरजीत पात्रा, देवयानी सेंगर, सचिन जाधव और वीरेंद्र गजबिये सहित कई शोधकर्ताओं ने योगदान दिया है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक विशेष रूप से स्तन कैंसर के आक्रामक प्रकारों के उपचार में प्रभावी साबित हो सकती है और भविष्य में अधिक सटीक तथा व्यक्तिगत उपचार का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
अभी मानव परीक्षण बाकी
वैज्ञानिकों के अनुसार इस नैनोमेडिसिन का प्री-क्लिनिकल परीक्षण सफल रहा है। प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों में उत्साहजनक परिणाम मिले हैं, हालांकि मानवों पर क्लिनिकल ट्रायल अभी होने बाकी हैं।
यदि आने वाले वर्षों में मानव परीक्षण भी सफल रहते हैं, तो यह खोज स्तन कैंसर के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

कीमोथेरेपी की तुलना में कम दुष्प्रभाव की उम्मीद
वर्तमान में उपयोग की जाने वाली कीमोथेरेपी कई बार स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती है, जिससे बाल झड़ना, थकान, उल्टी और अन्य दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं।
नई नैनोमेडिसिन केवल कैंसर कोशिकाओं को लक्ष्य बनाती है। इससे भविष्य में अधिक प्रभावी, सुरक्षित और कम दुष्प्रभाव वाले उपचार की संभावना बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत के बायोमेडिकल और कैंसर अनुसंधान क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।
About The Author
Dr. Dinky Gajiwala, DNB (Medicine), DNB (Medical Oncology), is a dedicated Medical Oncologist and Consultant at Hope Cancer Clinic, Surat. She specializes in comprehensive cancer treatment and is passionate about empowering patients through education and awareness. With a strong presence on social media, Dr. Gajiwala actively spreads reliable information on breast cancer, chemotherapy, immunotherapy, and other critical aspects of oncology, making cancer care more accessible and understandable for all.

