- Hindi News
- राष्ट्रीय
- बिहार: वायुसेना अधिकारी शुभम कुमार केस में नया मोड़! कोर्ट मैरिज, 21 लाख का चेक और माता-पिता का छलका
बिहार: वायुसेना अधिकारी शुभम कुमार केस में नया मोड़! कोर्ट मैरिज, 21 लाख का चेक और माता-पिता का छलका दर्द
वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी शहादत के बाद शुरू हुआ एक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जिस घर में बेटे की वीरता की गाथा सुनाई जानी चाहिए थी, वहां अब मुआवज़े, रिश्तों और अधिकारों को लेकर सवालों का माहौल है।
असम के जोरहाट में हुई दुखद विमान दुर्घटना में शहीद हुए जहानाबाद के बेटे फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई थी। उस समय पूरे बिहार ने उनके साहस और बलिदान को सलाम किया था। लेकिन अब शहीद के परिवार और प्रशासन के बीच विवाद खड़ा हो गया है, जिससे कई नए सवाल उठ रहे हैं। यह मामला तब शुरू हुआ जब जानकारी सामने आई कि बिहार सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता शहीद की कथित पत्नी श्रेया राय को सौंप दी गई है। इसके बाद शहीद के पिता अमरेंद्र शर्मा ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर खुलकर सवाल उठाए।
बनवरिया गांव में रहने वाले अमरेंद्र शर्मा दुख और गुस्सा दोनों व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे के जीवन से जुड़े इतने बड़े फैसले की उन्हें कभी जानकारी नहीं दी गई। पिता का दावा है कि परिवार को हमेशा बताया गया था कि शुभम की शादी तय हो चुकी है और वह अगले नवंबर में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार होगी। तैयारियों को लेकर घर में चर्चाएं भी होती थीं। कोर्ट मैरिज के अचानक खुलासे ने पूरे परिवार को हैरान कर दिया है।
अमरेंद्र शर्मा कहते हैं कि यदि वास्तव में कोर्ट मैरिज हुई थी, तो उन्हें, उनकी पत्नी या परिवार के किसी अन्य सदस्य को इसकी जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि उन्होंने अपने बेटे की शादी पारंपरिक तरीके से करने की कल्पना की थी और परिवार उसी के अनुसार तैयारी कर रहा था।

दूसरी ओर, प्रशासन का रुख पूरी तरह अलग है। जहानाबाद के सब-डिविजनल ऑफिसर राजीव रंजन सिन्हा स्पष्ट रूप से कहते हैं कि उपलब्ध सरकारी और विभागीय रिकॉर्ड में श्रेया राय को शुभम कुमार की वैध पत्नी के रूप में दर्ज किया गया है। इसलिए नियमों के अनुसार उन्हें किसी भी आर्थिक सहायता या सरकारी लाभ प्रदान किए जा रहे हैं। प्रशासन का तर्क है कि सरकारी प्रक्रियाएं आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित होती हैं, भावनाओं पर नहीं। यदि पत्नी का नाम रिकॉर्ड में दर्ज है, तो सहायता राशि उसके खाते में जमा की जाएगी। यहीं से विवाद और गहरा हो गया।
विवाद का सबसे बड़ा केंद्र 21 लाख रुपये की आर्थिक सहायता रही है। शहीद के पिता का आरोप है कि यह राशि श्रेया राय को परिवार को बताए बिना सौंप दी गई। उनका कहना है कि उन्हें किसी कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई थी और न ही यह बताया गया था कि भुगतान कहां या किन परिस्थितियों में किया जा रहा है। परिवार का आरोप है कि शहीद के माता-पिता होने के बावजूद उन्हें पूरी प्रक्रिया से अलग रखा गया। इसी कारण वे अब पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
पिता द्वारा उठाया गया यह सवाल गांव और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गया है। अमरेंद्र शर्मा कहते हैं कि यदि श्रेया राय वास्तव में उनके बेटे की पत्नी थीं, तो उन्हें उसकी शहादत के बाद परिवार के साथ कुछ समय बिताना चाहिए था। उनका दावा है कि परिवार को कभी इस रिश्ते की सामाजिक या पारिवारिक मान्यता नहीं मिली। परिवार का कहना है कि उन्हें बाद में पता चला कि अहमदाबाद में कोर्ट मैरिज हुई होने का दावा किया जा रहा है। पिता का आरोप है कि शादी परिवार से छिपाकर की गई थी। उनका कहना है कि उन्हें इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि, ऐसे कोई दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं जो स्पष्ट कर सकें कि शादी कब, किन परिस्थितियों में हुई थी, या इसके बारे में किसे जानकारी थी। यही कारण है कि पिता पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
शहीद शुभम कुमार का नाम बनवरिया गांव में सम्मान के साथ लिया जाता है। ग्रामीणों को गर्व है कि गांव का बेटा भारतीय वायुसेना में अधिकारी था और देश की सेवा करते हुए शहीद हुआ था। लेकिन अब पूरे गांव में शहादत से अधिक मुआवज़े और पारिवारिक विवादों की चर्चा हो रही है। कई लोग पूछ रहे हैं कि यदि शादी हुई थी, तो परिवार को इसके बारे में जानकारी क्यों नहीं थी, जबकि कुछ लोग यह भी तर्क दे रहे हैं कि यदि पत्नी का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, तो प्रशासन उसी आधार पर निर्णय लेने के लिए बाध्य है। पूरा मामला इन दो दृष्टिकोणों के बीच फंसा हुआ दिखाई देता है।

