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कोरोना महामारी दुनिया में कैसे फैला… इस पर हुआ सबसे बड़ा खुलासा, दावा- अमेरिकी वैज्ञानिक ने ही इसके लिए की थी फंडिंग
वाशिंगटन। अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर बड़ा दावा किया है। गबार्ड ने कुछ गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के चर्चित वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फॉसी ने चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में ऐसी रिसर्च के लिए सरकारी फंडिंग उपलब्ध कराई थी, जिसमें कोरोना वायरस को अधिक खतरनाक बनाने पर काम किया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महामारी फैलने के बाद वायरस की संभावित लैब उत्पत्ति से जुड़े तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई और फॉसी ने अमेरिकी संसद के सामने शपथ लेकर भी गलत बयान दिया।
कोरोना महामारी के दौरान डॉ. एंथनी फॉसी अमेरिका में सबसे प्रमुख स्वास्थ्य सलाहकारों में शामिल थे। 2020 में जब अमेरिका में कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़े, तब तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने महामारी से निपटने में फॉसी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि महामारी के शुरुआती दौर से ही कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं।
वायरस को अधिक ताकतवर बनाने का चल रहा था काम
गबार्ड का आरोप है कि फॉसी ने जिस रिसर्च को फंडिंग दिलाई, वह ‘गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च’ से जुड़ी थी। यह ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है, जिसमें किसी वायरस की विशेषताओं में बदलाव कर उसे अधिक संक्रामक या खतरनाक बनाया जाता है। वैज्ञानिकों का तर्क है कि ऐसी रिसर्च से भविष्य में संभावित महामारियों को समझने और वैक्सीन या इलाज विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस तरह की रिसर्च को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है, क्योंकि यदि सुरक्षा में चूक हो जाए तो संशोधित वायरस के लैब से बाहर निकलने का खतरा भी रहता है। इसी कारण कई देशों में इस तरह के प्रयोगों पर सख्त निगरानी रखी जाती है।
चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर रिसर्च चल रहा था
गबार्ड के मुताबिक, चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर इसी तरह की रिसर्च चल रही थी। उनका दावा है कि कोविड-19 महामारी की शुरुआत भी संभवतः इसी लैब से वायरस के दुर्घटनावश बाहर आने के कारण हुई। बता दें कि कोरोना की उत्पत्ति को लेकर दुनिया भर में दो प्रमुख थ्योरी सामने आती रही हैं। पहली, वायरस प्राकृतिक रूप से जानवरों से इंसानों में पहुंचा। दूसरी, वायरस किसी लैब से गलती से बाहर निकला। अब तक किसी भी थ्योरी को अंतिम रूप से साबित नहीं किया जा सका है और कई अमेरिकी एजेंसियां अलग-अलग आकलन पेश कर चुकी हैं।
सवाल तो पहले भी उठाए गए, लेकिन दबा दिये गए
गबार्ड के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि महामारी के शुरुआती दौर में कुछ वैज्ञानिकों को आगे कर ऐसी रिपोर्ट तैयार करवाई गई, जिसमें वायरस की प्राकृतिक उत्पत्ति की संभावना को प्रमुखता दी गई। आरोप है कि इससे लैब-लीक थ्योरी को कमजोर दिखाने की कोशिश हुई। गबार्ड का कहना है कि खुफिया एजेंसियों और वैज्ञानिक समुदाय के कुछ लोगों ने इस निष्कर्ष पर सवाल उठाए थे, लेकिन उनकी बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि कई विश्लेषकों पर दबाव बनाया गया और उन्हें किनारे कर दिया गया।
सच्चाई सामने लाने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा
गबार्ड ने कहा कि व्हिसलब्लोअर्स की गवाही और हाल में सामने आए दस्तावेज इन आरोपों की ओर इशारा करते हैं। उनके अनुसार, ऐसे कई लोग सामने आए जिन्होंने दावा किया कि कोरोना की उत्पत्ति से जुड़े कुछ पहलुओं पर स्वतंत्र रूप से जांच करने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकलना अभी बाकी है और इस मामले को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस लगातार जारी है।
डॉ. फॉसी पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
डॉ. फॉसी पर इससे पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि अमेरिकी सरकार से मिले कुछ शोध अनुदान गैर-लाभकारी संस्था ‘ईकोहेल्थ एलायंस’ के जरिए वुहान लैब तक पहुंचे थे। यह संस्था चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर शोध परियोजनाओं से जुड़ी रही है। वहीं, 2021 में अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई के दौरान फॉसी ने कहा था कि उनकी एजेंसी ने वुहान लैब में वायरस को अधिक खतरनाक बनाने वाली रिसर्च के लिए फंडिंग नहीं दी। बाद में सामने आए कुछ दस्तावेजों और कांग्रेस की जांच के आधार पर रिपब्लिकन नेताओं ने उनके इस बयान पर सवाल उठाए।
हाल के वर्षों में अमेरिकी कांग्रेस की विभिन्न समितियों और खुफिया एजेंसियों ने भी कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़े कई दस्तावेजों की समीक्षा की है। हालांकि अब तक ऐसा कोई सर्वसम्मत निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिसे सभी एजेंसियां स्वीकार करती हों।
अमेरिकी वैज्ञानिक लगातार आरोपों से इनकार करते रहे हैं
वहीं, फॉसी लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अभी तक कोई अंतिम और ठोस वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं निकला है। उन्होंने कई बार कहा है कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर किसी एक थ्योरी को पूरी तरह सही या गलत नहीं ठहराया जा सकता। बता दें कि तुलसी गबार्ड ट्रम्प प्रशासन में डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) के पद पर कार्यरत थीं। उनके अधीन अमेरिका की 18 खुफिया एजेंसियां काम करती थीं। उन्होंने 22 मई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

