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अयोध्या: SIT की रडार पर चंपत राय और अनिल मिश्रा! 150 संदिग्धों के नाम आए सामने, राम मंदिर चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई के संकेत
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में चल रही SIT की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान करीब 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से लगभग 25 लोगों पर कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ भी बड़ा फैसला लिया जा सकता है। दोनों को उनके पदों से हटाए जाने की चर्चा तेज हो गई है।
जांच के छठे दिन SIT की टीम एक बार फिर राम मंदिर परिसर पहुंची। टीम जांच पूरी करने के बाद आज ही लखनऊ लौटने वाली है। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूरी जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच के दौरान SIT ने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव से अलग-अलग पूछताछ की। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक के मैनेजर और कैशियर से भी जानकारी ली गई। सूत्रों का कहना है कि मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
SIT राम मंदिर कर्मचारी सोमेश आनंद से भी पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन वह जांच टीम के सामने पेश नहीं हुए। बताया जा रहा है कि उनका मोबाइल फोन भी बंद है। सोमेश आनंद, गोपाल राव के भतीजे बताए जाते हैं।
इस घोटाले में अब तक 2 करोड़ रुपये की नकद रिकवरी की जा चुकी है। यह बरामदगी लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू जैसे आरोपियों की निशानदेही पर हुई है। ये सभी आरोपी मंदिर में दान राशि की गिनती की ड्यूटी में तैनात थे। जांच के दौरान मंदिर कर्मचारी टिन्नू के घर से सोना भी बरामद हुआ है, जिसकी मात्रा का आकलन किया जा रहा है।
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे पवन पांडेय ने दावा किया कि राम मंदिर से 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की चोरी हुई है। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए और मामले की न्यायिक जांच की मांग की। दूसरी ओर, चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि अब तक चोरी की कोई पुष्टि नहीं हुई है। विवाद बढ़ने पर भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंदिर ट्रस्ट से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।

