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सीतापुर: अब्दुल्ला बना 'दारोगा सिंह', 8 साल बाद बेटे के साथ हिंदू धर्म में लौटा; बताया कि उसने इस्लाम धर्म क्यों अपनाया था
उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बुधवार को पिता-पुत्र ने हिंदू धर्म अपना लिया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में उन्होंने इस्लाम का त्याग किया और देवी मंदिर में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-पाठ करके हिंदू धर्म अपनाया। धर्म में वापसी के बाद पिता अब्दुल्ला ने अपना नाम दारोगा सिंह और पुत्र खालिद ने नीतिश सिंह रख लिया। दारोगा सिंह ने आरोप लगाया कि शुरुआत में उन्हें झूठे मामले में फँसाया गया और बाद में इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए दबाव डाला गया था। उन्होंने अन्य लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
गौरतलब है कि घर वापसी करने वाले दारोगा सिंह की पत्नी और उनके दो अन्य बच्चे अभी भी इस्लाम का पालन करते हैं। दारोगा सिंह के अनुसार, उन्होंने लगभग आठ साल पहले इस्लाम धर्म स्वीकार किया था। उनका आरोप है कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने पहले उन्हें झूठे मामले में फँसाया और फिर मदद का आश्वासन देकर इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए समझाया। दारोगा सिंह का कहना है कि धर्म परिवर्तन के बाद भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
दारोगा सिंह ने कहा कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के सहयोग से ही उनकी धर्म में वापसी संभव हो सकी। मंदिर में हवन-पूजन और प्रार्थना के बाद पिता-पुत्र दोनों को जनेऊ पहनाया गया और सनातन धर्म में उनकी वापसी कराई गई। इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए।
धर्म में वापसी के बाद दारोगा सिंह ने अन्य लोगों से अपील की कि वे किसी के प्रभाव या समझाने-बुझाने के आधार पर अपना धर्म न बदलें। पुलिस ने बताया है कि दोनों ने स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया है और किसी प्रकार का दबाव नहीं था। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि 'घर वापसी' का मुद्दा समय-समय पर विवाद का कारण बनता रहा है। प्रशासन का कहना है कि कानून की सीमा में रहकर स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन या लालच देकर कराया गया धर्म परिवर्तन अवैध है।

