संजय सुराना और सुराना परिवार: सूरत का एक विश्वसनीय नाम

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(उत्कर्ष पटेल)

सूरत शहर आज 'लघु भारत' की पहचान के साथ प्रगति कर रहा है। यहाँ हीरा, कपड़ा और निर्माण (कंस्ट्रक्शन) के क्षेत्र में अनेक लोग काम करते हैं। लेकिन जब विश्वास और गुणवत्ता की बात आती है, तो सुराना ग्रुप का नाम लोगों के मन में सबसे पहले आता है। ग्रुप के प्रमोटर संजय सुराना सूरतवासियों के लिए महज एक व्यापारी नहीं हैं, बल्कि वे एक विश्वसनीय व्यक्ति हैं जिन पर लोग आँख मूंदकर विश्वास करते हैं।

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सुराना ग्रुप की शुरुआत और बाबूलालजी की विरासत

सुराना ग्रुप के संस्थापक दिवंगत बाबूलालजी सुराना हैं। लोग उन्हें प्यार से 'मामाजी' कहते हैं। वर्ष 1989 में उन्होंने 'JK Tower' नाम से अपना पहला प्रोजेक्ट शुरू किया। इस टावर का नाम उनके पिता जसकरण सुराना के नाम पर रखा गया था, जो रिंग रोड पर सूरत की पहली कमर्शियल बिल्डिंग थी। उस समय लोगों को ऑफिस के लिए आधुनिक जगह की जरूरत थी। बाबूलालजी ने उस जरूरत को समझा और इस प्रोजेक्ट का निर्माण किया।
बाबूलालजी का व्यक्तित्व बेहद ईमानदार और सादगी पसंद था। वे हमेशा सच बोलते थे और सही काम करते थे। लोग कहते हैं कि उनकी बात में वजन था और उनके काम में गुणवत्ता (क्वालिटी) थी। उन्होंने सूरत को आधुनिक ऑफिस स्पेस देने का काम शुरू किया। इसी विरासत को उनके पुत्र संजय सुराना ने आगे बढ़ाया।

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संजय सुराना: सरलता और सामाजिक समर्पण

संजय सुराना, बाबूलालजी के पुत्र हैं। 18 वर्ष की बेहद छोटी उम्र में उन्होंने अपना टेक्सटाइल का व्यापार शुरू किया था, जिसके बाद वे रियल एस्टेट के क्षेत्र में आए। संजय सुराना एक बहुत ही सरल और मिलनसार व्यक्ति हैं। वे किसी से भी सहजता और सरलता से बात करते हैं और उनका स्वभाव बेहद विनम्र है।
वे धर्म और समाज के प्रति हमेशा समर्पित रहते हैं। उनका मानना है कि सच्ची सफलता तभी मिलती है जब आप दूसरों की भी मदद करें। वे चैरिटी और सामाजिक कार्यों में भी हमेशा आगे रहते हैं। संजय सुराना के नेतृत्व में सुराना ग्रुप ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं। संजय सुराना ने न केवल बिल्डिंग्स बनाई हैं, बल्कि टेक्सटाइल क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया है।

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तीसरी पीढ़ी और आधुनिक सोच

सुराना ग्रुप की सफलता का मुख्य कारण ग्राहकों का विश्वास है। वे हमेशा निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं। आज सुराना ग्रुप की तीसरी पीढ़ी के सदस्य विशाल संजयभाई सुराना भी अपने पिता के नक्शेकदम पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने BBA किया है और 22 वर्ष की उम्र में परिवार के कंस्ट्रक्शन बिजनेस से जुड़े हैं।
वे पुराने तौर-तरीकों को सुधारने के लिए नए आइडियाज लाते हैं। उनका स्वभाव विनम्र, वे मेहनती हैं और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी हैं। वे अपने दादा और पिता की विरासत को संजोकर आगे बढ़ रहे हैं। आज उनके द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट्स में अंतर्राष्ट्रीय कंपनियाँ, रेस्टोरेंट्स और रिटेलर्स शामिल हैं। उनके द्वारा बनाए गए प्रोजेक्ट्स सूरत को एक गौरव प्रदान करते हैं।

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व्यापार और संस्कारों का संगम

संजय सुराना का परिवार सिर्फ व्यापार ही नहीं करता, बल्कि वे समाज के मूल्यों को भी साथ लेकर चलते हैं। वे हमेशा मर्यादा में रहकर काम करते हैं। उनकी कंपनी में कर्मचारियों को भी परिवार के सदस्य की तरह देखा जाता है। इसी कार्यप्रणाली के कारण ग्राहकों का विश्वास और मजबूत होता है।
आज के समय में जब कई लोग जल्दी पैसा कमाने के लिए शॉर्टकट अपनाते हैं, तब सुराना परिवार एक आदर्श उदाहरण पेश करता है। वे निष्ठा, ईमानदारी और गुणवत्ता पर विश्वास रखते हैं। उनकी कार्यशैली युवा पीढ़ी को सिखाती है कि सच्ची सफलता के लिए मेहनत, सादगी और ग्राहकों का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है।

सूरत के विकास में योगदान

सूरत में सुराना ग्रुप आज भी नए प्रोजेक्ट्स के साथ आगे बढ़ रहा है। संजय सुराना और उनके परिवार की यह सफलता यह दर्शाती है कि जब व्यापार के साथ संस्कार जुड़ते हैं, तो वह लंबे समय तक टिकता है।
यह परिवार सूरत के विकास में बड़ा योगदान दे रहा है। वे लोगों को अच्छे घर और ऑफिस प्रदान करते हैं। उनकी कार्यप्रणाली से सूरत और अधिक सुंदर तथा आधुनिक बन रहा है। सही मूल्यों के साथ काम करने से ही सच्ची सफलता मिलती है, इस बात को संजय सुराना का परिवार पूरी तरह चरितार्थ कर रहा है।

(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

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