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अब पासपोर्ट पर छिड़ी बहस; सरकार बोली- यह नागरिकता का प्रमाण नहीं, विपक्ष का सवाल- भारतीय नागरिक के लिए क्या प्रमाण जरूरी है?
नई दिल्ली। पासपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार के हालिया स्पष्टीकरण के बाद देश में नागरिकता के प्रमाण को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष ने सरकार से सवाल किया है कि आधार कार्ड और पासपोर्ट यदि दोनों नागरिकता के सबूत नहीं हैं तो फिर भारतीय होने का प्रमाण क्या है। वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के इस रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पासपोर्ट से भी नागरिकता साबित नहीं होती, तो आम लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाएगा कि आखिर किस दस्तावेज को नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाए। उन्होंने सरकार से इस विषय में स्पष्ट और व्यावहारिक व्यवस्था बनाने की मांग की है।
दरअसल, विदेश मंत्रालय ने 24 जून को जारी एक आदेश में कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह केवल विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला एक यात्रा दस्तावेज है। इससे पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट भी स्पष्ट कर चुका है कि आधार कार्ड केवल पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं।
पासपोर्ट सरकार द्वारा जारी सबसे भरोसेमंद पहचान है: थरूर
सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने कहा कि सरकार का यह रुख एक "बेतुका कानूनी विरोधाभास" पैदा करता है। उन्होंने लिखा कि वर्षों से पासपोर्ट को सरकार द्वारा जारी सबसे भरोसेमंद पहचान दस्तावेज माना जाता रहा है। यदि वही दस्तावेज देश के भीतर नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो नागरिकों के सामने स्वाभाविक रूप से यह सवाल खड़ा होगा कि आखिर नागरिकता का प्रमाण किसे माना जाए।
सुझाव: पासपोर्ट और आधार दोनों को नागरिकता का प्रमाण माना जाए
थरूर ने सुझाव दिया कि पासपोर्ट और आधार कार्ड, दोनों को नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक सरकार किसी व्यक्ति का पासपोर्ट या आधार कार्ड रद्द नहीं करती, तब तक इन्हें नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त माना जाना चाहिए।
गैर भारतीयों के लिए अलग तरह का आधार जारी करें
उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण गैर-भारतीय निवासियों के लिए अलग तरह का आधार कार्ड जारी करे। इससे भारतीय नागरिकों और विदेशी निवासियों के पहचान दस्तावेजों में स्पष्ट अंतर रहेगा। उनका मानना है कि ऐसी व्यवस्था लागू होने पर सामान्य भारतीय आधार कार्ड और वैध भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का पर्याप्त प्रमाण माना जा सकेगा। इससे एसआरआई या एनआरसी जैसी प्रक्रियाओं के दौरान होने वाले विवाद भी कम होंगे, प्रशासनिक कामकाज आसान होगा और नागरिकों को अपनी पहचान व नागरिकता को लेकर कानूनी स्पष्टता मिलेगी।
पासपोर्ट विवाद के बारे किसने क्या कहा-
- भाजपा नेता और पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि सरकार ने कोई नया नियम लागू नहीं किया है। उनके अनुसार, यह व्यवस्था पहले से ही कानून में मौजूद है। उन्होंने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 का हवाला देते हुए कहा कि विशेष परिस्थितियों में जनहित को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है। इसलिए पासपोर्ट को स्वतः नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
- वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज नहीं है, तो फिर आखिर कौन-सा दस्तावेज नागरिकता साबित करेगा। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) भी किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह जता सकता है।
- मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी विदेश मंत्रालय के बयान को तर्कहीन बताया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह कह रही है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो क्या इसका अर्थ यह है कि भारतीय पासपोर्ट गैर-भारतीय नागरिकों को भी जारी किए जा रहे हैं।
पासपोर्ट आधिकारिक दस्तावेज है, जो विदेश यात्रा को संभव बनाता है
पासपोर्ट भारत सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को संभव बनाना है। विदेश यात्रा के दौरान वीजा इसी पर जारी किया जाता है और दूसरे देशों में भारतीय नागरिक की पहचान के रूप में भी इसका उपयोग होता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि इसका प्राथमिक उद्देश्य यात्रा है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण देना।
तो क्या नागरिकता साबित करने के लिए कोई एकल प्रमाण नहीं है
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत में ऐसा कोई एकल दस्तावेज नहीं है जिसे हर नागरिक के लिए नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाता हो। किसी व्यक्ति की नागरिकता इस आधार पर तय होती है कि उसने नागरिकता किस प्रकार प्राप्त की है और नागरिकता कानून के तहत उससे जुड़े कौन-कौन से रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। इस बीच विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवाओं में हुए सुधारों की भी जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले दस वर्षों में देशभर में पासपोर्ट सेवा केंद्रों और संबंधित सुविधाओं की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है। वर्ष 2025 में शुरू किए गए चिप आधारित ई-पासपोर्ट की अब तक 1.47 करोड़ प्रतियां जारी की जा चुकी हैं। पासपोर्ट आवेदन के निपटारे का औसत समय घटकर पांच से छह दिन रह गया है। वहीं, 2019 में जहां केवल 16 देश भारतीय नागरिकों को वीजा-फ्री प्रवेश देते थे, अब ऐसे देशों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है।

