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तमिलनाडु के CM विजय का अनोखा अंदाज, महिला बस में कंडक्टर के रूप में काम करने लगे!
2 अक्टूबर के दिन तमिलनाडु के CM C. जोसेफ विजय एक अलग अवतार में नजर आए। राज्य में लागू की गई वेत्री पयनम थिट्टम योजना का गांधी जयंती के अवसर पर विस्तार किया गया। इस योजना के तहत, राज्य में महिलाएं और ट्रांसजेंडर लोग राज्य सरकार की बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगे। इसके अलावा, मौजूदा योजना में कई अतिरिक्त लाभ भी जोड़े गए हैं। राज्य में महिलाओं के लिए पहले से ही मुफ्त बस सेवा उपलब्ध है।
CM C. जोसेफ विजय ने 2 अक्टूबर, शुक्रवार को गांधी जयंती के अवसर पर इस योजना की शुरुआत की थी। CM C. जोसेफ विजय ने चेन्नई में बस में यात्रा भी की, इस दौरान वे कंडक्टर के रूप में काम करते हुए नजर आए और बस में महिलाओं और अन्य यात्रियों से बातचीत की। मीडिया सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज के छात्र भी बस में यात्रा कर रहे थे, जिन्होंने CM C. जोसेफ विजय को चॉकलेट भेंट की थी।
इस मुफ्त बस योजना का लाभ राज्य की लगभग 84.32 लाख महिलाओं को हर दिन मिल सकता है। राज्य परिवहन निगम की 12,695 बसों में सभी महिलाएं और ट्रांसजेंडर लोग मुफ्त यात्रा कर सकते हैं। इन बसों में डीलक्स और एक्सप्रेस बसें शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने बताया कि, किसी भी उम्र की महिलाएं इस योजना का लाभ उठा सकती हैं। इसके अलावा, महिला यात्री दिन में जितनी बार चाहें यात्रा कर सकती हैं। मुफ्त बस सेवाओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं है।
इस योजना का नाम राज्य की सत्तारूढ़ सरकार, तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के नाम पर रखा गया है। हिंदी में, इसका अर्थ 'विजयी यात्रा' होता है। राज्य में पहले से ही मुफ्त बस योजना थी, लेकिन वह कुछ बसों तक ही सीमित थी।
https://twitter.com/PrakazVijay_Of/status/2105881333390307362
वेत्री पयनम थिट्टम योजना पहले से ही लागू थी। योजना की सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिसमें एक्सप्रेस, डीलक्स, मोफुसिल, सामान्य और कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में चलने वाली बस सेवाओं को भी शामिल किया गया है।
राज्य के परिवहन मंत्री A. विजय तमिलन पार्थिबन ने बताया कि, प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिवहन लागत महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की शिक्षा, रोजगार, आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण के मार्ग में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि, यह पहल समानता को बढ़ावा देती है और सुनिश्चित करती है कि यात्रा के अधिकारों में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

