भारत ने दूसरे देशों पर कब्जा किये बिना अपना ज्ञान साझा किया, इसलिए दुनिया जानती है कि चुनौतियों के बीच रास्ता यही से निकलेगा: भागवत

बोले- धर्म और राष्ट्र को अलग करके नहीं देखें, धर्म पर संकट यानी देश पर संकट

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मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत में धर्म और राष्ट्र को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार राष्ट्र का उद्देश्य धर्म से जुड़ा है, जबकि धर्म राष्ट्र को मजबूती देने का काम करता है। उन्होंने कहा कि दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं और धर्म पर संकट आने का असर देश को भी भुगतना पड़ सकता है। भागवत ने मुंबई में ऑल इंडिया विहार सेवा ग्रुप के 14वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया कई तरह की चुनौतियों के बीच संतुलन तलाश रही है। विकास के साथ पर्यावरण की रक्षा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ परिवार और समाज की मजबूती जैसे मुद्दे सामने हैं।

भारत की पहचान को लेकर कही बात

भागवत ने भारत की पहचान और उसकी विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग भाषाएं, पूजा पद्धतियां, राज्य, जातियां और उपजातियां हैं। इसके बावजूद दुनिया में सभी की पहचान भारत के रूप में होती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाला व्यक्ति अपने राज्य के भीतर खुद को नागपुर या मुंबई से जुड़ा बता सकता है। लेकिन उत्तर प्रदेश जाने पर महाराष्ट्र के लोग और उत्तर प्रदेश के लोग एक-दूसरे के लिए महाराष्ट्रीयन या उत्तर भारतीय हो जाते हैं। वहीं, जब दोनों अमेरिका जैसे किसी दूसरे देश में जाते हैं, तो उनकी पहचान भारतीय के रूप में होती है।

भागवत ने कहा कि इसी व्यापक पहचान को समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि विदेश जाने वाले भारतीयों से वहां अक्सर उनकी खास पहचान और उनकी जड़ों के बारे में सवाल किए जाते हैं।

भागवत ने भारत की ज्ञान परंपरा का जिक्र

संघ प्रमुख ने भारत की पुरानी ज्ञान परंपरा को भी अपने संबोधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और भगवद्गीता के साथ जैन आगम, त्रिपिटक, गुरु ग्रंथ साहिब और संतों की शिक्षाएं भी भारत की ज्ञान-संपदा का हिस्सा हैं। उनके अनुसार इस ज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय जीवन में उतारने की जरूरत है। भागवत ने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति की बात, जिसने उस ज्ञान को अपने जीवन में उतारा हो, लोगों पर अधिक प्रभाव डालती है। ऐसे लोगों के अनुभव और विचार समाज में ज्ञान को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की इस ज्ञान निधि को सुरक्षित रखना और आगे पहुंचाना जरूरी है। उनके मुताबिक दुनिया आज जिन समस्याओं से जूझ रही है, उनके समाधान के लिए भारत की परंपरागत सोच से भी सीख ली जा सकती है।

विकास और सामाजिक जीवन के बीच संतुलन की जरूरत

भागवत ने कहा कि आधुनिक दुनिया में कई तरह की दुविधाएं दिखाई दे रही हैं। विकास बढ़ने के साथ पर्यावरण को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। वहीं व्यक्तिगत स्वतंत्रता बढ़ने के साथ परिवार और सामाजिक संबंधों में बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की स्वतंत्रता और समाज की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना चुनौती है। उनके मुताबिक जब किसी एक पक्ष को पूरी तरह प्राथमिकता दी जाती है तो दूसरे पक्ष पर उसका असर पड़ सकता है।

भारत की परंपरा और उसके ज्ञान पर दुनिया की नजर

धर्म के संदर्भ में उन्होंने कहा कि श्रद्धा बढ़ने के साथ केवल कट्टरता बढ़ना समाधान नहीं है। उनका कहना था कि दुनिया में अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के कारण टकराव भी देखने को मिलता है। ऐसे माहौल में भारत की परंपरा और उसके ज्ञान की भूमिका पर दुनिया की नजर है। भागवत ने कहा कि भारत ने लंबे समय तक दूसरे देशों पर कब्जा किए बिना और लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किए बिना अपना ज्ञान दुनिया के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि इसी वजह से भारत से दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का रास्ता मिलने की अपेक्षा की जाती है।

ज्ञान तभी प्रभावी, जब उसे जीवन में उतारा जाए

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारतीयों की पहचान केवल भाषा, राज्य या पूजा पद्धति से तय नहीं होती। देश की विविधताओं के बीच एक साझा भारतीय पहचान भी मौजूद है। उन्होंने संत ज्ञानेश्वर और भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान केवल तभी प्रभावी होता है, जब उसे जीवन में उतारा जाए। उनके मुताबिक जिन लोगों ने इस ज्ञान को अपने आचरण में जिया है, उनके शब्द लोगों के मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं।

भारत की ज्ञान संपदा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना महत्वपूर्ण

भागवत ने कहा कि ऐसी जीवन परंपराओं और उन्हें आगे बढ़ाने वाले लोगों की रक्षा करना केवल धार्मिक जिम्मेदारी नहीं है। इसे मानवता के भविष्य से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार भारत की ज्ञान-संपदा को समझना, सुरक्षित रखना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।

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