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'2 अक्टूबर को विजय सालगांवकर ने कहा था...' 'दृश्यम 3' रिलीज़ हो गई है, देखने का प्लान हो तो पहले रिव्यू पढ़ लीजिए
अजय देवगन की 'दृश्यम 3' सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। इस बार, उनके साथ जयदीप अहलावत, प्रकाश राज, तब्बू और कमलेश सावंत मुख्य भूमिकाओं में जुड़ेंगे। अगर आप फिल्म देखनी है या नहीं, इसे लेकर सोच रहे हैं, तो टिकट बुक कराने से पहले यह रिव्यू पढ़ लें।
दृश्यम 3 थोड़ी धीमी गति से शुरू होती है, जिसमें एक पुराने केस की जांच, नए सबूतों की तलाश और क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक के रूप में जयदीप अहलावत की एंट्री शामिल है। कुछ दृश्य देखकर ऐसा लगता है कि, कहानी एक बार फिर उन्हीं पुराने सवालों के जवाब तलाश रही है। हालांकि, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे वह अपनी पकड़ मजबूत बनाती है।
इंटरवल से पहले, विजय सालगांवकर और क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक (जयदीप अहलावत) के किरदार पहली बार एक-दूसरे का सामना करते हैं। दोनों के बीच का तनाव और एक-दूसरे की चाल का अंदाजा लगाने की उनकी कोशिशें इस दृश्य को शक्तिशाली बनाती हैं। यहीं से फिल्म की कहानी में इंटरेस्ट बढ़ जाता है।
दर्शक जानते हैं कि विजय आसानी से हार मानने वाला नहीं है, लेकिन इस बार, पुलिस के पास जो सबूत हैं वे उसकी मुश्किलें बढ़ा देते हैं। उनका इनकार करना लगभग असंभव लगता है। इसलिए विजय इसके बारे में आगे क्या करेगा, यह उत्सुकता दूसरे भाग में दर्शकों को फिल्म से बांधे रखती है। सस्पेंस की परतें एक के बाद एक खुलती जाती हैं, और हर जवाब कहानी को एक नए मोड़ पर ले जाता है।
अजय देवगन एक बार फिर विजय सालगांवकर के रूप में प्रभावित करते हैं। उनका मौन, ठहराव और आंखों के हावभाव किरदार की आंतरिक बेचैनी को सामने लाते हैं। अपने परिवार को बचाने की चिंता और मुश्किल परिस्थितियों में संयम बनाए रखने की उनकी कोशिशें उनके अभिनय में स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
जयदीप अहलावत एक सख्त और तेज बुद्धि वाले पुलिस अधिकारी के रूप में शक्तिशाली नजर आते हैं। उनका किरदार विजय को चुनौती देता है और कहानी में तनाव बनाए रखता है। अजय और जयदीप के बीच चल रही माइंड गेम फिल्म के सबसे दिलचस्प हिस्सों में से एक है।
इस बार, सैम को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी देश के मशहूर वकील पर आती है, जिसे प्रकाश राज ने निभाया है। उनका संवाद और कॉमिक टाइमिंग बेहतरीन है। वहीं, इंस्पेक्टर गायतोंडे के रूप में कमलेश सावंत पहले भाग में कुछ हल्के पल लाते हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग सस्पेंस के बीच थोड़ी राहत देती है।
फिल्म में अलग से गाने नहीं रखे गए हैं, जो कहानी के प्रवाह को बनाए रखते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक तनाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर संघर्ष और सस्पेंस वाले दृश्यों में।
फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी गति से होती है। मुख्य कहानी तक पहुंचने में समय लगता है, और पुराने सबूतों की तलाश से जुड़े कुछ दृश्य उन्हीं चीजों को फिर से पेश करने जैसे लगते हैं। लेकिन, इंटरवल के आसपास, कहानी रफ्तार पकड़ लेती है, और उसके बाद फिल्म देखने में मजा आता है।
'दृश्यम 3' में, अजय देवगन और जयदीप अहलावत के बीच संघर्ष देखना मजेदार है। वे एक-दूसरे की चाल समझने और एक-दूसरे को मात देकर आगे निकलने की कोशिश करते हैं। वहीं फिल्म का अंत आपको चौंका देगा।
शुरुआत थोड़ी धीमी जरूर है, लेकिन आगे क्या होता है यह जानने की उत्सुकता भी बनी रहती है। अगर आपको सस्पेंस वाली फिल्में पसंद हैं, जिसका रहस्य अंत तक समझ में नहीं आता, तो आप फिल्म 'दृश्यम 3' देख सकते हैं।

