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पहले ग्लोबल तनाव और अब देश में बारिश कम; पिछले 11 सालों में सबसे सूखा रहा मानसून, आगे क्या- महंगाई और कर सकती है परेशान
नई दिल्ली। देश में इस बार मानसून सामान्य से काफी कमजोर रहा जोकि एक चिंता का विषय है। पहले ही ग्लोबल तनाव की वजह से महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। अब बारिश की कमी ने तकलीफ और बढ़ा दी है। लोगों को आने वाले समय में महंगाई का और सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि 2026 का मानसूनी सीजन 12.6% कम बारिश के साथ खत्म हुआ और यह देश का 13वां सबसे सूखा मानसून सीजन रहा। पिछले 11 सालों में यह सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा है। हालांकि, मानसून की विदाई से पहले सितंबर के आखिरी सप्ताह में हुई तेज बारिश ने स्थिति में कुछ सुधार किया। इससे बारिश की कमी 2.5% कम हुई और सीजन के अंत में यह 12.6% रह गई।
देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी का असर देखने को मिला। पंजाब में इस बार सबसे कम बारिश हुई। यहां सामान्य से 41% कम, जबकि राजस्थान में करीब 22% कम बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा 9 राज्यों में भी सामान्य से कम बारिश हुई। देश के 43% जिलों में 20 से 72% तक कम बारिश दर्ज की गई। पूर्वी भारत में ओडिशा को छोड़कर कई क्षेत्रों में स्थिति कमजोर रही। ओडिशा में सामान्य से 30% ज्यादा बारिश हुई। वहीं, बारिश के लिए प्रसिद्ध पूर्वोत्तर राज्यों में 1901 के बाद इस साल सबसे कम बारिश दर्ज की गई।
मानसून लौटने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है
देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 19 सितंबर से शुरू हो चुकी है। अगले दो दिनों में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बचे हुए हिस्सों के साथ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और मध्य प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों से मानसून लौटने लगेगा। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से भी मानसून की वापसी होगी। हालांकि, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, 10 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूरे देश से विदा होने की संभावना है। इसके बाद 15 अक्टूबर के बाद दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों में उत्तर-पूर्व मानसून दस्तक दे सकता है।
राहत: एक-दो राज्यों को छोड़ स्थिति ज्यादा खराब नहीं
मानसून के आखिरी दौर में हुई बारिश ने देश की कुल बारिश की कमी को कुछ हद तक कम किया। सितंबर के आखिरी सप्ताह में सामान्य से 50% ज्यादा बारिश हुई। इससे एक सप्ताह पहले तक मानसूनी बारिश सामान्य से 15% कम थी, लेकिन सीजन खत्म होते समय यह कमी घटकर 12.6% रह गई। सीजन शुरू होने से पहले अल नीनो के कारण सूखे की आशंका जताई गई थी। हालांकि, एक-दो राज्यों को छोड़कर स्थिति उतनी खराब नहीं रही, जितनी आशंका थी।
कम बारिश का असर खेती और जल संसाधनों पर भी
कई राज्यों में बारिश की कमी का असर खेती और जल संसाधनों पर भी पड़ा है। 24 सितंबर तक देश के 150 प्रमुख जलाशयों में 130 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध था। इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 182.4 अरब घन मीटर है। यानी जलाशय अपनी कुल क्षमता के करीब 71% तक भरे हुए हैं। हालांकि, पिछले साल की तुलना में इस बार जलाशयों में पानी का भंडार कम है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार करीब 282 जिलों में कम बारिश हुई है।
खतरा: कम बारिश से खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी की संभावना
मानसून की कमी का असर सिर्फ खेती और जल भंडार तक सीमित नहीं रहता। बारिश कम होने पर खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जिससे आगे चलकर अनाज, दालों, सब्जियों और दूसरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। आरबीआई के विश्लेषण के मुताबिक, बारिश का असमान वितरण और मौसम से जुड़ी घटनाएं फसल को नुकसान पहुंचाकर उत्पादन में कमी ला सकती हैं, जिसका असर खाद्य महंगाई पर पड़ता है। हालांकि, इस बार महंगाई पर वास्तविक असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि रबी फसलों की बुवाई और उत्पादन कैसा रहता है, जलाशयों में पानी की उपलब्धता कितनी रहती है और आने वाले महीनों में मौसम कैसा रहता है।
सर्दियों में बारिश की स्थिति बेहतर रहने का अनुमान
मौसम विभाग के मुताबिक, सर्दियों में बारिश की स्थिति कुछ बेहतर रहने की उम्मीद है। 15 से 21 अक्टूबर के बीच उत्तर-पूर्वी मानसून के दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में पहुंचने का अनुमान है। IMD ने अक्टूबर से दिसंबर के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा, केरल तथा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में सामान्य बारिश का अनुमान जताया है। हालांकि, इसका फायदा देश के सभी हिस्सों को नहीं मिलेगा और बारिश मुख्य रूप से कुछ क्षेत्रों तक सीमित रहेगी।
हालांकि आने वाले दिनों में मौसम-बारिश के साथ ये भी देखना होगा कि दुनिया के हालात कैसे रहते हैं। कई देशों के बीच चल रहे तनाव की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। अब बारिश की कमी से लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है।

