गुजरात के इन 5 गांवों ने नाश्ते के पैकेट पर प्रतिबंध लगा दिया, एक गांव में तो पानीपुरी पर भी प्रतिबंध

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गुजरात में गांवों से लेकर शहरों तक 5-10 रुपये में नाश्ते के पैकेट बिकते हैं और पैकेट बच्चे तथा अन्य लोग मजे से खाते हैं। ज्यादातर ऐसे फूड पैकेट्स के नाम छोटा भीम, टारजन, बबलू जैसे बच्चों के पसंदीदा कैरेक्टर के नाम पर रखे जाते हैं, ताकि बच्चे आकर्षित हों। माता-पिता को भी लगता है कि बच्चे खराब खाना नहीं खा रहे हैं, शायद इसी उद्देश्य से मिक्स खिचड़ी, पास्ता का नाश्ता, चीनी नूडल्स जैसे नाम पैकेट्स पर देखने को मिलते हैं। लेकिन हेल्दी होने वाली चीज के नाम देकर बेचे जाने वाले ऐसे पैकेट्स में आने वाला खाना आपके बच्चों को पेट से लेकर हृदय संबंधी बीमारी दे सकता है। आज हम यहां गुजरात के ऐसे 5 गांवों के बारे में जानकारी हासिल करेंगे जहां नाश्ते के पैकेटों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

बनासकांठा के रणावाडा, बादरगढ़, मेहसाणा के चाणसोल, डावोल और जूनागढ़ के चूलड़ी गांव में बच्चों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले पैकेटों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रतिबंध के बाद अगर कोई व्यापारी पैकेट बेचते हुए पकड़ा जाता है तो रु. 1,000 से 10 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है।

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तो मेहसाणा के खेरालु तालुका के चाणसोल और डावोल गांव में भी नाश्ते के तैयार पैकेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया। डावोल के अगुआ करसनभाई चौधरी ने बताया कि, बच्चे जो नाश्ते के तैयार पैकेट खाते हैं उनके बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ग्राम पंचायत द्वारा ग्रामसभा में प्रस्ताव कर यह निर्णय लिया गया है।हमारे गांव के अंदर एक भी दुकान में पैकेट नहीं मिलते।यह निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।

चाणसोल गांव के लोगों ने तो पैकेट के अलावा पानीपुरी सहित फास्टफूड की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। चाणसोल गांव के सरपंच जीवणभाई ने बताया कि,हमारे गांव में करीब 5000 की आबादी है। हमारे गांव द्वारा ऐसा निर्णय लिया गया है कि, बच्चों के खाने के जो पैकेट बेचे जाते थे उनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। पैकेट खाने से बच्चे खाना नहीं खा पाते थे।पैकेट और फास्ट फूड खाने से बच्चों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता था। 15 अगस्त को गांव में पैकेट और फास्टफूड की बिक्री बंद करने के लिए ग्रामसभा में निर्णय लिया गया। हमने 22 अगस्त को गांव के लोगों को इकट्ठा कर व्यापारियों के साथ रामदेवपीर के मंदिर में बैठक की थी।जिसमें सभी व्यापारियों ने हमें विश्वास दिलाया कि,गांव में नाश्ते के पैकेट और फास्टफूड की बिक्री नहीं की जाएगी।

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सरपंच ने आगे बताया कि, अगर कोई व्यापारी पहली बार पैकेट, दाबेली, पकौड़ी, वड़ापाव जैसे फास्ट फूड तथा शराब बेचते हुए पकड़ा जाएगा तो पांच हजार का जुर्माना और दूसरी बार पकड़े जाने पर उसे 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। हमने यह निर्णय इसलिए लिया कि बच्चे पैकेट खाने से बीमार पड़ते थे और दूसरा यह कि वे खाना बिल्कुल नहीं खाते थे।स्कूल में जब जाते थे तो स्कूल में मध्याह्न भोजन में बच्चे खाना खाने में रुचि नहीं रखते थे और घर पर भी ठीक से भोजन नहीं करते थे जिसके कारण हमने यह निर्णय लिया है। चाणसोल गांव में पैकेट की बिक्री पर तो प्रतिबंध देखने को मिला। हालांकि, फास्टफूड पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी गांव की एक-दो दुकानों पर बिक्री होती दिखाई दी।

जूनागढ़ जिले के मालियाहाटी तालुका के चूलड़ी गांव के सरपंच, स्थानीय व्यापारी और ग्रामीणों ने 15 दिन पहले एकत्र होकर गांव में रु. 5-10 में मिलने वाले नाश्ते के तैयार पैकेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था। इस गांव की दुकानों पर बच्चों द्वारा खरीदे जाने वाले नाश्ते के पैकेट दिखाई नहीं देते हैं।

गांव के सरपंच देवायत नंदाणिया ने बताया कि,हमारे गांव में अलग-अलग नामों से मिलने वाले नाश्ते के पैकेट की बिक्री बढ़ गई थी। 2400 की आबादी वाले हमारे गांव के 500 से अधिक बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे थे। इस परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए पंचायत में एक विशेष बैठक बुलाई गई। जिसमें सभी व्यापारी मित्रों को एकत्रित कर समझाया गया कि,बच्चे हमारी ही संपत्ति हैं और व्यापार में होने वाले आर्थिक नुकसान से ज्यादा बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा जरूरी है। सरपंच की इस अपील को व्यापारियों और ग्रामीणों ने पूरा साथ-सहयोग दिया, जिसके परिणामस्वरूप आज गांव में पैकेटों की बिक्री पूरी तरह बंद हो गई है। इस निर्णय से आसपास के गांवों में भी सकारात्मक संदेश गया है और वहां से भी ऐसे कदम उठाने के लिए प्रेरणा मिलने के फोन आ रहे हैं।

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किराने की दुकान चलाने वाले नाजाभाई पीठिया ने बताया था कि, व्यापारी मंडल, युवाओं और सरपंच ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया है। व्यापारी के तौर पर कारोबार में नुकसान होता है, लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के आगे वह कुछ भी नहीं है। अभिभावकों को भी बाहर के जंक फूड के बजाय घर में ही पौष्टिक व्यंजन बनाकर बच्चों को देने चाहिए। यह निर्णय अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगा।

प्रफुल राठौड़ ने बताया कि, छोटे गांवों में अक्सर बीमारी के समय चिकित्सा सुविधाएं सीमित होती हैं और मानसून के दौरान अस्पताल पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पैकेट से होने वाली बीमारी को रोकना अनिवार्य था। उन्होंने आगे कहा कि, शुरुआत में बच्चे थोड़ी जिद करते हैं, लेकिन हम अभिभावक घर में ही पौष्टिक आहार और नए व्यंजन बनाकर बच्चों को देते हैं, जिससे उनकी आदत धीरे-धीरे बदल रही है।

बनासकांठा जिले के कांकरेज तालुका के रणावाडा गांव में पैकेट बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं इसलिए बंद करने का निर्णय था, जिसे दुकानदारों ने पालन कर बंद कर दिया और ममरा वेफर केवड़ा जैसी चीजें जारी रखने पर सहमति से ऐसा पता चला है। अगर कोई ममरा या वेफर के अलावा कोई चीज बेचता है तो 5000 गौशाला में देने का प्रस्ताव किया गया है।

पालनपुर तालुका के बादरगढ़ गांव में ग्रामीणों ने बच्चों के स्वास्थ्य और गांव में स्वच्छ तथा स्वास्थ्यप्रद वातावरण बना रहे इसके लिए अनोखी पहल की है। गांव की दुकानों में नमकीन के पैकेट, प्लास्टिक के जाबला और प्लास्टिक के कप की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय ग्रामसभा में किया गया है। इस संबंध में ग्रामसभा में प्रस्ताव भी किया गया है।

ग्रामसभा में लिए गए निर्णय के अनुसार अब गांव की किसी भी दुकान में बाहर से नमकीन के पैकेट लाकर बिक्री नहीं की जा सकेगी। दुकानदार द्वारा नियम का उल्लंघन किया जाएगा तो पहली बार रु.1 हजार का जुर्माना वसूला जाएगा। इसके बाद भी अगर दुकानदार नियम का उल्लंघन करते हुए पकड़ा जाएगा तो उसका पानी का कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा बार-बार नियम का उल्लंघन करने वाले दुकानदार के बिजली कनेक्शन के संबंध में भी GEB में आवेदन कर कनेक्शन काटने की कार्रवाई करने के बारे में ग्रामसभा में प्रस्ताव किया गया है। इस तरह, ग्रामीणों ने केवल जुर्माने तक सीमित नहीं बल्कि नियम के कड़े अमल के लिए भी निर्णय लिया है।ग्रामीणों के अनुसार बच्चों में नमकीन के पैकेट सहित पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

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