- Hindi News
- राष्ट्रीय
- SIR पर देश में फिर बवाल, आयोग बोला- जहां एसआईआर हो चुका, वहां विशेष अभियान चला छूटे मतदाताओं के नाम
SIR पर देश में फिर बवाल, आयोग बोला- जहां एसआईआर हो चुका, वहां विशेष अभियान चला छूटे मतदाताओं के नाम जोड़ेंगे
नई दिल्ली। देश में एसआईआर को लेकर मुद्दा फिर से गरमा गया है। विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर हमले तेज कर दिये हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कई पार्टियां सड़क पर उतर आई हैं। इस बीच चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है, जो स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके। SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही 18 साल की उम्र पूरी कर चुके नए मतदाताओं को भी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का मौका मिलेगा।
आयोग के निर्देश के मुताबिक SIR से पहले और बाद की मतदाता सूचियों की तुलना की जाएगी। इससे ऐसे पात्र मतदाताओं की पहचान की जाएगी, जिनका नाम गलती से छूट गया हो। इसके बाद बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर जाकर संबंधित मतदाताओं की जानकारी और दस्तावेजों की जांच करेंगे। अगर जांच में यह सामने आता है कि मतदाता न तो डुप्लीकेट है और न ही मृत, तो उसका नाम फॉर्म-6 के जरिए दोबारा मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों और बूथ लेवल एजेंटों की भी मदद ली जाएगी।
चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में भी किया बदलाव
खास बात यह है कि जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां फॉर्म-6 में SIR के दौरान जोड़ा गया अतिरिक्त घोषणा-पत्र अब नहीं रहेगा। यानी SIR के बाद छूटे मतदाताओं को नाम जुड़वाने के लिए 2003 की मतदाता सूची से संबंधित अतिरिक्त जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी। चुनाव आयोग ने यह बदलाव हाल में किया है।
महाराष्ट्र में 2.06 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आए
महाराष्ट्र में SIR को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा ड्राफ्ट मतदाता सूची में सामने आए बड़े अंतर को लेकर हुई। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में 2 करोड़ 6 लाख 88 हजार 487 मतदाताओं के नाम शामिल नहीं थे। पिछली सूची में 9.78 करोड़ से ज्यादा मतदाता थे, जबकि ड्राफ्ट सूची में करीब 7.72 करोड़ नाम आए। यानी करीब 21.14% मतदाता ड्राफ्ट सूची में नहीं दिखे। वहीं, गुजरात की बात करें तो यहां करीब 68 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं।
हालांकि, चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इसे स्थायी रूप से नाम काट दिया गया है, यह नहीं माना जाना चाहिए। कई नाम इसलिए ड्राफ्ट में नहीं आए क्योंकि घर-घर सत्यापन के दौरान गणना फॉर्म नहीं मिल सके। इसके पीछे अनुपस्थित होना, दूसरी जगह चले जाना, मृत्यु, डुप्लीकेट या दूसरी जगह पंजीकरण जैसे कारण शामिल हैं। आयोग ने महाराष्ट्र के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी पात्र मतदाता का नाम जल्दबाजी में न हटाया जाए। मुंबई शहर और मुंबई उपनगर में दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी की पूरी जांच के बाद ही कार्रवाई करने को कहा गया है।
नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए विशेष कैंप भी लगाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 12 अक्टूबर कर दी गई है। इन मामलों के निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की तारीख 16 नवंबर तय की गई है।
हर मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए जाना जरूरी नहीं
महाराष्ट्र में प्रक्रिया को आसान करते हुए चुनाव अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि नोटिस पाने वाले हर मतदाता को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में उपस्थित होना जरूरी नहीं है। BLO जरूरी दस्तावेज लेकर उन्हें ECINET पर अपलोड कर सकते हैं। जरूरत होने पर ही व्यक्तिगत सुनवाई की जाएगी।
ECINET सॉफ्टवेयर की भी समीक्षा होगी, बदलाव भी संभव
चुनाव आयोग ने ECINET की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया है। इसमें IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सॉफ्टवेयर में बदलाव किए जाएंगे। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से भी ECINET में ऐसे बदलावों का सुझाव दिया गया था, जिससे स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों को नियमों के मुताबिक निर्णय लेने में अधिक सुविधा मिले।
दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई थी
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 14 अलग-अलग मौकों पर आपत्ति दर्ज की। इनमें फॉर्म-6 में अतिरिक्त जानकारी जोड़ने, मतदाता सूची और SIR से जुड़े फैसलों तथा चुनावी डेटाबेस की पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके बाद आयोग ने SIR पूरा हो चुके राज्यों में फॉर्म-6 से अतिरिक्त SIR घोषणा-पत्र हटाने का फैसला किया। अब छूटे हुए पात्र मतदाताओं के लिए सामान्य प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने का रास्ता खुला है।
पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर न हो, इसका ध्यान रखना जरूरी
SIR के तीसरे चरण में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है। यह प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलने वाली है। इनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि अन्य राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होने हैं।
चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना है, लेकिन पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए। इसी वजह से SIR पूरा होने वाले 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब छूटे हुए मतदाताओं और नए 18+ मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

