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स्कूलों में स्वच्छता सुविधा नहीं मिलने वाले दुनिया के सबसे अधिक बच्चे भारत में हैं, दूसरे नंबर पर नाइजीरिया, WHO-UNICEF की रिपोर्ट
वर्ष 2025 में दुनिया भर के स्कूलों में शौचालय और स्वच्छता (सैनिटेशन) सुविधाओं से वंचित बच्चों में लगभग पांचवां हिस्सा (20%) बच्चे अकेले भारत में हैं, जो दुनिया के सभी देशों में सबसे अधिक अनुपात है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNICEF के संयुक्त मॉनिटरिंग प्रोग्राम (JMP) की हालिया रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
'प्रोग्रेस ऑन ड्रिंकिंग वॉटर, सैनेटेशन एंड हाइजीन इन स्कूल्स 2015-2025' शीर्षक के तहत जारी की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में स्कूलों में स्वच्छता सुविधा नहीं रखने वाले कुल 24.4 करोड़ बच्चों में से 5 करोड़ बच्चे अकेले भारत में हैं।
इस सूची में भारत के बाद दूसरे स्थान पर नाइजीरिया आता है जहां 3.4 करोड़ बच्चे स्कूलों में सैनिटेशन सुविधा से वंचित हैं। इसके बाद इथियोपिया में 2.6 करोड़, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में 1.1 करोड़ और इंडोनेशिया में 80 लाख बच्चे इस सुविधा के बिना पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
रिपोर्ट में दर्ज किया गया है कि समीक्षा के तहत अवधि के दौरान भारत में स्वच्छता सुविधा नहीं रखने वाले स्कूलों की संख्या में 14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद, स्कूलों में सैनिटेशन और स्वच्छता सुविधाओं के कवरेज में अभी भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) की दिशा में प्रगति मापने के लिए इस रिपोर्ट में 'बुनियादी सैनिटेशन सुविधा' उसे माना गया है, जिसमें स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग और उपयोग किए जा सकने वाले बेहतर शौचालय हों। इसी तरह, 'बुनियादी पेयजल सुविधा' का अर्थ स्कूल में चालू स्थिति में पीने का पानी उपलब्ध होना, और 'बुनियादी हाइजीन सुविधा' का अर्थ हाथ धोने के लिए साबुन और पानी की सुविधा उपलब्ध होना है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हाथ धोने की सुविधा भी चिंता का विषय है, जहां स्कूलों में लगभग 2 करोड़ बच्चों के लिए हाइजीन सुविधा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, हालिया पर्याप्त डेटा के अभाव में रिपोर्ट में भारत और मध्य-दक्षिण एशिया क्षेत्र के लिए 2024 के बाद के हाइजीन कवरेज के अनुमान प्रस्तुत नहीं किए जा सके हैं। दूसरी ओर, स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के मामले में भारत का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से काफी बेहतर रहा है।
वर्ष 2025 में भारत में लगभग 1.2 करोड़ बच्चे स्कूल में पीने के पानी की सुविधा से वंचित थे, जो दुनिया भर में ऐसी सुविधा नहीं रखने वाले बच्चों में हर 20 में से लगभग 1 बच्चे का अनुपात दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, भारत उन 28 देशों में शामिल है (कुल 62 देशों में से), जो 2030 तक स्कूलों में सार्वभौमिक बुनियादी पेयजल का लक्ष्य हासिल करने की सही दिशा में हैं। समीक्षा अवधि के दौरान भारत में बुनियादी पेयजल कवरेज में सालाना 4 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
WHO और UNICEF की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि SDG की निर्धारित समयसीमा के अब केवल पांच वर्ष बाकी हैं, ऐसे में दुनिया 2030 तक स्कूलों में बुनियादी पेयजल, सैनिटेशन और हाइजीन सुविधाओं का सार्वभौमिक लक्ष्य पूरा करने की राह पर नहीं है।रिपोर्ट के अनुसार, इस सार्वभौमिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए बुनियादी पेयजल के क्षेत्र में वर्तमान प्रगति की दर 4 गुना, सैनिटेशन में 5 गुना और हाइजीन की प्रगति में 4 गुना बढ़ानी होगी।
वर्तमान गति के आधार पर अनुमान है कि 2030 तक दुनिया के केवल 84 प्रतिशत स्कूलों में बुनियादी पानी की सुविधा, 81 प्रतिशत स्कूलों में बुनियादी सैनिटेशन सुविधा और केवल 79 प्रतिशत स्कूलों में बुनियादी हाइजीन सुविधा होगी। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 में भी दुनिया के 10 प्रतिशत स्कूलों में पानी की, 7 प्रतिशत स्कूलों में सैनिटेशन की और 12 प्रतिशत स्कूलों में हाइजीन की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

उल्लेखनीय है कि, WHO और यूनिसेफ का यह जॉइंट मॉनिटरिंग प्रोग्राम पीने के पानी और सैनिटेशन के संबंध में वैश्विक स्तर पर तुलना किए जा सकने वाले अनुमान तैयार करता है और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) के लक्ष्यों की प्रगति पर नजर रखता है। 2030 के एजेंडे में पानी, सैनिटेशन और शिक्षा के लक्ष्य शामिल हैं। जिसमें SDG 4 के तहत सभी के लिए सुरक्षित और प्रभावी सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने का आदेश है, जिसमें WASH सुविधाएं शामिल हैं; जबकि SDG 6 के तहत सभी के लिए सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता का सतत प्रबंधन सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।

