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सूरत-राजकोट कांग्रेस के 65 उम्मीदवारों को अज्ञातवास में ले जाया गया, बुधवार शाम को वापस लाया जाएगा
स्थानीय स्वराज की चुनाव प्रक्रिया में फॉर्म भरे जा चुके हैं, फॉर्म की जांच भी पूरी हो चुकी है। और फॉर्म वापस लेने की अंतिम तिथि 15 अप्रैल है। ऐसे में इससे पहले गुजरात की राजनीति में खासकर सूरत और राजकोट में भारी गर्माहट देखने को मिल रही है। सूरत और राजकोट महानगरपालिका के चुनावी मुकाबले में भाजपा किसी भी तरह का खेल न कर सके, इसके लिए कांग्रेस ने हाईकमान के आदेश से ‘मिशन अज्ञात’ शुरू किया है। इस रणनीति के तहत पार्टी के लगभग 65 मजबूत उम्मीदवारों को अचानक सुरक्षित और गुप्त स्थानों पर भेजकर एक तरह से ‘नजरकैद’ कर दिया गया है, ताकि मतदान से पहले उम्मीदवारों की वफादारी बरकरार रखी जा सके।
सूरत में भी मनपा चुनाव से पहले कांग्रेस ने करीब 40 मजबूत उम्मीदवारों को 11 गुप्त स्थानों पर भेज दिया है। हाईकमान के आदेश से लिए गए इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य विपक्षी दलों द्वारा संभावित संपर्क को रोकना और पार्टी में किसी भी प्रकार की साज़िश को रोकना है। शहर से दूर स्थित इन ‘सेफ हाउस’ की जानकारी केवल कुछ गिने-चुने क्षेत्रीय नेताओं को ही है।
वहीं राजकोट महानगरपालिका चुनाव को लेकर भी माहौल गर्म है। फॉर्म की जांच प्रक्रिया पूरी होते ही कांग्रेस द्वारा फॉर्म वापस लेने की अवधि तक उम्मीदवारों को अज्ञात स्थान पर भेज दिया गया है। राजकोट शहर कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, पुराने और अनुभवी कांग्रेस नेताओं को छोड़कर बाकी 25 उम्मीदवारों को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है, जिन्हें बुधवार शाम को वापस राजकोट लाया जाएगा।
राजकोट शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. राजदीपसिंह जाडेजा ने बताया कि, ‘कल रात भाजपा के बड़े नेताओं द्वारा हमारे उम्मीदवारों पर दबाव बनाने के प्रयास शुरू किए गए थे। इसलिए तुरंत हमारी कांग्रेस और यूथ कांग्रेस की टीम मौके पर पहुंची और भाजपा को दबंगई न करने की चेतावनी दी। भाजपा हार की आशंका से घबराई हुई है, इसलिए वह किसी भी हद तक जा सकती है, इसी कारण हमने यह विशेष निर्णय लिया है। राजकोट में कुल 72 उम्मीदवार हैं। हमारे कांग्रेस पार्टी के सभी 72 उम्मीदवारों को अज्ञात स्थान पर नहीं भेजा गया है। बल्कि वार्डवार हमारे सक्षम उम्मीदवारों और नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। हमारे सक्षम उम्मीदवार और नेता बाकी उम्मीदवारों का ध्यान रखेंगे। कहीं चार उम्मीदवार अज्ञात स्थान पर हैं तो कहीं दो उम्मीदवार क्षेत्र में प्रचार कर रहे हैं और दो अज्ञात स्थान पर हैं। इस वर्ष कांग्रेस पार्टी का एक भी उम्मीदवार भाजपा के दबाव या डर से फॉर्म वापस नहीं लेगा, इसके लिए हमने पूरी तैयारी कर ली है।’
इस रणनीति के तहत उम्मीदवारों की किलेबंदी की गई है। अज्ञात स्थान पर रखे गए उम्मीदवारों के मोबाइल फोन भी जमा कर लिए गए हैं और उन्हें परिवार या किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क न करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इन स्थानों पर किसी नेता या कार्यकर्ता को भी मिलने की अनुमति नहीं है, ताकि उम्मीदवारों का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट जाए।
पार्टी ने सिर्फ उम्मीदवारों ही नहीं, बल्कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स और आवास पर भी ‘कड़ी नजर’ रखी है। भाजपा का कोई नेता उम्मीदवार के परिवार से संपर्क न करे, इसके लिए प्रत्येक उम्मीदवार के घर के पास दो भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को तैनात किया गया है। इसके अलावा, अज्ञात स्थान पर प्रत्येक उम्मीदवार की निगरानी के लिए दो गुप्त ‘शैडो’ कार्यकर्ता भी तैनात किए गए हैं, जो उम्मीदवार की गतिविधियों की सीधी रिपोर्ट हाईकमान को देंगे।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव के दौरान निलेश कुंभाणी जिस तरह गायब हो गए थे और उसके परिणामस्वरूप फॉर्म रद्द होने से कांग्रेस के गढ़ में जो नुकसान हुआ था, उसके कारण पार्टी में भारी ‘कुंभाणी फोबिया’ देखने को मिल रहा है। हार के डर और विश्वासघात से बचने के लिए कांग्रेस द्वारा अपनाई गई यह ‘अज्ञात लोकेशन’ वाली रणनीति फिलहाल सूरत और राजकोट की राजनीति में सबसे बड़ी गतिविधि और चर्चा का विषय बनी हुई है।

