राजस्थान का 960 करोड़ का जल जीवन मिशन घोटाला; 16 हजार पेज की चार्जशीट, आईएएस से लेकर अधिकारी-इंजीनियर तक शामिल

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जयपुर। राजस्थान का बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाला। 960 करोड़ रुपए घोटला मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन आरोपियों के खिलाफ कुल 16000 पेज की चार्जशीट पेश की गई है। 55 बंडलों में तैयार कर इसे दो टेंपो की मदद से एसीबी कोर्ट पहुंचाया गया। घोटाले मे आईएएस से लेकर उच्च अधिकारी समेत इंजीनियर भी शामिल हैं। एसीबी इस मामले में तेजी से जांच कर रही है। 
चार्जशीट में इस बात का उल्लेख किया गया कि फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कपंनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और फर्म मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के उच्च स्तर के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए। इस दौरान करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार हुआ।

रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल को दो दिन की रिमांड पर भेजा

रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल को पुलिस रिमांड खत्म होने पर एक बार फिर एसीबी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से फिर 2 दिन की रिमांड पर भेज दिया। वहीं सुबोध अग्रवाल के वकील की ओर से उनकी सास के निधन होने पर तेरहवीं तक अंतरिम जमानत मांगी गई थी, जिसे एसीबी कोर्ट ने खारिज कर दिया।

11 आरोपियों ने गिरफ्तारी के खिलाफ 11 याचिकाएं लगाईं

मामले में सुबोध अग्रवाल समेत 11 आरोपियों ने गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट में 11 याचिकाएं लगाई हैं। इन पर 21 अप्रैल को सुनवाई होगी। बता दें कि अभी भी तीन मुख्य आरोपी फरार हैं। इनमें जितेंद्र शर्मा (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर), मुकेश गोयल (सुपरिटेंडेट इंजीनियर) और संजीव गुप्ता हैं। कोर्ट इनकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी कर चुकी है।

अब जानते हैं कि क्या है पूरा मामला

दरअसल, अगस्त 2023 को एसीबी ने पीएचईडी इंजीनियर मयंक गोयल, दीपचंद के साथ जेकेटेक एंपनियर जैन और कंपनी के सुपरवाइजर महेश मीणा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। एसीबी ने इनके पास से 2.90 लाख रुपए कैश जब्त किया था। सभी बहोड़ों से जयपुर के होटल पोलो विक्ट्री पहुंचे हुए थे। इन्हें चौमूं पुलिया के पास घेर कर पकड़ लिया था। इनमें पदमचंद जैन और महेश मीणा ने जेकेटेक में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र लगाए थे। दोनों कंपनियों पर जयपुर रीजन प्रथम और द्वितीय के इंजीनियरों से मिलीभगत कर 900 करोड़ के टेंडर लेने का आरोप है। सितंबर-2023 में एसीबी ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर टेंडर हासिल करने के आरोप में श्याम ट्रेडवेल, गणपति ट्रेडवेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद ईडी मामले की जांच कर रहा है।

इन आरोपियों के खिलाफ पेश की गई है चार्जशीट

इसके बाद इस मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और चार्जशीट पेश की गई। इनमें- केडी गुप्ता- चीफ इंजीनियर, दिनेश गोयल- तत्कालीन मुख्य अभियंता पीएचईडी परियोजना, डीके गौड- रिटायर्ड तकनीकी चीफ इंजीनियर, निरिल कुमार- तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सुशील शर्मा- तत्कालीन वित्तीय सलाहकार, शुभांशु दीक्षित- अतिरिक्त मुख्य अभियंता, अरुण श्रीवास्तव-रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता, महेंद्र प्रकाश सोनी- रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता, विशाल सक्सेना- तत्कालीन अधिशाषी अभियंता, मुकेश पाठक- छत्तीसगढ़।

एसीबी ने फरवरी में की थी बड़ी कार्रवाई

एसीबी ने जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर 17 फरवरी को बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर, बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित कुल 15 जगहों पर छापेमारी की गई थी। इसी दिन रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के घर पर छापेमारी की गई थी। मामले में फरार चल रहे पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को 9 अप्रैल को दिल्ली से गिरफ्तार किया था।

केंद्र सरकार की हर घर नल से जुड़ी है जल जीवन मिशन

बता दें कि जल जीवन मिशन घोटाला केंद्र सरकार की हर घर नल पहुंचाने वाली 'जल जीवन मिशन योजना' से जुड़ा है। साल 2021 में श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के ठेकेदार पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र दिखाकर जलदाय विभाग से करोड़ों रुपए के 4 टेंडर हासिल किए थे। श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी कार्य प्रमाण पत्रों से पीएचईडी की 68 टेंडर में भाग लिया था। उनमें से करोड़ों के 31 टेंडर हासिल किए थे। वहीं, श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने 169 निविदाओं में भाग लिया और 73 निविदाओं में करोड़ों के टेंडर हासिल किए थे। इसके बाद घोटाले का खुलासा होने पर एसीबी ने जांच शुरू की थी और कई भ्रष्ट अधिकारियों को दबोचा। इसके बाद सीबीआई ने 3 मई 2024 को केस दर्ज किया। ईडी ने अपनी जांच पूरी कर 4 मई को सबूत और दस्तावेज एसीबी को सौंप दिए थे।

टेंडर पाने के लिए 15 लाख में बनाए थे फर्जी सर्टिफिकेट

जल जीवन मिशन (जेजेएम) में घोटाले को लेकर एसीबी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी समेत 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में एसीबी की टीम को सबसे बड़ी और पहली लीड एक प्राइवेट ऑफिस सहायक और अहमदाबाद निवासी मुकेश पाठक से मिली थी। मुकेश से पूछताछ में सामने आया था कि फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल के प्रोपराइटर महेश मित्तल और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल के प्रोपराइटर पदमचंद जैन के लिए 15 लाख रुपए में इरकॉन इंटरनेशनल कंपनी के नाम से फर्जी सर्टिफिकेट बनाए गए थे।


अपने कबूलनाम में क्या कहा था मुकेश पाठक ने

मुकेश पाठक ने ही पीएचईडी के सभी ऑफिस से भी इन फर्जी प्रमाण पत्रों के संबंध में सत्यापन के ईमेल का जवाब भी दिया था। मुकेश ने एसीबी को बताया था कि उसने महेश मित्तल के कहने पर फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का काम किया। इसके लिए महेश से 15 लाख रुपए से अधिक राशि ली। इसके एवज में फर्म श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी व फर्म श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के नाम इरकॉन इंटरनेशनल कंपनी के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर महेश मित्तल को दिए।

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