राम मंदिर पर राहुल गांधी का पीएम मोदी को पत्र, ट्रस्ट के खाते सार्वजनिक करने की मांग…क्या विपक्ष की सुनेगी सरकार?

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अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच, खातों को सार्वजनिक करने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। दूसरी ओर, मामले की जांच कर रही एसआईटी आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू’ और उसके भतीजे मनीष से पूछताछ में जुटी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या विपक्ष की सुनेगी मोदी सरकार? संसद सत्र शुरू होने वाली है और इसके साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट की 22 जुलाई को बैठक भी होने वाली है। एक ओर जहां विपक्ष राम मंदिर मामले में सरकार को घेरने की कोशिश में है, वहीं दूसरी ओर यह भी देखना है कि 22 जुलाई की ट्रस्ट की बैठक में क्या बड़ा फैसला निकलकर आता है।

बता दें कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस ने केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की जवाबदेही पर सीधे सवाल उठाए हैं। मोदी के नाम से लिखे पत्र को सार्वजनिक करते हुए राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा ट्रस्ट के खातों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु यह जान सके कि मंदिर में मिले चढ़ावे का उपयोग कहां और किस उद्देश्य से किया गया।

संसद में स्वयं पीएम ने ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी: विपक्ष

पत्र में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद में स्वयं प्रधानमंत्री ने ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी, जबकि इसके सदस्यों की नियुक्ति सरकार द्वारा की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के कई सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और उनसे जुड़े संगठनों से जुड़े रहे हैं। पूर्व महासचिव चंपत राय को भी प्रधानमंत्री का करीबी बताते हुए पत्र में कहा गया कि ऐसे मामले में प्रधानमंत्री की चुप्पी स्वीकार्य नहीं है और सरकार व ट्रस्ट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जवाबदेही तय करना आवश्यक है। 

इधर, चंपत राय के करीबी टिन्नू से कई घंटे तक पूछताछ करती रही पुलिस

उधर, इस मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू’ और उसके भतीजे मनीष की पुलिस कस्टडी का रविवार को अंतिम दिन रहा। जेल से 39 घंटे की रिमांड पर लेकर पुलिस ने स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप कार्यालय में पूछताछ की। देर रात तक दोनों से लगातार पूछताछ होती रही, हालांकि उन्हें किसी अन्य स्थान पर नहीं ले जाया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार टिन्नू मंदिर के दानपात्रों की देखरेख से जुड़ा था और पूर्व महासचिव चंपत राय का करीबी माना जाता रहा है। वहीं मनीष चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम का हिस्सा था। पुलिस ने टिन्नू के घर से एक लाख रुपये और मनीष के घर से दो लाख रुपये बरामद किए हैं। इससे पहले इसी मामले में अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, रमाशंकर मिश्रा और करुणेश को भी पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा चुकी है। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया गया है और पुलिस मंदिर संचालन से जुड़े अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाल रही है। 

ट्रस्ट के नए सीईओ के लिए 5 हजार से ज्यादा आवेदन मिले

इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया भी चर्चा में है। ट्रस्ट के अनुसार इस पद के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 18 जुलाई तक लगभग पांच हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों पर 22 जुलाई को अयोध्या में होने वाली ट्रस्ट की बैठक में विचार किया जाएगा। 22 जुलाई को मणिराम दास छावनी में प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक का एजेंडा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में ट्रस्ट में रिक्त पदों पर चर्चा, 6 जुलाई की बैठक में आई सिफारिशों पर निर्णय, एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट की समीक्षा, नए सीईओ की नियुक्ति तथा ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े अन्य विषयों पर विचार किया जाएगा।

ट्रस्ट ने बताया- अब तक 3264 करोड़ मिले, इनमें 2370 करोड़ खर्च हुए

ट्रस्ट की ओर से जारी वित्तीय विवरण के अनुसार, निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस डोनेशन के माध्यम से अब तक कुल 3,264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इनमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं। वहीं ट्रस्ट के गठन से लेकर 31 मार्च 2026 तक श्रद्धालुओं से 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला, जिसमें से 391 करोड़ रुपये मंदिर संचालन और अन्य कार्यों पर व्यय किए गए, जबकि शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित रखी गई है।

अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ

चंयत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए, जबकि गोपाल नागरकट्टे को स्पेशल इनवाइटी की सूची से भी हटा दिया गया।

ट्रस्ट ने कहा-अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी

ट्रस्ट का कहना है कि पूरे मामले की कानूनी जांच अभी जारी है और अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। ट्रस्ट ने यह भी दावा किया है कि श्रद्धालुओं द्वारा भेंट किए गए 2,926 प्रकार के उपहारों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है। इनका प्रत्येक वर्ष स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म से सत्यापन कराया जाता है और श्रद्धालु अनुमति लेकर अपने दान से संबंधित जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

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