- Hindi News
- राष्ट्रीय
- 20 साल में 25 तबादले, लेकिन ईमानदारी से IAS अफसर ने नहीं किया समझौता
20 साल में 25 तबादले, लेकिन ईमानदारी से IAS अफसर ने नहीं किया समझौता
महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अफसर तुकाराम मुंढे अपने सख्त सख्त रवैये और नियमों का पालन कराने वाले अफसर के तौर पर जाने जाते हैं l यही कारण है की तुकाराम मुंढे को अपने करियर में कई बार तबादले का सामना करना पड़ा है l 20 साल में उनका 25 बार तबादला हो चुका है l
कुछ वर्ष पहले तुकाराम मुंढे को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) में कमिश्नर नियुक्त किया गया और इसके बाद से उन्होंने खाद्य सुरक्षा को लेकर पूरे महाराष्ट्र में सख्त कार्रवाई की है l
मुंबई में खाद्य कारोबार से जुड़े लोग इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि तुकाराम मुंढे कितने सख्त अधिकारी हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आयुक्त का पद संभालते ही उन्होंने साफ संदेश दिया था कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने घोषणा की थी कि पूरे महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा।

अपने इस ऐलान के बाद मुंढे ने कार्रवाई भी उसी तेजी से शुरू की। मुंबई समेत राज्य के कई इलाकों में होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और खाद्य प्रतिष्ठानों पर लगातार छापेमारी की गई। कई नामी प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पाए गए, जिसके बाद नोटिस जारी किए गए और कानूनी कार्रवाई भी की गई। उनकी इस सख्ती से खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया।
तुकाराम मुंढे अपनी कड़ी कार्यशैली के लिए पहले से ही जाने जाते हैं। साल 2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे महाराष्ट्र के बीड जिले के रहने वाले हैं। बेहद साधारण परिवार से आने वाले मुंढे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला परिषद के स्कूल से की और फिर UPSC परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई।
अपने करीब 20 साल के प्रशासनिक करियर में उनका लगभग 25 बार तबादला हो चुका है। हालांकि, बार-बार स्थानांतरण के बावजूद उन्होंने हर पद पर नियमों का सख्ती से पालन कराया और किसी भी तरह के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने से इनकार किया। यही वजह है कि उन्हें महाराष्ट्र के सबसे ईमानदार और बेबाक अधिकारियों में गिना जाता है।

इससे पहले भी वे नगर निगम आयुक्त, परिवहन विभाग और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अवैध निर्माण, भ्रष्टाचार, नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सख्त कदम उठाते रहे हैं। उनकी इसी कार्यशैली ने उन्हें जनता के बीच एक सख्त लेकिन ईमानदार अधिकारी की पहचान दिलाई है।
उनके समर्थकों का मानना है कि उनकी ईमानदार और बेबाक कार्यशैली ही लगातार ट्रांसफर की बड़ी वजह रही। सोलापुर के कलेक्टर के रूप में कार्यकाल के दौरान उन्होंने सैकड़ों गांवों तक जल पहुंचाने की पहल की, जिसके चलते उन्हें 'महाराष्ट्र का वॉटर मैन' भी कहा जाने लगा।
बाद में जब उन्हें नवी मुंबई नगर निगम का आयुक्त बनाया गया, तो उन्होंने अवैध निर्माणों के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ दिया। अनधिकृत होर्डिंग्स और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की। इसी दौरान उन्होंने 'आयुक्त के साथ सैर' नाम से एक पहल शुरू की, जिसके तहत वे सुबह-सुबह शहर का निरीक्षण कर समस्याओं का जायजा लेते थे। हालांकि, उनकी इस कड़ी कार्यशैली को लेकर कुछ लोगों ने उन पर तानाशाही अंदाज में काम करने के आरोप भी लगाए।
तबादला का मामला पंहुचा महाराष्ट्र विधान सभा
तुकाराम मुंढे के लगातार होने वाले तबादले कई बार राजनीतिक मुद्दा भी बन चुके हैं। यह मामला महाराष्ट्र विधानसभा तक पहुंचा, जहां एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने मांग की कि मुंढे का कम से कम तीन साल तक तबादला न किया जाए। आव्हाड का कहना था कि एक ईमानदार अधिकारी होने की वजह से मुंढे और उनके परिवार को लगातार धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने भी खुलकर उनका समर्थन किया।
विधानसभा में इस मुद्दे पर जवाब देते हुए राज्य के मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि फिलहाल सरकार के पास मुंढे के तबादले का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच कराई जाएगी। मुंढे के करीबी लोगों का कहना है कि बार-बार होने वाले तबादलों का असर उनके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ता है। लगातार नई जगह तैनाती मिलने से उनके बच्चों को कई बार स्कूल बदलना पड़ा, जिससे परिवार को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

