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दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन, कहा- 'सरकार का वादा अब भी अधूरा'
जम्मू-कश्मीर को तत्काल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और मोदी सरकार को संसद तथा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष की गई अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने की याद दिलाने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने सोमवार को दिल्ली में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता 'जम्मू और कश्मीर हाउस' पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां (प्लेकार्ड्स) थीं, जिन पर "अपना वादा पूरा करो", "जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार और गरिमा बहाल करो" और "पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करो" जैसे नारे लिखे हुए थे।

इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने "मोदी का वादा, क्यों रहा आधा?" जैसे तीखे नारे भी लगाए। इसी दौरान, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला 'कॉन्स्टिट्यूशन क्लब' की ओर पैदल जाते दिखाई दिए, जहां जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के विषय पर एक संगोष्ठी (सेमिनार) का आयोजन किया गया था।
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने संसद और सुप्रीम कोर्ट में किया था वादा: फारूक अब्दुल्ला
पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा "हम पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए लड़ रहे हैं, जिसका वादा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने संसद में, सुप्रीम कोर्ट में और जम्मू-कश्मीर की जनता से किया था। मुझे उम्मीद है कि सरकार इस देश के लोगों की इच्छाओं का सम्मान करेगी। मुझे उम्मीद है कि वे देश की भलाई के लिए काम करेंगे, लद्दाख की समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल होगा।"
केंद्र को वादा याद दिलाने दिल्ली आना दुर्भाग्यपूर्ण: उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को केंद्र सरकार को उसका वादा याद दिलाने के लिए दिल्ली आना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा "आपने जम्मू-कश्मीर की जनता से वादा किया था कि चुनावों के बाद आप राज्य का दर्जा बहाल कर देंगे। आज लगभग डेढ़ साल बीत चुका है, लेकिन न तो प्रधानमंत्री और न ही गृहमंत्री ने वह वादा पूरा किया है।"

चौधरी ने आगे स्पष्ट किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और उनके गठबंधन के सहयोगी दल केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर के लोगों को दिए गए आश्वासन की याद दिलाने के लिए दिल्ली में एकत्र हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "आपने संसद में, सुप्रीम कोर्ट में और जम्मू-कश्मीर के एक-एक बच्चे से वादा किया था कि आप राज्य का दर्जा बहाल करेंगे। आखिर वह 'उपयुक्त समय' कब आएगा?"
अगस्त 2019 से केंद्र शासित प्रदेश है जम्मू-कश्मीर
गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को पुनर्गठित करके दो केंद्र शासित प्रदेशों—'जम्मू और कश्मीर' तथा 'लद्दाख' में विभाजित कर दिया गया था। दिसंबर 2023 में, उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने केंद्र के इस फैसले की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, लेकिन साथ ही यह टिप्पणी भी की थी कि जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए।

