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चुनाव खत्म होते ही सरकार को याद आया ‘संकट’, अखिलेश यादव का तीखा प्रहार
लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होते ही देश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई सात सूत्रीय अपील को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। यादव ने इस अपील को सरकार की ‘विफलता की स्वीकारोक्ति’ करार देते हुए कहा कि जैसे ही वोटिंग खत्म हुई, भाजपा का ‘खोट’ सामने आ गया है।
अखिलेश यादव ने पीएम मोदी की अपील के समय पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान सरकार को किसी संकट की आहट नहीं हुई, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उन्हें ‘संकट’ याद आ गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि असल में देश के लिए सबसे बड़ा संकट भाजपा खुद है। सपा प्रमुख ने पूछा कि यदि इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं, तो फिर ‘5 ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ का सपना कैसे पूरा होगा?
अखिलेश यादव ने गिरते रुपये और महंगाई को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पाताल की ओर जा रहा है। सरकार के हाथ से नियंत्रण पूरी तरह छूट चुका है। जनता से सोना न खरीदने की अपील पर उन्होंने कहा कि भाजपा को यह नसीहत अपने भ्रष्ट नेताओं को देनी चाहिए। जनता तो पहले से ही 1.5 लाख रुपये तोला सोना खरीदने की स्थिति में नहीं है। भाजपा के लोग ही अपनी काली कमाई को सोने में बदलकर निवेश कर रहे हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि इसकी सच्चाई लखनऊ से गोरखपुर और अहमदाबाद से गुवाहाटी तक कहीं भी पता की जा सकती है।
अखिलेश यादव ने भाजपा की कथनी और करनी में अंतर बताते हुए पूछा कि चुनाव के दौरान जो हजारों चार्टर विमान उड़ाए गए, क्या वे पानी से चल रहे थे?
क्या भाजपा नेता होटलों में नहीं रुक रहे थे या सिलेंडर की फोटो लगाकर खाना बना रहे थे? चुनाव में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रचार क्यों नहीं किया गया? क्या सारी पाबंदियां और त्याग सिर्फ जनता के लिए ही हैं?
उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार की इस तरह की अपीलों से बाजार में मंदी, महंगाई का डर और घबराहट फैल जाएगी, जिससे व्यापार जगत में निराशा पैदा होगी। सपा प्रमुख ने देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति के लिए भाजपा की विदेश नीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक ‘गुट-निरपेक्षता’ (Non-Alignment) की नीति को त्यागकर कुछ खास गुटों के दबाव में काम करने का खामियाजा आज देश भुगत रहा है। इसकी मार किसान, मजदूर, युवा, गृहणी और व्यापारी समेत हर वर्ग पर पड़ रही है।
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने हर मोर्चे पर देश को नुकसान पहुँचाया है:
सांस्कृतिक और सामाजिक: नफरत फैलाकर सामाजिक सौहार्द और संस्कृति को प्रदूषित किया।
धार्मिक: साधु-संतों पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा।
राजनीतिक: चुनावी धांधलियों से राजनीति को गंदा कर दिया।
नहीं चाहिए भाजपा
अखिलेश यादव ने अंत में कहा कि सरकार का काम संसाधनों का सही उपयोग कर आपदा से उबारना होता है, न कि जनता के बीच भय फैलाना। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अपील के बाद जनता में जो आक्रोश पैदा हुआ है, उसे भाजपा अपने किसी भी ‘चुनावी जुगाड़’ से मैनेज नहीं कर पाएगी। अब देश एक ही सुर में कह रहा है– नहीं चाहिए भाजपा!

