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'आप अभी तक कुंवारे क्यों हैं...' जब CM सुवेंदु अधिकारी ने शादी न करने की वजह बताई
पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से उभरते व्यक्तित्व वाले सुवेंदु अधिकारी अब अपने राजनीतिक करियर के शिखर पर पहुंच गए हैं। शनिवार (9 मई) सुबह 11 बजे उन्होंने राज्य के पहले BJP मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। इसे बंगाल की राजनीति में केवल सत्ता परिवर्तन ही नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक युग का अंत और एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। आज उन्होंने CM के रूप में शपथ ले ली है, ऐसे में उनकी राजनीतिक यात्रा केवल खबरों में ही नहीं है, बल्कि उनके निजी जीवन के बारे में जानने के लिए भी लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। लोग जानना चाहते हैं कि सुवेंदु के परिवार में और कौन है और वे क्या करते हैं।
CM सुवेंदु कुंवारे हैं। उन्होंने खुद बताया कि उन्होंने शादी क्यों नहीं की। राजनीतिक परिवार से आने वाले CM सुवेंदु के पिता शिशिर अधिकारी भी बंगाल की राजनीति में एक प्रमुख व्यक्ति रहे हैं। पूर्व मिदनापुर में इस परिवार का लंबे समय से मजबूत प्रभाव रहा है, जो CM सुवेंदु के राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत बनाता है। पिछली दो चुनावों में CM सुवेंदु अधिकारी ने जिस तरह ममता बनर्जी को हराया, वह उनकी रणनीति, संगठनात्मक नियंत्रण और आक्रामक प्रचार को दर्शाता है। CM सुवेंदु ने बंगाल में BJP को मजबूत आधार दिया। यही वजह है कि अब उन्हें राजनीतिक गलियारों में 'जायंट किलर' का नया उपनाम दिया गया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपने आक्रामक रवैये और तीखे बयानों के लिए अक्सर खबरों में रहने वाले CM सुवेंदु अधिकारी अपने निजी जीवन को लेकर भी लोगों में जिज्ञासा का विषय रहे हैं। खासकर एक सवाल बार-बार पूछा जाता है कि वे 55 साल की उम्र तक कुंवारे क्यों रहे। दिसंबर 2020 में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए CM सुवेंदु अधिकारी ने खुद बताया था कि लोग अक्सर उनसे पूछते हैं कि उनके भाइयों ने शादी कर ली है, तो उन्होंने शादी क्यों नहीं की। उन्होंने जवाब दिया, 'बहुत लोग पूछते हैं, सुवेंदु, आप कुंवारे क्यों हैं? आपके भाई तो शादीशुदा हैं। मैं उन्हें कहता हूं कि आज की राजनीति में, मैं खुद को कुंवारा नहीं मानता।
सुवेंदु अधिकारी ने समझाया कि वे 1987 में छात्र राजनीति से जुड़े। धीरे-धीरे राजनीति उनके जीवन का केंद्र बन गई और फिर उन्होंने खुद को पूरी तरह सार्वजनिक जीवन के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने खास तौर पर अपने इलाके के तीन प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख किया-सतीश सामंत, सुशील धारा और अजय मुखर्जी। CM सुवेंदु के मुताबिक, इन तीन नेताओं के जीवन से उन्हें हमेशा प्रेरणा मिली है। उन्होंने बताया कि ये तीनों स्वतंत्रता सेनानी कुंवारे थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज और देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। CM सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनसे प्रेरित होकर उन्होंने भी कुंवारे रहकर राजनीति और जनसेवा का रास्ता चुना। उनके शब्दों में, 'मैं कुंवारा रहकर काम कर रहा हूं, इन तीनों का अनुसरण करते हुए।' इस बयान के जरिए CM सुवेंदु ने यह दिखाने की कोशिश की कि उनकी राजनीति केवल सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इसे एक मिशन और लोगों की सेवा के रूप में देखते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि उनका परिवार केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा बंगाली समाज उनका परिवार है। CM सुवेंदु के मुताबिक, समाज और लोगों की सेवा करने के लिए कई व्यक्तिगत इच्छाओं और सुखों का त्याग करना पड़ता है। अपनी राजनीतिक और वैचारिक प्रेरणाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता सतीश सामंत और सुशील धारा हमेशा समाज के प्रति समर्पण की बात करते थे। उनके विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने जीवनभर कुंवारे रहने का फैसला किया। CM सुवेंदु अधिकारी के इस बयान की उस समय व्यापक चर्चा हुई थी।
नंदीग्राम में अपनी पहचान बनाने वाले CM सुवेंदु एक समय ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में माने जाते थे। हालांकि, TMC छोड़कर BJP में शामिल होने के बाद उन्होंने बंगाल में पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में खुद को स्थापित किया। खास बात यह है कि उन्होंने केवल विपक्ष की राजनीति ही नहीं की, बल्कि ममता सरकार के खिलाफ लगातार जमीनी स्तर पर माहौल भी बनाया। अपनी शांत लेकिन आक्रामक राजनीतिक शैली के लिए पहचाने जाने वाले CM सुवेंदु अधिकारी हमेशा खुद को जमीनी नेता के रूप में पेश करते रहे हैं। चाहे किसान आंदोलन हो, नंदीग्राम संघर्ष हो या बंगाल में BJP का विस्तार, उन्होंने हर मोड़ पर खुद को अलग साबित किया। अब सबकी नजर इस पर है कि CM बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी बंगाल की राजनीति और प्रशासन को किस दिशा में ले जाते हैं। BJP इसे 'नए बंगाल' की शुरुआत बता रही है, जबकि विपक्ष के लिए यह आने वाले दिनों की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है।

