गुजरात में पाटीदार समाज और भाजपा: अटल विश्वास की गाथा

Hindi Khabarchhe Picture
On

(उत्कर्ष पटेल)

गुजरात की राजनीतिक निरंतरता में पाटीदार समाज एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली तत्व के रूप में भूमिका निभाता है। इस समाज ने धूप-छांव में भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का साथ दिया है। समाज के लोगों ने हमेशा भाजपा को चुनावों में भरपूर वोट देकर समर्थन दिया है और लगातार विश्वास जताया है।

2

पाटीदार समाज, जिसे पटेल के नाम से भी जाना जाता है, गुजरात के किसान और व्यापारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। यह समाज मुख्य रूप से सौराष्ट्र, उत्तर गुजरात, मध्य गुजरात और दक्षिण गुजरात में सूरत शहर में निवास करता है और राज्य की अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 1980 के दशक में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी के ‘खाम’ (क्षत्रिय-हरिजन-आदिवासी-मुस्लिम) सूत्र ने पाटीदारों को अलग-थलग कर दिया। परिणामस्वरूप समाज ने कांग्रेस से मुंह मोड़ लिया और भाजपा के प्रति पाटीदार समाज की भावना बढ़ी। यह परिवर्तन गुजरात की राजनीति में एक बड़ा मोड़ था। 1995 के विधानसभा चुनाव में केशुभाई पटेल जैसे समाज को समर्पित और किसान हित की बात करने वाले पाटीदार नेता के नेतृत्व में भाजपा ने सरकार बनाई और पाटीदार समाज ने इसे अपनी जीत के रूप में स्वीकार किया। इसी समय से पाटीदार समाज और भाजपा के बीच अटल संबंधों की शुरुआत हुई। इसके बाद वर्षों तक पाटीदार समाज ने भाजपा को लगातार समर्थन दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान गुजरात के विकास मॉडल ने पूर्णतः पाटीदार समाज को आकर्षित किया।

3

पाटीदार समाज के किसान, उद्योगपति और युवाओं को भाजपा की नीतियों में हिंदुत्व के प्रति समर्पण, विकास और स्थिरता की आशा दिखाई दी। 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में पाटीदार बहुल क्षेत्रों में भाजपा को अद्भुत समर्थन मिला। समाज ने पार्टी को केवल वोट ही नहीं दिए बल्कि कार्यकर्ता देकर संगठनात्मक कार्यों में भी पूरा सहयोग दिया। पाटीदार नेताओं ने भाजपा के विभिन्न छोटे-बड़े महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करके पार्टी को मजबूत बनाया।

4

धूप-छांव में भी पाटीदार समाज का भाजपा को समर्थन अटल बना रहा। 2015 में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान कुछ विरोध होने के बावजूद समाज के बड़े हिस्से ने भाजपा को वोट देकर विश्वास बनाए रखा। शहरी क्षेत्रों के पाटीदारों ने पार्टी को लगातार समर्थन दिया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कुछ क्षेत्रों में असर पड़ने के बावजूद भाजपा ने सरकार बनाई और पाटीदार समाज ने इसे स्वीकार कर आगे बढ़ने का रास्ता अपनाया तथा इस समय भी समाज ने भाजपा की विकासोन्मुख नीतियों पर विश्वास किया। 2021 में भूपेंद्रभाई पटेल को मुख्यमंत्री बनाए जाने से समाज में नए उत्साह की लहर आई और यह निर्णय पाटीदार समाज के विश्वास को और अधिक मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

5

2022 के विधानसभा चुनावों में इस विश्वास का परिणाम स्पष्ट रूप से देखने को मिला। भाजपा ने 48 पाटीदार उम्मीदवारों को टिकट दिया था और उनमें से 41 जीत गए। पाटीदार बहुल अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा ने विजय प्राप्त की। इस चुनाव में समाज ने एक बार फिर भाजपा को भरपूर समर्थन दिया और भाजपा की विकासोन्मुख कार्यशैली पर विश्वास जताया। 2024 के लोकसभा चुनावों में भी पाटीदार समाज के समर्थन से भाजपा ने गुजरात में अद्भुत परिणाम हासिल किए। वर्षों के चुनावी आंकड़े दर्शाते हैं कि पाटीदार समाज ने लगातार भाजपा को वोट देकर उसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित की है।

पाटीदार समाज के इस समर्थन के पीछे अनेक कारण हैं
पहला, भाजपा की हिंदुत्व और विकास की विचारधारा समाज के सांस्कृतिक और आर्थिक मूल्यों से जुड़ी हुई है।
दूसरा, पार्टी ने समाज के युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और उद्योग विकास पर जोर दिया है।
तीसरा, भाजपा के नेतृत्व में गुजरात के समग्र विकास में पाटीदारों को लाभ मिला है। कृषि, डेयरी, गृह-लघु-मध्यम और बड़े उद्योग-व्यापार में वे आगे बढ़े हैं। समाज ने विकास को भाजपा की स्थिर सरकार का परिणाम मानकर स्वीकार किया है। विशेष रूप से स्थानीय स्तर पर पंचायत, नगरपालिकाओं तथा महानगरपालिकाओं के चुनावों में भी पाटीदारों ने भाजपा को लगातार वोट दिए, जिससे पार्टी का ग्रामीण और शहरी स्तर पर वर्चस्व कायम रहा है।

6

आज वर्ष 2026 तक भी यह समीकरण कायम है। भूपेंद्रभाई पटेल जैसे पाटीदार मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं शुरू की और चलाई हैं, जिनसे समाज के युवाओं और महिलाओं को लाभ मिला है। पाटीदार समाज ने इसे अपने विश्वास का परिणाम माना है। बहुसंख्यक समाज मानता है कि भाजपा ही समाज के हितों की रक्षा कर सकती है और गुजरात को विकसित राज्य बनाने में मदद कर सकती है।

निष्कर्ष रूप में निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि गुजरात में पाटीदार समाज ने भाजपा को हमेशा समर्थन दिया है और लगातार विश्वास जताया है। धूप-छांव में भी यह समर्थन निरंतर बना रहा है। यह संबंध केवल राजनीतिक नहीं बल्कि विकास, स्थिरता और सांस्कृतिक जुड़ाव का भावनात्मक समीकरण है।

(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवक और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

About The Author

More News

पश्चिम बंगाल: मैं वकील हूं और अब खुलकर लड़ूंगी’; भाजपा के खिलाफ ममता बनर्जी की बड़ी घोषणा

Top News

पश्चिम बंगाल: मैं वकील हूं और अब खुलकर लड़ूंगी’; भाजपा के खिलाफ ममता बनर्जी की बड़ी घोषणा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ बिगुल...
राजनीति 
पश्चिम बंगाल: मैं वकील हूं और अब खुलकर लड़ूंगी’; भाजपा के खिलाफ ममता बनर्जी की बड़ी घोषणा

तमिलनाडु: बेटे का कोर्ट केस और जुदा हुई राहें: जानिए विजय को 'थलपति' बनाने वाले पिता एस.ए. चंद्रशेखर की कहानी

जब तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय ने 1992 में अपने पिता और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक S.A. चंद्रशेखर के साथ फिल्म...
राजनीति 
तमिलनाडु: बेटे का कोर्ट केस और जुदा हुई राहें: जानिए विजय को 'थलपति' बनाने वाले पिता एस.ए. चंद्रशेखर की कहानी

गुजरात में पाटीदार समाज और भाजपा: अटल विश्वास की गाथा

(उत्कर्ष पटेल) गुजरात की राजनीतिक निरंतरता में पाटीदार समाज एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली तत्व के रूप में भूमिका निभाता है।...
ओपिनियन 
गुजरात में पाटीदार समाज और भाजपा: अटल विश्वास की गाथा

अर्शदीप सिंह के व्लॉग बनाने पर BCCI का प्रतिबंध, क्या इसकी वजह युजवेंद्र चहल हैं?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने IPL 2026 के दौरान खिलाड़ियों के व्यवहार और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर एक...
खेल 
अर्शदीप सिंह के व्लॉग बनाने पर BCCI का प्रतिबंध, क्या इसकी वजह युजवेंद्र चहल हैं?

बिजनेस

Copyright (c) Khabarchhe All Rights Reserved.