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एक ही पासवर्ड से पूरे देश में पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल किया जा सकेगा! TRAI ला रहा है नई सिस्टम
क्या आप रेलवे स्टेशनों, सार्वजनिक पुस्तकालयों, उद्यानों या मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर पब्लिक वाई-फाई का उपयोग करते हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो आप बार-बार OTP आने और फिर से लॉग इन करने की झंझट से परेशान हो चुके होंगे। लेकिन अब, यह समस्या जल्द ही हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। भारत सरकार जनता की सुविधा के लिए एक हाई-टेक सिस्टम पेश करने की तैयारी कर रही है, जहां आपको देशभर के 4,00,000 से अधिक वाई-फाई हॉटस्पॉट्स के लिए केवल एक बार पासवर्ड दर्ज करना होगा। सिर्फ एक बार लॉग इन करना होगा और बिना किसी परेशानी के देश में कहीं भी हाई-स्पीड वाई-फाई का आनंद ले सकेंगे।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने PM-WANI की कमियों को दूर करने और इंटरनेट एक्सेस को आसान बनाने के उद्देश्य से एक नया कंसल्टेशन पेपर जारी किया है।
भारत में वर्तमान में लगभग 4,00,000 सक्रिय हॉटस्पॉट्स हैं, लेकिन उपयोगकर्ताओं को हर नए स्थान पर फिर से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। अब नई सिस्टम आने के बाद: आप केवल एक ही पासवर्ड या OTP दर्ज करके देशभर में किसी भी सार्वजनिक Wi-Fi नेटवर्क से कनेक्ट हो सकेंगे।
यह सुरक्षित डिजिटल भुगतान सुनिश्चित करने के लिए WPA3 (Wi-Fi प्रोटेक्टेड एक्सेस 3) जैसे नवीनतम सुरक्षा मानकों का उपयोग करेगा। इससे UPI और बैंकिंग लेनदेन पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। शहरों में हाई-स्पीड इंटरनेट लागू किया जाएगा, और गांवों में कम्युनिटी Wi-Fi मॉडल लागू किया जाएगा।
TRAI का मानना है कि पुरानी सिस्टम इसलिए विफल हो गई, क्योंकि उसमें ऑपरेटरों को कमाई का कोई बड़ा मार्जिन नहीं मिलता था। जबकि नए मॉडल में ऑपरेटरों के लिए कमाई के 3 रास्तों का सुझाव दिया गया है: छोटी-छोटी विज्ञापनों के साथ मुफ्त इंटरनेट, हाई-स्पीड डेटा के लिए प्रीमियम सब्सक्रिप्शन्स, और सरकार की ओर से वित्तीय सहायता।
मीडिया रिपोर्ट्स और आंकड़ों के अनुसार, भारत की 140 करोड़ की आबादी में से फिलहाल केवल 2 प्रतिशत लोग ही सार्वजनिक Wi-Fi का उपयोग कर रहे हैं। इसकी तुलना में, दक्षिण कोरिया में 80 प्रतिशत लोग और संयुक्त राज्य अमेरिका में 70 प्रतिशत लोग सार्वजनिक Wi-Fi का उपयोग करते हैं। BSNL के पूर्व चेयरमैन अरुण श्रीवास्तव के अनुसार, इस कदम से न केवल इंटरनेट सस्ता होगा, बल्कि मोबाइल नेटवर्क पर बढ़ते डेटा के बोझ को भी कम किया जा सकेगा।

