प्रशांत कोराट को काम करते देखकर सवजीभाई कोराट की याद आती है

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(उत्कर्ष पटेल)

सवजीभाई कोराट सौराष्ट्र और गुजरात भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए कोई अनजाना नाम नहीं हैं। “सौराष्ट्र के छोटे सरदार” के नाम से प्रसिद्ध सवजीभाई कोराट का जीवन समाजसेवा को समर्पित रहा। उनका जन्म 6 अगस्त 1953 को जेतपुर क्षेत्र के जुनी सांकली गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें नेतृत्व और सेवा भाव के गुण दिखाई देते थे।

कॉलेज के दिनों में वे सामाजिक कार्यों और राजनीति में सक्रिय रहे तथा पी.डी. मालवीया कॉलेज के जनरल सेक्रेटरी (GS) बने। इसके बाद वे पहली बार जेतपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। वर्ष 1995 में दोबारा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने केशुभाई पटेल और सुरेशभाई मेहता सरकार में सड़क एवं भवन तथा पंचायत राज्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया। तीसरी बार विधायक बनने के बाद उन्होंने कैबिनेट मंत्री के तौर पर सड़क और भवन विभाग में उल्लेखनीय कार्य किए।

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सवजीभाई की कार्यशैली बेहद अलग थी। वे निडर, मेहनती और सेवाभावी व्यक्तित्व के धनी थे। किसान परिवार से आने के कारण वे आम लोगों की समस्याओं को आसानी से समझ लेते थे और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करते थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सरकारी कार्यालयों, सर्किट हाउस और निर्माण स्थलों पर अचानक निरीक्षण कर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। उनकी यह पहल पूरे गुजरात में चर्चा का विषय बनी रहती थी।

वे हमेशा कहते थे कि “कर्म महान होता है, पद नहीं।” इसी सोच के साथ वे विकास कार्यों में लगातार जुटे रहे। सड़क एवं भवन विभाग में कई पुलों, सड़कों और ग्राम पंचायत व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके सेवाभावी स्वभाव के कारण जेतपुर और सौराष्ट्र के लोग उन्हें “छोटे सरदार” कहकर संबोधित करते थे।

सवजीभाई जनसंपर्क को बहुत महत्व देते थे। वे गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनते, समझते और उनके समाधान के लिए काम करते थे। उनकी सक्रियता और ईमानदारी युवाओं के लिए प्रेरणा बनी।

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26 नवंबर 1998 को मात्र 45 वर्ष की आयु में उनके निधन से पूरे सौराष्ट्र में शोक की लहर फैल गई थी। आज गुजरात में उनके नाम पर अस्पताल, पुल और सड़कें बनाई गई हैं। Narendra Modi ने उनकी प्रतिमा का अनावरण भी किया था। श्री सवजीभाई कोराट ट्रस्ट आज भी स्वास्थ्य शिविर, शिक्षा और समाजसेवा के कार्य कर रहा है।

ऐसे पिता के पुत्र Prashant Korat को आज उसी जोश और समर्पण के साथ काम करते देखकर लोगों को सवजीभाई की याद आना स्वाभाविक है। वर्तमान में प्रशांत कोराट गुजरात भाजपा के प्रदेश महामंत्री के रूप में कार्यरत हैं। वे भी अपने पिता की तरह सेवाभावी व्यक्तित्व रखते हैं।

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ट्रस्ट द्वारा आयोजित स्वास्थ्य शिविरों, जनसंपर्क अभियानों और संगठन के कार्यों में वे लगातार सक्रिय रहते हैं। अपने पिता की तरह वे भी निडर और मेहनती हैं। लोगों की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं। उनकी कार्यशैली में भी सवजीभाई की तरह भ्रष्टाचार विरोधी और विकासवादी सोच दिखाई देती है।

सवजीभाई कोराट ने सेवा, निष्ठा, निडरता और जनसेवा का जो आदर्श स्थापित किया, उसी पर चलने की उम्मीद प्रशांत कोराट से भी की जाती है। वे अपने पिता के सपनों को आगे बढ़ाते हुए सौराष्ट्र और गुजरात के विकास में योगदान दे रहे हैं। उनके कार्यों में पिता की प्रेरणा साफ दिखाई देती है।

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आज जब गुजरात को युवा नेतृत्व के रूप में Harsh Sanghavi जैसे नेता मिले हैं, वहीं भाजपा संगठन को प्रशांत कोराट जैसे सक्रिय महामंत्री मिले हैं, जिनकी कार्यशैली से गुजरात के युवाओं को प्रेरणा मिल रही है। सवजीभाई कोराट का जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची सेवा ही सच्ची राजनीति है। प्रशांत कोराट जैसे युवा, जो अपने पिता के आदर्शों से प्रेरित होकर समाजसेवा को जीवन का उद्देश्य बना रहे हैं, वे गुजरात की पहचान और गौरव का जीवंत उदाहरण हैं।

(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

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