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6.77 लाख करोड़ का गोल्ड इम्पोर्ट: पीएम मोदी ने सोना न खरीदने की अपील क्यों की
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (West Asia conflict) के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में मची उथल-पुथल के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए नागरिकों से एक बड़ी अपील की है। तेलंगाना में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भारतीयों से कम से कम एक साल के लिए सोने की खरीद और विदेश यात्रा को टालने का आग्रह किया है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरक (Fertilizer) की बढ़ती कीमतों के कारण भारत को अपनी विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) का संरक्षण करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, हमें किसी भी तरह से विदेशी मुद्रा बचानी होगी।
किसी भी तरह से विदेशी मुद्रा बचानी होगी।
पीएम मोदी ने नागरिकों से कोविड-19 के दौरान अपनाई गई आदतों को फिर से लागू करने का सुझाव दिया, जिसमें शामिल हैं:
वर्क-फ्रॉम-होम (WFH): ईंधन की खपत कम करने के लिए घर से काम करना।
वर्चुअल मीटिंग: यात्रा के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें करना।
सार्वजनिक परिवहन: पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए मेट्रो रेल का उपयोग और कारपूलिंग अपनाना।

इलेक्ट्रिक वाहन: निजी वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देना।
भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बुलियन मार्केट है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत का सोने का आयात बिल अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है:
वर्ष 2025-26: सोने का आयात 24% बढ़कर $71.98 बिलियन (₹6.77 लाख करोड़) हो गया।
तुलना: 2024-25 में यह $58 बिलियन और 2023-24 में $45.54 बिलियन था।
रोचक तथ्य: भले ही आयात का मूल्य बढ़ा है, लेकिन वैश्विक कीमतों में उछाल के कारण आयात की गई मात्रा 757.09 टन से घटकर 721.03 टन रह गई है।
भारत अपनी सोने की जरूरतों का 85% हिस्सा आयात करता है, जिससे भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में लगभग 35,000 टन सोना बेकार पड़ा है। यदि घरेलू स्तर पर एक टन सोना भी रिसाइकिल किया जाता है, तो देश के लगभग ₹893 करोड़ बच सकते हैं।

पश्चिम एशिया के संकट ने कच्चे तेल की कीमतों को भी प्रभावित किया है। भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है।
कंपनियों पर बोझ: सरकारी तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) पेट्रोल, डीजल और LPG की बिक्री पर रोजाना 1,600 करोड़ से 1,700 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। पिछले 10 हफ्तों में यह घाटा ₹1 लाख करोड़ को पार कर गया है।
राजस्व में कमी: सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है (पेट्रोल पर ₹13 से घटाकर ₹3 और डीजल पर शून्य), जिससे सरकारी खजाने को हर महीने ₹14,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
कुल खर्च: मार्च 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष में भारत ने पेट्रोलियम उत्पादों पर $174.9 बिलियन (₹16.44 लाख करोड़) खर्च किए।
प्रधानमंत्री ने केवल सोना और तेल ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में भी बदलाव लाने को कहा:
खाद्य तेल: खाद्य तेल की खपत में कमी लाने की सलाह।
प्राकृतिक खेती: रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना।
स्वदेशी: विदेशी उत्पादों के बजाय 'स्वदेशी' उत्पादों को प्राथमिकता देना।
विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति:
ईरान संघर्ष और रुपये पर दबाव के कारण भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1 मई तक गिरकर $690.7 बिलियन रह गया है, जो इस साल फरवरी में अपने उच्चतम स्तर ($728.494 बिलियन) पर था। मौजूदा भंडार करीब 10 से 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

