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नीट पेपर लीक: 720 में से 600 अंकों के सवाल एक ‘गेस पेपर’ से मिले!
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। राजस्थान पुलिस की SOG की जांच में संकेत मिले हैं कि परीक्षा से दो दिन पहले ही सीकर में छात्रों तक एक “गेस पेपर” पहुंच चुका था, और उसमें से लगभग 720 में से 600 अंकों के सवाल सीधे पूछे गए थे। इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां केरल तक जुड़ी होने की आशंका है। इन खुलासों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी है और दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की है।
घोटाला कैसे हुआ?
3 मई को आयोजित NEET परीक्षा में गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद NTA ने जांच सौंपी। SOG की जांच में पता चला कि परीक्षा से पहले एक 'गेस पेपर' या 'क्वेश्चन बैंक' छात्रों के बीच तेजी से वायरल हो गया था। हैरानी की बात यह रही कि NEET परीक्षा में पूछे गए सवालों के उत्तरों का क्रम भी कथित तौर पर उसी गेस पेपर से मेल खाता था।
SOG अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) का बयान
मीडिया से बात करते हुए ADG विशाल बंसल ने बताया कि जांचकर्ताओं को लगभग 410 सवालों वाला एक गेस पेपर मिला। इनमें से करीब 120 सवाल जिनमें केमिस्ट्री के प्रश्न भी शामिल थे। कथित तौर पर असली परीक्षा में पूछे गए। चूंकि NEET के हर सवाल के 4 अंक होते हैं, इसलिए यह लगभग 600 अंकों के सवालों के मेल खाने का मामला बनता है। बताया गया कि यह पेपर परीक्षा से 15 दिन से लेकर एक महीने पहले तक प्रसारित हो रहा था। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि इसमें आपराधिक गतिविधि या धोखाधड़ी शामिल थी या नहीं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कथित “गेस पेपर” शुरुआत में ₹5 लाख में बेचा गया था। लेकिन परीक्षा से एक रात पहले इसकी कीमत घटकर ₹30,000 रह गई। SOG द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन में “Forwarded many times” वाले संदेश मिले, जिससे संकेत मिलता है कि यह पेपर हजारों लोगों तक फैल चुका था।

जांचकर्ताओं ने पाया कि यह क्वेश्चन बैंक राजस्थान के चूरू के एक युवक से जुड़ा है, जो वर्तमान में केरल के एक मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई कर रहा है। उसने कथित तौर पर 1 मई को ये सवाल सीकर में अपने एक दोस्त को भेजे थे।
इसके बाद यह दस्तावेज़ एक PG (पेइंग गेस्ट) ऑपरेटर तक पहुंचा, जहां से यह करियर काउंसलरों और अन्य छात्रों में फैल गया।
सीकर के एक PG ऑपरेटर की भी जांच की जा रही है। इस ऑपरेटर ने उद्योग नगर पुलिस स्टेशन और NTA में शिकायत दर्ज कराई थी कि छात्रों को एक संदिग्ध पेपर मिला है। लेकिन जांच में सामने आया कि उसने खुद पहले यह पेपर प्राप्त किया था और आगे भी भेजा था। एजेंसियों को शक है कि गिरफ्तारी के डर से उसने खुद को बचाने के लिए शिकायत दर्ज कराई हो सकती है।
पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए SOG फिलहाल सोशल मीडिया चैट्स, कॉल डिटेल्स और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स की गहन जांच कर रही है।

