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PM मोदी की अपील का असर: IT कर्मचारियों के संगठन ने की अनिवार्य 'वर्क फ्रॉम होम' की मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में अनावश्यक यात्रा कम करने और संसाधनों के संरक्षण के आह्वान के बाद, अब आईटी (IT) क्षेत्र में फिर से 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) लागू करने की मांग तेज हो गई है। आईटी कर्मचारियों के प्रमुख संगठन नेसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (NITES) ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर आईटी और आईटी-सक्षम सेवा (IT/ITES) क्षेत्र के लिए इस संबंध में एक सरकारी एडवाइजरी जारी करने का आग्रह किया है।
11 मई को श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को भेजे गए पत्र में, NITES ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस हालिया अपील के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच नागरिकों और संस्थानों से वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग और अनावश्यक यात्रा कम करने जैसे उपाय अपनाने को कहा था।

संगठन ने पत्र में जोर देकर कहा प्रधानमंत्री का बयान केवल एक परिचालन सुझाव नहीं था। यह एक संवेदनशील अवधि के दौरान सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान था, जहाँ ईंधन की निर्भरता कम करना, यातायात का बोझ घटाना और अनावश्यक खपत को नियंत्रित करना राष्ट्रीय हित में योगदान देने का हिस्सा बन जाता है।
NITES ने तर्क दिया कि आईटी/आईटीईएस उद्योग बड़े पैमाने पर रिमोट वर्किंग (दूरस्थ कार्य) को लागू करने के लिए पूरी तरह सक्षम है, और इससे उत्पादकता पर कोई असर नहीं पड़ता। संगठन ने महामारी के दौरान के प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा भारतीय आईटी कंपनियों ने पहले ही सिद्ध कर दिया है कि रिमोट वर्किंग मॉडल व्यावहारिक, तकनीकी रूप से संभव और परिचालन की दृष्टि से टिकाऊ है।
महामारी के दौरान लगभग पूरा भारतीय आईटी उद्योग बहुत कम समय में वर्क फ्रॉम होम पर स्थानांतरित हो गया था। वैश्विक संकट के बावजूद, इस क्षेत्र ने न केवल संचालन जारी रखा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स भी पूरे किए और भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कर्मचारियों की सेहत और ईंधन की बचत
यूनियन का दावा है कि डिजिटल विकल्प मौजूद होने के बावजूद लाखों कर्मचारियों को रोजाना ऑफिस आने के लिए मजबूर करना ईंधन की खपत, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की भलाई पर अनावश्यक दबाव डाल रहा है।
यात्रा का समय: महानगरों में कर्मचारी रोजाना यात्रा में कई घंटे बिताते हैं, जबकि वे वही काम घर से अधिक प्रभावी ढंग से कर सकते हैं।
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य: लंबी यात्रा का सीधा असर कर्मचारियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।

पर्यावरणीय प्रभाव: अनावश्यक वाहनों के चलने से पर्यावरण पर भी बोझ बढ़ता है।
यूनियन ने श्रम मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वे आईटी/आईटीईएस फर्मों और डिजिटल रूप से सेवा प्रदान करने वाले क्षेत्रों के लिए एक एडवाइजरी जारी करें। इसमें निर्देश दिया जाए कि जहां भी परिचालन रूप से संभव हो, वहां एक उचित अवधि के लिए अनिवार्य 'वर्क फ्रॉम होम' लागू किया जाए।
NITES के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने स्पष्ट किया कि यह अनुरोध नियोक्ताओं (Employers) के साथ टकराव के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए है। उन्होंने कहा कि जिस रिमोट वर्किंग क्षमता का उपयोग महामारी में हुआ था, उसका उपयोग अब राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और सार्वजनिक हित के समर्थन में किया जाना चाहिए।

