- Hindi News
- राष्ट्रीय
- ये हैं सभी बॉडीबिल्डर्स के 'दादा', जिन्होंने 90 साल की उम्र में अपनी 19वीं चैंपियनशिप जीती
ये हैं सभी बॉडीबिल्डर्स के 'दादा', जिन्होंने 90 साल की उम्र में अपनी 19वीं चैंपियनशिप जीती
ये किसने लिखा, ये तो पता नहीं, लेकिन सोशल मीडिया पर एक कहावत बहुत पॉपुलर हो गई है, 'चमक वही, दमखम वही। घरघट वही है। तलवार पुरानी है, मोगर काट वही है।' अगर आप जापान के तोशिसुके कनाज़ावा को देखेंगे, तो समझ जाएंगे कि उन्हें बताने के लिए इस कहावत की ज़रूरत क्यों पड़ी। जिम में सबसे भारी वज़न उठाने वाले इस आदमी की उम्र 90 साल है। लेकिन उनके मज़बूत हाथ और सीने को देखकर कोई उन्हें 'बूढ़ा' या 'बुज़ुर्ग' कहने की हिम्मत नहीं करेगा।
ये उम्र का ऐसा आंकड़ा है, जिस तक पहुंचते-पहुंचते इंसान की 'जीतने की ताकत' भी कमज़ोर हो जाती है। 80 परसेंट से ज़्यादा लोगों की तो मौत भी हो जाती है। लेकिन इसी उम्र में कनाज़ावा ने अपनी बॉडी ऐसी बना ली है कि उनके सामने ताकतवर से ताकतवर नौजवान भी छोटा लगता है।
90 की उम्र में कनाज़ावा ने 19वीं बार ऑल जापान फिटनेस चैंपियनशिप जीतकर दुनिया को साबित कर दिया है कि यह तलवार भले ही पुरानी हो गई हो, लेकिन इस पर जंग आज भी वैसी ही है जैसी 60-70 साल पहले थी, यानी जब वे जवान थे।
बॉडीबिल्डिंग का यह सफर तभी से शुरू होता है। जवानी में कनाज़ावा को बॉडीबिल्डिंग का बहुत शौक था। वे खूब कसरत करते थे, अपनी बॉडी को इतना बनाते थे कि मानो किसी मूर्तिकार ने पत्थर से मूर्ति बना दी हो। यह शौक एक प्रोफेशन बन गया। वे कड़े बॉडीबिल्डिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने लगे। लेकिन उनकी ज़िंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जब उन्हें इन सब में दिलचस्पी नहीं रही।
34 साल की उम्र में कनाज़ावा ने बॉडीबिल्डिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेना बंद कर दिया। लेकिन 'आसमान से चाँद निकलकर कहाँ जाएगा?' बॉडीबिल्डिंग ही उनका आसमान था, जहाँ वे अपने जुनून के पंखों पर आज़ादी से उड़ते थे। इसमें समय लगा, लेकिन सब ठीक हो गया। 50 साल की उम्र में, कनाज़ावा मैदान में लौटे। उन्हें प्रेरणा अपनी पत्नी से मिली, जो उस समय अक्सर बीमार रहती थीं। लेकिन जब वह अपने पति को बॉडीबिल्डिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेते देखतीं, तो वह इतनी खुश होतीं कि उनके चेहरे की मुस्कान कनाज़ावा के दिल में चांदनी की तरह फैल जाती।
फिर कनाज़ावा ने तय किया, वह अपनी पत्नी के लिए मैदान में लौटेंगे। वह लौटे, और ऐसा किया कि दुनिया उन्हें याद रखे।
लेकिन किस्मत भी बेरहम होती है। आखिरकार, किस्मत ने कनाज़ावा की बीमार पत्नी को छीन लिया। वह गुज़र गईं, लेकिन कनाज़ावा समझ गए थे कि जब तक किसी की याद ज़िंदा रहती है, वह इंसान कभी नहीं मरता। इसलिए, वह अपनी पत्नी की याद के साथ स्टेज पर जाते रहे।
मीडिया सोर्स से बात करते हुए, कनाज़ावा कहते हैं कि जब कॉम्पिटिशन में उनका नाम अनाउंस होता है, तो वह अक्सर सोचते हैं कि क्या उनकी पत्नी उन्हें स्वर्ग से देख रही हैं। वह कहते हैं कि यही उन्हें हिम्मत और ताकत देता है। यही वजह है कि कॉम्पिटिशन जीतना अब उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं रही। कनाज़ावा अब 90 साल के हैं, लेकिन उनकी जीत का सिलसिला जारी है। हाल ही में, उन्होंने 85+ कैटेगरी में ऑल जापान मास्टर्स फिटनेस चैंपियनशिप जीती। इस जीत से उनके नेशनल टाइटल की संख्या 19 हो गई है।
कनाज़ावा जापान के हिरोशिमा के रहने वाले हैं, जहाँ इंसानों के बनाए एटम बम के असर से इंसानियत की तबाही की पहली झलक पहली बार दिखी थी। उसी शहर में रहने वाले कनाज़ावा 130 साल तक जीने की ख्वाहिश रखते हैं और पक्का वादा करते हैं कि वे दुनिया के लंबी उम्र के सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगे।
बरगद के पेड़ जितना मज़बूत उनका शरीर उम्र के आगे हार मानने को तैयार नहीं है। उनके चेहरे पर झुर्रियाँ समय के निशान हैं, लेकिन उनके कंधे पहाड़ की चट्टानों जैसे दिखते हैं। उम्र की तपिश अभी भी उनके हाथों की मसल्स का तनाव कम नहीं कर पाई है।
सवाल उठता है कि कनाज़ावा ने यह सब कैसे किया? बड़ा सवाल यह है कि उन्होंने ऐसा क्या खाया कि यह सब हो गया?
उनकी फिटनेस सिर्फ़ जिम में पसीना बहाकर नहीं पाई जा सकती। डाइट का इसमें अहम रोल होता है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक, बॉडीबिल्डिंग में वापसी के बाद, कनाज़ावा शाकाहारी और प्रोटीन से भरपूर डाइट लेते हैं। उनका नाश्ता एक आम जापानी बुज़ुर्ग व्यक्ति के नाश्ते से बहुत अलग होता है। इसमें ब्राउन राइस, मिसो सूप और नट्टो होता है। नट्टो एक प्रोटीन से भरपूर जापानी खाना है जो फ़र्मेंटेड सोयाबीन से बनता है। वह अनाज, शाकाहारी फ़्यूरीकेक और प्रोटीन शेक भी खाते हैं।
अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर को अपना आइडल मानने वाले कनाज़ावा कम में संतुष्ट होने वालों में से नहीं हैं। अब 90 साल के हो चुके कनाज़ावा का लक्ष्य 60 किलोग्राम कैटेगरी में पहलवानों को हराना है। उनका कहना है कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, और वह इसे करके दिखाएंगे। हालांकि, अगर रिकॉर्ड तोड़ने वाले कनाज़ावा यह कर भी लेते हैं तो किसी को हैरानी नहीं होगी।
कनाज़ावा का मानना है कि उम्र तो बढ़ेगी ही, लेकिन वह इसे लेकर परेशान नहीं हैं। उनका ध्यान इस बात पर है कि डाइट और एक्सरसाइज़ के ज़रिए इसे कैसे धीमा किया जाए। इसीलिए, 90 साल की उम्र में भी उनका सफ़र अभी खत्म नहीं हुआ है।

