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आवेदन में 14 खामियां, फीस भी ₹220 कम... सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की याचिका क्यों नहीं हुई लिस्ट?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला और इसके बाद SIR के खिलाफ याचिका दायर की। इस मार्च को लेकर दिनभर काफी हलचल रही। मंडी हाउस से सुप्रीम कोर्ट तक के रास्ते पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस दौरान SIR के विरोध में नारेबाजी के बीच राहुल गांधी की कानूनी टीम याचिका दाखिल करने सुप्रीम कोर्ट पहुंची। हालांकि, देर शाम पता चला कि INDIA गठबंधन की याचिका सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं हो सकी। याचिका में 14 खामियां भी पाई गईं।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची INDIA गठबंधन की याचिका अभी तक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया में 14 खामियां निकाली हैं। इनमें विपक्ष के कुछ नेताओं के वकालतनामे पर हस्ताक्षर नहीं होना, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट कॉपी नहीं होना और कोर्ट फीस कम जमा करना जैसी आपत्तियां शामिल हैं।
रजिस्ट्री ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल इस रिट याचिका में चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत रूप से प्रतिवादी बनाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। उसने स्पष्टीकरण मांगा है कि इस तरह की याचिका में चुनाव आयुक्तों को व्यक्तिगत रूप से प्रतिवादी क्यों बनाया गया है।
वकालतनामे में भी मिलीं खामियां
रजिस्ट्री की आपत्तियों में एक प्रमुख मुद्दा वकालतनामे से जुड़ा है। याचिका में याचिकाकर्ता संख्या 3 से 11 तक के वकालतनामे उपलब्ध नहीं हैं और उन पर संबंधित नेताओं के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। इन नेताओं में अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और डी. राजा शामिल हैं।
इन नेताओं के हस्ताक्षर नहीं हैं:
1. सौगत रॉय
2. अखिलेश यादव
3. तेजस्वी यादव
4. संजय राउत
5. एम.ए. बेबी
6. डी. राजा
7. महुआ माजी
8. सुप्रिया सुले
9. ई.टी. मोहम्मद बशीर
वकालतनामा एक ऐसा कानूनी दस्तावेज है, जिसके जरिए याचिकाकर्ता अपने वकील को अदालत में अपनी ओर से केस दाखिल करने और पैरवी करने का अधिकार देता है।
खड़गे के पहचान पत्र और कोर्ट फीस पर भी आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट और पढ़ने योग्य कॉपी भी मांगी है। इसके अलावा, याचिका दाखिल करने के लिए जमा की गई कोर्ट फीस में ₹220 की कमी पाई गई है।
रजिस्ट्री ने याचिका के समर्थन में पेश किए गए दस्तावेजों की प्रतियां स्पष्ट नहीं होने पर भी आपत्ति जताई है। उसने चुनाव आयोग के 24 जून, 2025 के फैसले और SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने से जुड़े अन्य दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी पेन ड्राइव में उपलब्ध कराने को कहा है।
इन खामियों के कारण INDIA गठबंधन की याचिका अभी तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी है। रजिस्ट्री ने याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया में कुल 14 आपत्तियां दर्ज की हैं। INDIA गठबंधन ने अदालत से SIR को लेकर चुनाव आयोग के फैसलों का पूरा रिकॉर्ड पेश करने की मांग की है। इसमें 24 जून, 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से संबंधित फाइलें, बैठकों के एजेंडे, कार्यवाही का विवरण और चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियां भी शामिल हैं।

