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इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी, यह अच्छा संकेत...सुख-समृद्धि बढ़ेगी, बारिश भी अच्छी होगी, किसानों को फायदा होगा
11 अक्टूबर, रविवार से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व 19 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी मां को फूल, नारियल, चुनरी और मिठाइयां चढ़ाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा को अलग-अलग चीजों का भोग लगाने की परंपरा है। इन नौ दिनों में पूजा-पाठ के साथ
खानपान, व्यवहार और दैनिक जीवन में भी कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
चूंकि इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है। धार्मिक मान्यता है कि सप्ताह के जिस दिन नवरात्रि शुरू होती है, उसी के आधार पर देवी मां के आगमन का वाहन तय किया जाता है। इस साल मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आएंगी। हाथी पर देवी मां के आगमन को शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है और अच्छी बारिश के संकेत मिलते हैं।
सप्ताह के दिन से तय होता है देवी मां का वाहन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन के वार के आधार पर देवी मां के वाहन और उनसे जुड़े फल की व्याख्या की जाती है। रविवार या सोमवार को नवरात्रि शुरू होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनिवार या मंगलवार को नवरात्रि शुरू होने पर उनका वाहन घोड़ा माना जाता है। गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्रि की शुरुआत होने पर देवी मां डोली में आती हैं, जबकि बुधवार को नवरात्रि शुरू होने पर उनका वाहन नाव होता है।
माता की सवारी से घटनाओं के संकेत मिलते हैं
इन मान्यताओं में देवी मां के अलग-अलग वाहनों से अलग-अलग फल जुड़े बताए गए हैं। हाथी पर आगमन को सुख-समृद्धि और अधिक वर्षा का संकेत माना जाता है। घोड़े पर आगमन को प्राकृतिक आपदाओं और पड़ोसी देशों से युद्ध की आशंका से जोड़ा जाता है। नाव पर आगमन को भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने का संकेत माना गया है, जबकि डोली पर आगमन को महामारी के भय से जोड़ा जाता है। ये धार्मिक मान्यताएं हैं।
आइए जानते हैं….घर पर किस तरह करें मां दुर्गा की पूजा
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने के लिए बहुत अधिक सामग्री की जरूरत नहीं है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल पर मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं। देवी मां को फूल और नारियल अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
पूजा के दौरान 'दुं दुर्गायै नम:' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप कर सकते हैं। इसके अलावा दुर्गा चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। हर दिन देवी मां को निर्धारित भोग अर्पित करें। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में बांटें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और मन की शुद्धता है।
नौ दिनों में किस दिन क्या भोग लगाएं
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा को अलग-अलग चीजों का भोग लगाने की परंपरा है। दिन के अनुसार भोग इस प्रकार है:
प्रतिपदा: पहले दिन मां दुर्गा को गाय के दूध से बना घी चढ़ाएं। चाहें तो घी से बनी मिठाई का भोग भी लगा सकते हैं। दूसरे दिन देवी मां को मिश्री अर्पित करें। तीसरे दिन दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं। चौथे दिन मां दुर्गा को मालपुए का भोग चढ़ाएं। पांचवें दिन केले अर्पित करें। छठे दिन देवी मां को मधु यानी शहद का भोग लगाएं। सातवें दिन गुड़ या गुड़ से बने पकवान अर्पित कर सकते हैं। आठवें दिन मां दुर्गा को नारियल चढ़ाएं। नौवें दिन धान का लावा अर्पित करें। इसे कई जगहों पर खील भी कहा जाता है। यह धान से बना फूला हुआ अनाज होता है।
नवरात्रि में इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा और मंदिरों में दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। इन दिनों में अपने व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। झूठ बोलने, गुस्सा करने और घर में विवाद करने से बचें। महिलाओं का अपमान न करें और सभी स्त्रियों का सम्मान करें। अपने गुरु और उनके उपदेशों का अनादर करने से बचें। परिवार के सदस्यों और साथियों के साथ अच्छा व्यवहार करें। देवी मां की पूजा करने वाले भक्तों को इन नौ दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करने की सलाह दी जाती है। माता-पिता की सेवा करना भी महत्वपूर्ण माना गया है। मां दुर्गा की आराधना के साथ श्रीरामचरितमानस का पाठ भी किया जा सकता है।
देवी मां को चढ़ाएं नारियल, चुनरी और लाल फूल
नवरात्रि में देवी मां के शक्तिपीठों और धार्मिक महत्व वाले मंदिरों में दर्शन करने की परंपरा है। मंदिर में पूजा के दौरान मां दुर्गा को नारियल, लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, लाल फूल, कुमकुम और अन्य सुहाग की सामग्री अर्पित की जा सकती है। इस दौरान देवी मां के मंत्रों का जाप करें। यदि पूजा की सभी सामग्री उपलब्ध न हो, तो भी श्रद्धापूर्वक देवी मां के दर्शन और मंत्र जाप किए जा सकते हैं। मंत्र याद न होने पर देवी मां के अलग-अलग नामों का जाप भी कर सकते हैं। नवरात्रि में पूजा का उद्देश्य श्रद्धा के साथ देवी मां की आराधना करना और अपने व्यवहार में अच्छे गुणों को अपनाना है।

