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पुलिस सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल ले गई, अभिजीत दीपक ने भूख हड़ताल शुरू की
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस अस्पताल ले गई है। सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है। अस्पताल के बाहर भारी पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात हैं। इस बीच, पुलिस द्वारा वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर विरोध स्थल से हटाया जा रहा है। NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक के संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं।
https://twitter.com/me_ganesh14/status/2078319305221976332
पत्नी गीतांजलि अंगमो का बयान
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने कहा, 'मैं दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हूँ, जहाँ सोनम वांगचुक को भर्ती कराया गया है। मेरी, उनके परिवार की और पिछले 20 दिनों से उनके स्वास्थ्य पर नज़र रख रहे डॉक्टरों की सहमति के बिना उन्हें मौखिक रूप से (मुँह से) या नस के ज़रिए (IV) कुछ भी नहीं दिया जाना चाहिए।'
डॉक्टरों की टीम ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर अपडेट जारी किया है। डॉक्टरों के मुताबिक, फिलहाल उनके स्वास्थ्य के सभी महत्वपूर्ण पैरामीटर (Vitals) सामान्य हैं। हालाँकि, जाँच में यह भी सामने आया है कि उनका ब्लड प्रेशर सामान्य से कम है और ब्लड शुगर भी सामान्य से कम है। इसके साथ ही उनकी ईसीजी (ECG) रिपोर्ट नॉर्मल आई है।
https://twitter.com/ANI/status/2078307600865624446
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी और मैनपुरी की सांसद डिंपल यादव ने कहा है कि सोनम वांगचुक को जबरन हटाने की कार्रवाई सिर्फ एक कार्रवाई नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को दबाने का कृत्य है। शिवसेना UBT के आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि दुनिया देख रही है कि कैसे भारत में लोकतंत्र को बेशर्मी और जबरदस्ती से कुचला जा रहा है। अब एक अयोग्य मंत्री के खिलाफ छात्रों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन भी बर्दाश्त नहीं किया जा रहा है।
सफदरजंग अस्पताल और दिल्ली पुलिस का पक्ष
सोनम वांगचुक को लेकर सफदरजंग अस्पताल का बयान सामने आया है। अस्पताल ने जानकारी दी है कि सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य की जाँच कर रही है। सोनम वांगचुक को इमरजेंसी में भर्ती किया गया है। कहा जा रहा है कि वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत स्थिर है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि अदालत के आदेश और चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते हुए उन्हें आवश्यक चिकित्सा देखभाल के लिए अस्पताल ले जाया गया है।
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आपको बता दें कि सोनम वांगचुक की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि सरकारी डॉक्टरों द्वारा उनकी नियमित जाँच की जाए और डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएं, क्योंकि हर किसी का जीवन कीमती है।

अभिजीत दीपक के गंभीर आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपक ने कहा, "सुबह 7 बजे जब मैं फ्रेश होने के लिए बाहर निकला, तो पुलिस के गुंडे वहाँ आ गए। वे सोनम सर को गालियाँ देते हुए घसीटकर ले गए। एक 60 वर्षीय व्यक्ति, जो 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे, उन्हें दिल्ली पुलिस जबरन खींचकर ले गई। हमें नहीं पता कि वे उन्हें कहाँ ले गए हैं। जैसे ही मुझे खबर मिली और मैं जंतर-मंतर जा रहा था, तो पुलिस ने मेरे साथ भी मारपीट की... ये पुलिस कर्मचारी नहीं हैं; ये आरएसएस (RSS) के गुंडे हैं। मैं विदेश से अपने देश वापस लौटा था; क्या मैं अपराधी हूँ? इन लोगों ने मुझे सड़कों पर पीटा..."
स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टरों की चेतावनी
इससे पहले डॉक्टरों ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चेतावनी दी थी कि अगर उनकी स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो उनके अंग (Organs) फेल हो सकते हैं। इस बीच, अपनी लगातार बिगड़ती सेहत के बावजूद वांगचुक ने शुक्रवार रात एक वीडियो संदेश जारी कर बताया था कि उनके शरीर का वजन लगभग 20 प्रतिशत कम हो गया है। शरीर की मांसपेशियां भी प्रभावित हुई हैं, लेकिन उनका हौसला और मानसिक स्थिति अभी भी मजबूत है। 13 जुलाई को आरएमएल (RML) अस्पताल के डॉक्टरों ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को अस्पताल में शिफ्ट करने की सलाह दी थी।

'चलो संसद' मार्च की अपील और मुख्य मांगें
वहीं, वीडियो संदेश में वांगचुक ने देशवासियों से 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि अगर देश में प्याज की कीमतों के लिए सरकारों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, तो करोड़ों छात्रों के भविष्य और शिक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के लिए भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया था कि NEET विवाद के बाद कई छात्रों ने आत्महत्या की है और सरकार को इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए।
सोनम वांगचुक और आंदोलन से जुड़े संगठनों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं ने देश के लाखों छात्रों का भरोसा तोड़ा है, इसलिए राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज की निष्पक्ष जाँच, पेपर लीक मामले की पारदर्शी जाँच और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की भी माँग की थी।

