क्या E20 पेट्रोल से पेट्रोल पंप मालिकों को भी नुकसान? मानसून और तटीय इलाकों में बढ़ी चिंता

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अब तक E20 यानी 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सबसे अधिक चर्चा वाहन के माइलेज पर उसके प्रभाव को लेकर हो रही थी। लेकिन अब पेट्रोल पंप संचालकों ने भी एक नई समस्या की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि एथेनॉल की हाइग्रोस्कोपिक (Hygroscopic) प्रकृति के कारण मानसून के दौरान और समुद्र तटीय क्षेत्रों में पेट्रोल में पानी मिलने का खतरा बढ़ सकता है। इससे न केवल पेट्रोल पंपों को नुकसान हो सकता है बल्कि वाहनों के इंजन पर भी असर पड़ सकता है। द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में पेट्रोल पंप डीलरों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है।

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समस्या क्या है?

पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि E20 पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल हवा में मौजूद नमी (Moisture) को अपनी ओर आकर्षित करता है। पहले शुद्ध पेट्रोल इस्तेमाल होता था, जो नमी को आकर्षित नहीं करता था। इसलिए भूमिगत टैंकों में पानी जमा होने की समस्या अपेक्षाकृत कम थी।

लेकिन अब E20 पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल की हाइग्रोस्कोपिक प्रकृति के कारण यदि भूमिगत टैंक या वेंट सिस्टम के जरिए नमी अंदर पहुंचती है, तो एथेनॉल उस पानी को अपने साथ मिला लेता है। यदि पानी की मात्रा अधिक हो जाए तो फेज सेपरेशन (Phase Separation) हो सकता है, यानी पेट्रोल और एथेनॉल अलग-अलग परतों में बंट सकते हैं। ऐसी स्थिति में वाहन में पानी मिला ईंधन जाने का खतरा रहता है।

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मानसून और तटीय क्षेत्रों में खतरा अधिक क्यों?

मानसून के दौरान हवा में आर्द्रता (Relative Humidity) अक्सर 90 प्रतिशत या उससे अधिक होती है। मौसम विभाग भी अपने बुलेटिन में RH यानी Relative Humidity का आंकड़ा जारी करता है।

सूरत, मुंबई, चेन्नई जैसे समुद्र तटीय शहरों में मानसून के अलावा भी सालभर नमी का स्तर अधिक रहता है। इसलिए इन क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों में यह समस्या पूरे वर्ष बनी रहने की आशंका जताई जा रही है।

वाहनों पर क्या असर पड़ सकता है?

 इंजन स्टार्ट होने में दिक्कत
 इंजन मिसफायर या झटके
 माइलेज में कमी
 फ्यूल पंप और इंजेक्टर को नुकसान
 लंबे समय में जंग (Corrosion) लगने की संभावना

पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता

डीलरों का कहना है कि देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों की भूमिगत स्टोरेज टंकियां पुराने प्रकार के पेट्रोल के लिए डिजाइन की गई थीं। E20 जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए आवश्यक नमी नियंत्रण और आधुनिक स्टोरेज व्यवस्था हर जगह उपलब्ध नहीं है। इसलिए विशेष रूप से मानसून में जोखिम बढ़ सकता है।

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पहले नमी से बचाव कैसे किया जाता था?

पेट्रोल की भूमिगत टंकियां स्टील की बनी होती हैं। पहले भी मानसून या तटीय इलाकों में थोड़ी बहुत नमी या पानी जमा होने की समस्या रहती थी, लेकिन तेल कंपनियां नियमित जांच, पानी निकालने और जंग रोकने की व्यवस्था करती थीं।

हालांकि अब एथेनॉल की नमी आकर्षित करने वाली प्रकृति के कारण पानी की मात्रा पहले की तुलना में अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे टैंकों में जंग लगने का जोखिम भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विषय पर और अध्ययन तथा बेहतर तकनीकी समाधान की आवश्यकता है।

वाहन चालकों के लिए सलाह

 हमेशा विश्वसनीय और अधिक बिक्री वाले पेट्रोल पंप से ही ईंधन भरवाएं।
 यदि इंजन स्टार्ट होने में दिक्कत, झटके या माइलेज में अचानक कमी महसूस हो तो तुरंत जांच करवाएं।
 वाहन निर्माता द्वारा E20 ईंधन के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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