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सूरत के डायमंड किंग धीरू रामाणी माली में लापता, 100 करोड़ रुपये की फिरौती मांगे जाने का दावा
सूरत के प्रसिद्ध डायमंड किंग धीरू रामाणी (उम्र 75 वर्ष) के माली देश में रहस्यमय तरीके से लापता हो जाने से हीरा उद्योग में हलचल मच गई है। परिवार को आशंका है कि किसी कट्टरपंथी संगठन ने उनका अपहरण कर लिया है। धीरू रामाणी के साथ दो अन्य भारतीय नागरिक भी लापता हैं, जिनमें उनका एक रसोइया और एक इलेक्ट्रीशियन शामिल हैं। इस घटना के सामने आते ही विदेशों में व्यापार करने वाले सूरत के उद्योगपतियों में भारी चिंता का माहौल देखा जा रहा है।
धीरू रामाणी और अन्य दो भारतीयों के लापता होने के पीछे सामान्य अपराधियों का नहीं, बल्कि किसी बड़े कट्टरपंथी संगठन का हाथ होने की प्रबल आशंका परिवार के सूत्र व्यक्त कर रहे हैं। अपहरणकर्ता भी बेहद शातिर बताए जा रहे हैं। परिजनों के अनुसार, परिवार ने यह पुष्टि मांगी थी कि व्यापारी सुरक्षित हैं या नहीं। इसके बाद उन कट्टरपंथियों ने धीरू रामाणी और उनके परिवार के बीच वीडियो कॉल कराई। इस वीडियो कॉल के दौरान परिवार ने देखा कि तीनों भारतीय जीवित और सुरक्षित हैं। यह प्रमाण मिलने के बाद अमेरिका में रह रहे परिवार ने कट्टरपंथी संगठन के साथ बातचीत (नेगोशिएशन) की प्रक्रिया तेज कर दी है, ताकि जल्द से जल्द धनराशि का लेन-देन कर तीनों को मुक्त कराया जा सके।
धीरू रामाणी का परिवार पारंपरिक रूप से वर्षों से सूरत और वैश्विक स्तर पर हीरे के व्यापार से जुड़ा हुआ है। हालांकि, कुछ वर्ष पहले धीरू रामाणी ने अफ्रीका के माली देश में सोने की खनन परियोजना में बड़ा निवेश किया था। वे पिछले दो वर्षों से माली में ही रहकर इस पूरे माइनिंग प्रोजेक्ट का संचालन और कामकाज स्वयं संभाल रहे थे। इसी दौरान वे किसी अज्ञात स्थान से लापता हो गए। वे ठीक किस स्थान से लापता हुए, इसकी जानकारी अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है।
सूरत में रहने वाले परिवार के एक करीबी सदस्य ने बताया है कि अल-कायदा से जुड़े एक स्थानीय कट्टरपंथी आतंकी समूह ने तीनों भारतीयों की रिहाई के बदले 100 करोड़ रुपये की भारी फिरौती की मांग की है। हीरा बाजार के सूत्रों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम की मांग के बाद परिवार भारी दबाव में है। हालांकि, आधिकारिक तंत्र द्वारा इस मामले की जांच अभी जारी है।
इस पूरे मामले में धीरू रामाणी के एक करीबी रिश्तेदार ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि हमारे पास फिरौती की रकम को लेकर बातचीत करने और पीड़ितों को सुरक्षित वापस लाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। हम अपने स्तर पर पूरी स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं और इसमें किसी सरकारी तंत्र या विदेश मंत्रालय को शामिल नहीं किया है। धीरूभाई रामाणी का परिवार फिलहाल अमेरिका में बस चुका है और वहीं से इस कट्टरपंथी संगठन के साथ सीधे संपर्क स्थापित कर संवाद कर रहा है।
इस घटना के बाद सूरत के हीरा और ज्वेलरी बाजार में भारी दहशत फैल गई है। खासकर वे उद्योगपति अधिक चिंतित हैं जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका या अन्य उच्च-जोखिम वाले देशों में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट या माइनिंग परियोजनाएं शुरू की हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा एक एडवाइजरी भी जारी की गई थी, जिसमें माली जैसे देशों में अपहरण और लापता होने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वहां काम कर रहे भारतीयों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई थी। अब सभी व्यापारियों की नजर धीरूभाई की सुरक्षित वापसी पर टिकी हुई है।

