बेंगलुरु: सरकार प्रति एकड़ ढाई करोड़ रुपये देने को तैयार, फिर भी जमीन देने को तैयार नहीं किसान!

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बेंगलुरु शहर के बाहरी इलाके में भारत का पहला अत्याधुनिक AI-संचालित शहर (AI सिटी) बनाने का कर्नाटक सरकार का महत्वाकांक्षी सपना फिलहाल भूमि अधिग्रहण के कड़े विरोध में फंस गया है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु से लगभग 40 किलोमीटर दूर बिदादी और हरोहल्ली में प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) परियोजना स्थानीय किसानों के भारी गुस्से का केंद्र और राजनीतिक संघर्ष का मैदान बन गई है।

सरकार इस परियोजना को एक 'फ्यूचरिस्टिक हब' के रूप में पेश कर रही है, जहां ट्रैफिक प्रबंधन से लेकर प्रशासनिक शासन तक सब कुछ बेंगलुरु पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा संचालित किया जाएगा। लेकिन वास्तविक स्थिति बिल्कुल विपरीत है। सैकड़ों किसान परिवारों के लिए यह उनके पूर्वजों की जमीन, आजीविका और अस्तित्व बचाने की लड़ाई बन गई है।

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इस टाउनशिप को कुल 9,600 एकड़ में विकसित करने की योजना है, और पहले चरण के लिए 499 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। इसमें शून्य-ट्रैफिक कॉरिडोर, हाई-टेक स्कूल और स्मार्ट अस्पताल जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं शामिल हैं। किसानों का कहना है कि सरकार जिस भूमि का अधिग्रहण कर रही है, वह अत्यंत उपजाऊ है और पीढ़ियों से उसी के सहारे उनके परिवारों का जीवनयापन होता आया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस विशाल परियोजना को लागू करने से पहले उनसे उचित परामर्श नहीं किया गया। हाल ही में जब सरकारी टीमें भैरमंगला, बन्नीगिरी, होसुर और कांचुगरनहल्ली जैसे गांवों में भूमि सर्वेक्षण के लिए पहुंचीं, तो सैकड़ों महिलाएं झाड़ू लेकर उनका रास्ता रोककर खड़ी हो गईं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया।

तनाव कम करने के लिए कर्नाटक सरकार ने भूमि मालिकों को दो प्रमुख विकल्प दिए हैं। भूमि की श्रेणी के आधार पर किसानों को प्रति एकड़ 2.07 करोड़ रुपये से 2.5 करोड़ रुपये तक का भारी मुआवजा मिलेगा, या यदि किसान चाहें तो परियोजना पूरी होने के बाद विकसित टाउनशिप में विकसित भूमि का 50 प्रतिशत तक हिस्सा अपने पास रख सकते हैं। इसके अलावा काटे गए पेड़ों के लिए भी मुआवजे की दरें तय की गई हैं। प्रति नारियल का पेड़ 25,000 रुपये, प्रति आम का पेड़ 45,000 रुपये और प्रति सुपारी का पेड़ 6,000 रुपये। हालांकि किसानों का स्पष्ट कहना है कि कोई भी मुआवजा उनकी मां समान उपजाऊ जमीन की भरपाई नहीं कर सकता।

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यह विरोध अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है। BJP और उसकी सहयोगी पार्टी JD-S खुलकर किसानों के समर्थन में आ गई हैं। BJP अध्यक्ष B.Y. विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर हमला करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता किसान होने चाहिए, रियल एस्टेट नहीं। जब तक कम से कम 70 प्रतिशत किसान स्वेच्छा से सहमत न हों, तब तक जबरन भूमि अधिग्रहण तुरंत बंद किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री और JDS नेता H.D. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए निर्दोष महिलाओं और किसानों के खिलाफ झूठी FIR दर्ज कराने हेतु पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने प्रभावित गांवों का दौरा करने और किसानों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की योजना की घोषणा की।

व्यापक आलोचना के बाद कर्नाटक के CM D.K. शिवकुमार ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना उनकी व्यक्तिगत योजना नहीं है, बल्कि पूर्व की कुमारस्वामी और येदियुरप्पा सरकारों की योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। बढ़ते विवाद को देखते हुए CM D.K. शिवकुमार ने घोषणा की कि सरकार आगे बढ़ने से पहले किसानों की चिंताओं तथा परियोजना के फायदे और नुकसान की जांच करने के लिए एक विशेष समिति का गठन करेगी।

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