- Hindi News
- बिजनेस
- क्या UPI पेमेंट्स पर लगेगा चार्ज? ₹2,000 से अधिक के भुगतानों पर मर्चेंट फीस लगाने पर विचार कर रही है...
क्या UPI पेमेंट्स पर लगेगा चार्ज? ₹2,000 से अधिक के भुगतानों पर मर्चेंट फीस लगाने पर विचार कर रही है सरकार
भारत में डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन चुके UPI को लेकर एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार बड़े कॉर्पोरेट और व्यावसायिक संस्थानों को किए जाने वाले ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतानों पर मर्चेंट फीस यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह देश के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव हो सकता है। आइए जानते हैं कि UPI फीस से जुड़े किस प्रकार के समाचार सामने आए हैं।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार बड़े व्यापारियों को किए जाने वाले UPI भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने पर विचार कर रही है। यह फीस 0.5 प्रतिशत से कम हो सकती है और ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर लागू की जा सकती है। MDR वह शुल्क है, जिसे बैंक रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन को प्रोसेस करने के लिए वसूलते हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मीडिया रिपोर्टों में बताया कि फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है और इस पर अगले दो सप्ताह में निर्णय होने की उम्मीद है। MDR केवल बड़े व्यापारियों और व्यवसायों पर लागू होगा।
एक अन्य सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव में ग्राहकों से UPI लेनदेन के लिए कोई शुल्क वसूलने की बात शामिल नहीं है। अधिकारी ने कहा कि MDR का उद्देश्य UPI लेनदेन के लिए ग्राहकों पर शुल्क लगाना नहीं है; बल्कि चर्चा मर्चेंट पक्ष की आर्थिक व्यवस्था और पेमेंट इकोसिस्टम की सस्टेनेबिलिटी (स्थायित्व) पर केंद्रित है। अधिकारियों के अनुसार, UPI का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन इसके लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने में बैंकों और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े अन्य पक्षों की लागत भी बढ़ी है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि समय के साथ इस मॉडल के व्यावसायिक रूप से टिकाऊ बनने की उम्मीद है।
वर्तमान में, केंद्र सरकार ₹2,000 तक के कम मूल्य वाले UPI लेनदेन के लिए बैंकों और अन्य पेमेंट सिस्टम ऑपरेटरों को प्रोत्साहन देती है। डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म को विभिन्न वर्गों के लोगों के बीच तेजी से अपनाने, वित्तीय लेनदेन का आधुनिकीकरण करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए वित्त वर्ष 2021-22 में RuPay डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले BHIM-UPI लेनदेन को प्रोत्साहित करने हेतु एक प्रोत्साहन योजना शुरू की गई थी।
12 मार्च, 2026 को स्टैंडिंग कमिटी ऑन फाइनेंस की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि डिजिटल लेनदेन को सस्ता और अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए 'ज़ीरो MDR' लागू किया गया था। हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि MDR के अभाव में UPI इकोसिस्टम वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं रह पाएगा। समिति ने कहा कि भारत की जनसांख्यिकी, आर्थिक विकास और भौगोलिक पहुंच को देखते हुए आने वाले वर्षों में UPI का आकार दस गुना तक बढ़ सकता है।
अनुमान है कि यह प्लेटफॉर्म अगले पांच से सात वर्षों में 600 मिलियन (60 करोड़) नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ सकता है और हर महीने 100-150 अरब लेनदेन प्रोसेस कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि UPI की धीमी पड़ती विकास दर और संरचनात्मक फंडिंग गैप के कारण इस स्तर तक पहुंचना कठिन होता जा रहा है, जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और मर्चेंट ऑनबोर्डिंग में इकोसिस्टम का निवेश सीमित हो रहा है।

