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लेखपाल की करतूत! 51 जमीनें अपने और पत्नी के नाम कर लीं, बस स्टैंड-कुआं भी नहीं छोड़ा
17 सितंबर को मध्य प्रदेश सरकार ने 'स्वामित्व भूमि अधिकार अमलीकरण और पंजीयन योजना-2026' शुरू की थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को संपत्ति के मुफ्त पंजीकरण का अधिकार देना था। हालांकि, इसके केवल 8 दिन बाद ही खंडवा जिले से अनियमितताओं की खबरें सामने आईं। जमीन के रिकॉर्ड के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाले एक लेखपाल ने अपने पद का दुरुपयोग करके ग्रामीणों की जमीन अपने और अपनी पत्नी के नाम कर ली। यह मामला सामने आने पर जिला कलेक्टर ने उसे निलंबित कर दिया था।
यह घटना खंडवा जिले के कोलगांव इलाके में हुई थी। आरोप है कि लेखपाल राजेश मंडलोई ने सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की थी। अपने पद का दुरुपयोग करके उसने सरकारी प्लेटफॉर्म, सार्वजनिक कुएं और गरीबों के घरों के मालिकाना हक अपने और अपनी पत्नी के नाम कर लिए थे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 'स्वामित्व' योजना के तहत गांव में कुल 935 आवासीय जमीन के मालिकाना हक (पट्टे) दिए जाने वाले थे। लेकिन, रिकॉर्ड में हेराफेरी करके लेखपाल राजेश ने 48 मालिकाना हक अपने नाम और तीन हक अपनी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम दर्ज करवा लिए थे। यानी, गांव के कुल मालिकाना हक में से 51 हक केवल लेखपाल के परिवार के नाम दर्ज किए गए थे।
यह मामला तब सामने आया जब एक पीड़ित शुभम तोमर ने अपनी शिकायत दर्ज कराई और कांग्रेस के जिला अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने दस्तावेजी सबूतों के साथ जांच की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार, लेखपाल राजेश मंडलोई दो-तीन साल पहले सर्वे के बहाने रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए इस इलाके में आए थे। हालांकि, उन्होंने गुप्त रूप से सार्वजनिक और निजी संपत्तियां अपने नाम दर्ज करवा ली थीं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि लेखपाल ने एक सार्वजनिक कुएं का मालिकाना हक भी अपने नाम कर लिया था; यह कुआं शुभम तोमर के घर के पीछे स्थित है और पूरा गांव पीने के पानी के लिए इसका इस्तेमाल करता है। इतना ही नहीं, गांव के बस स्टैंड पर स्थित RCC प्लेटफॉर्म और बलिराम नामक ग्रामीण का घर यानी खसरा नंबर 530 भी लेखपाल के रिकॉर्ड में दर्ज पाया गया था।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खंडवा के कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने कार्रवाई की थी। उन्होंने मौके की जांच करने के लिए तत्कालीन लेखपाल राकेश पटेल को वहां भेजा था। ग्रामीणों की मौजूदगी में खसरे के रिकॉर्ड की जांच करने पर उसमें विसंगतियां पाई गई थीं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद, खंडवा के कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी लेखपाल राजेश मंडलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके अलावा, कोलगांव में सभी 935 खसरों और जमीन के पट्टों की दोबारा जांच करने तथा रिकॉर्ड में तत्काल सुधार करने के आदेश भी दिए गए हैं।

