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गांधी जयंती के दिन गांधीजी की फोटो वाली नोट लेकर ही निकलना, UPI नहीं चलेगा, व्यापारियों ने की 'No UPI Day’ मनाने की घोषणा
देशभर के व्यापारियों का UPI चार्जिस के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। 'फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल' (FAIVM) और 'कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (CAIT) जैसे प्रमुख व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन 'नो UPI डे' मनाने की घोषणा की है। यानी उस दिन व्यापारी UPI के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे और आम जनता को नकद या कार्ड का उपयोग करके सामान खरीदना होगा।
व्यापारी किस बात का विरोध कर रहे हैं?
व्यापारी UPI ट्रांजैक्शन पर लगाए जाने वाले 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेट्रोल, डीजल, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स और अनाज जैसी वस्तुओं पर मुनाफे का मार्जिन (प्रॉफिट मार्जिन) पहले से ही बहुत कम है। अब उस पर लगाया गया यह नया चार्ज अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ाएगा। 'इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन' ने पहले ही चेतावनी दी है कि अगर 15 अक्टूबर तक यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे UPI QR कोड मशीनों को पानी में बहा देंगे।
सरकार के इस फैसले को लेकर व्यापारियों में इतना रोष है कि कल (23 सितंबर) मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों के लगभग 125 व्यापारी संगठनों ने 'नो UPI डे' मनाया था। इससे राज्यभर की लगभग 25% व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। 'महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स' (MACCIA) और 'पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन' भी इस आंदोलन को मजबूत समर्थन दे रहे हैं।
'नो UPI डे' के समर्थन में व्यापारियों की रैली
'बिजनेस स्टैंडर्ड' की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रविंद्र मंगवे ने पुष्टि की है कि 2 अक्टूबर को 'नो UPI डे' के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि, हमने देशभर के व्यापारी संगठनों से परामर्श किया है और केवल महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी 'नो UPI डे' मनाने का फैसला लिया गया है। MACCIA और उससे जुड़े 500 संगठन अपनी मांगें रखने के लिए मुख्यमंत्री से मिलने की योजना बना रहे हैं। मंगवे ने बताया कि, फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (FRTWA), ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF), ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA), ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ्स फेडरेशन (AIJGF) और ऑल इंडिया एडिबल ऑयल ट्रेडर्स फेडरेशन (AIEOTF), उन प्रमुख राष्ट्रीय संगठनों में शामिल हैं जो 2 अक्टूबर को 'नो UPI डे' का समर्थन करेंगे।'
क्या है MDR, और इतनी बवाल क्यों मच रही है?
MDR एक प्रकार की प्रोसेसिंग फीस है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले व्यापारियों से वसूली जाती है. जब आप किसी दुकान में QR कोड स्कैन करके या कार्ड स्वाइप करके भुगतान करते हैं, तो उस पैसे को सुरक्षित रूप से ग्राहक के बैंक खाते से दुकानदार के बैंक खाते तक पहुंचाने के पीछे एक पूरा डिजिटल नेटवर्क (बैंक, पेमेंट गेटवे और वीजा, मास्टरकार्ड, NPCI) काम करता है। इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने और उसके रखरखाव पर होने वाले खर्च को MDR कहा जाता है।
सरकार के नए फैसले के तहत ₹2,000 से अधिक के 'पीयर-टु-मर्चेंट' (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.40% फीस वसूली जाएगी, जिसमें अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है। इसका मतलब है कि चाहे ट्रांजैक्शन की राशि ₹1 लाख हो या ₹10 लाख, व्यापारी से ₹300 से अधिक फीस नहीं वसूली जाएगी; फीस की राशि ₹300 तक सीमित रखी गई है।

