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अमेरिका में बिगड़े हालात से उद्योगपति परेशान, बोले- ‘कोरोना दौर से भी भयावह स्थिति’
अमेरिका में गैसोलीन और डीजल की कीमतों में हुई असाधारण और लगातार बढ़ोतरी के भयावह प्रभाव अब केवल आम वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि देश के पूरे औद्योगिक, सप्लाई चेन और कृषि क्षेत्र पर इसके विनाशकारी प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। ईंधन की बढ़ती दरों के कारण उत्पादन से लेकर परिवहन तक की लागत बहुत बढ़ गई है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। अमेरिकी न्यूज़ आउटलेट CNN द्वारा प्रकाशित एक विशेषरिपोर्ट में अमेरिका के छोटे-बड़े बिजनेस ओनर्स, निर्माताओं और स्थानीय किसानों से सीधे बातचीत करके वर्तमान महंगाई और ईंधन संकट की गंभीर वास्तविकता सामने लाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन की आसमान छूती कीमतों के कारण छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं, जबकि किसानों के लिए खेती का ऑपरेशनल खर्च निकालना असंभव होता जा रहा है।
रिपोर्ट में इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) के हालिया मासिक सर्वेक्षण का हवाला दिया गया है। इस सर्वे में देशभर के कई औद्योगिक अधिकारियों, सप्लाई चेन मैनेजरों और व्यापारियों ने वर्तमान आर्थिक स्थिति की तुलना 2020-21 के कोविड-19 महामारी के दौर से की है।

सर्वे में शामिल कुछ उद्योगपतियों ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि, वर्तमान स्थिति महामारी के दौर से भी अधिक चुनौतीपूर्ण और कठिन है। कोरोना के दौर में कम से कम सरकार की ओर से सहायता और उम्मीद की एक किरण थी, लेकिन मौजूदा आर्थिक बोझ और महंगाई तुलनात्मक रूप से अधिक भयावह और असहनीय है।
CNN से बातचीत में एक जाने-माने कैफे और कॉफी व्यवसाय से जुड़े उद्योगपति ने बताया कि उनका व्यवसाय चारों तरफ से संकट में घिरा हुआ है:
ट्रांसपोर्टेशन और कंटेनर की कमी: ईंधन की कीमत बढ़ने से माल के ट्रांसपोर्टेशन किराए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा, शिपिंग कंटेनरों की भारी कमी पैदा हो गई है।
रेड सी (लाल सागर) संकट: लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हो रहे हमलों और भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण शिपिंग रूट लंबे हो गए हैं, जिससे इंश्योरेंस और परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है।
उर्वरक और कृषि लागत में उछाल: ईंधन और प्राकृतिक गैस की कीमत बढ़ने के कारण रासायनिक उर्वरकों की कीमतें आसमान छू गई हैं, जिसका सीधा असर कृषि और खाद्य वस्तुओं की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समस्या केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। रियल एस्टेट, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग जैसे अमेरिका के सभी छोटे-बड़े उद्योगों से जुड़े कारोबारी फिलहाल ऐसी ही कठिन परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहकों की क्रय शक्ति घट रही है और दूसरी ओर उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन खत्म हो गए हैं।

डीजल संकट और लॉजिस्टिक्स पर असर: अमेरिका में अधिकांश मालवाहक ट्रक और ट्रेनें डीजल पर चलती हैं। डीजल की कीमत बढ़ने से ई-कॉमर्स, किराना और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं की होम डिलीवरी तथा वितरण सेवाएं महंगी हो गई हैं, जिसका अंतिम बोझ आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
महंगाई में लगातार बढ़ोतरी: ईंधन की दरें पूरी अर्थव्यवस्था में महंगाई बढ़ाने के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम कर रही हैं, जिसके कारण फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें ऊंची रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और ऋण लेना भी उद्योगों के लिए महंगा हो गया है।
वैश्विक कारक: मध्य-पूर्व में चल रहा तनाव और ओपेक देशों द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में की गई कटौती को भी अमेरिकी बाजार में ईंधन की ऊंची कीमतों के लिए प्रमुख जिम्मेदार कारक माना जाता है।

