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अपनों ने मारने की कोशिश की, पर हौसले ने जिताया सोना; पढ़िए उस चैंपियन की कहानी जिसने हार नहीं मानी
कहा जाता है कि असली उड़ान पंखों से नहीं, बल्कि हौसलों से होती है। यही हौसले पायल नाग ने दिखाई थी। 18 वर्षीय पायल नाग ने बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में गोल्ड मेडल जीता था। उसकी इस जीत की खास बात यह रही कि उसने विश्व चैंपियन और ओलंपिक मेडल विजेता शीतल देवी को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। उसने इस मेडल मुकाबले में हमवतन और मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन शीतल देवी को 139-136 के स्कोर से हराया।
पायल नाग की कहानी असाधारण साहस का प्रमाण है। वह हाथ-पैर के बिना तीरंदाजी करती है। कृत्रिम पैरों की मदद से वह धनुष को संतुलित करती है और कंधों का उपयोग करके तीर खींचकर सटीक निशाना लगाती है। उसका हर निशाना यह साबित करता है कि जब हौसले बुलंद हों, तो शारीरिक सीमाएं भी रास्ता नहीं रोक सकतीं।
इसमें कोई शक नहीं कि शीतल देवी को हराकर गोल्ड मेडल जीतने के साथ पायल नाग ने देशवासियों को खुशी का मौका दिया। लेकिन उसकी जिंदगी की कहानी दर्द से भरी है। जब पायल केवल तीसरी कक्षा में पढ़ती थी, तब निर्माणाधीन इमारत की पांचवीं मंजिल पर अपने भाई के साथ खेलते समय वह जीवित बिजली के तार के संपर्क में आ गई थी। नतीजा यह हुआ कि 11000 वोल्ट के जोरदार झटके के कारण उसने अपने दोनों हाथ और पैर खो दिए।
पायल नाग की यह हालत देखकर रिश्तेदारों ने उसके पिता विजय कुमार नाग और उसकी मां को सलाह दी कि हाथ-पैर न होने के कारण वह न तो खा पाएगी और न ही चल पाएगी। इससे अच्छा है कि इसे ज़हर दे दो।
हालांकि, ओडिशा के बालांगीर जिले के निवासी मजदूर विजय कुमार नाग ने किसी की बात नहीं सुनी। इसके बजाय उन्होंने अपनी बेटी को जिला प्रशासन द्वारा संचालित संस्था पार्वती गिरी बाल निकेतन अनाथालय में भेज दिया। वर्ष 2023-24 में उसने कटरा स्थित माता वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शीतल देवी के साथ प्रशिक्षण लिया। 2025 में राष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण करने के बाद, पायल ने अब वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में गोल्ड जीतकर अपनी सफलता की कहानी में एक नया अध्याय लिख दिया है।

