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महाकाल स्टैंडर्ड टाइम क्या है? क्यों बदलना चाहते है शिक्षा मंत्री
भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एक स्टेटमेंट चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने ग्लोबल टाइम स्टैंडर्ड को रिप्लेस करने की बात कही है, प्रधान के मुताबिक दुनिया में वक्त तय करने का पैमाना ग्रीनविच स्टैंडर्ड टाइम की जगह महाकाल स्टैंडर्ड टाइम होना चाहिए। इस बात के समर्थन में उन्होंने कुछ तर्क भी दिए और कहा कि आने वाले समय में प्राइम मेरिडियन को महाकाल स्टैंडर्ड टाइम तक ले जाने की कोशिश की जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर महाकाल स्टैंडर्ड टाइम क्या है, दुनिया में टाइम जोन किस जगह से तय होता है, और ग्रीनविच मीन टाइम को बदलना कितना संभव है। साथ ही यह भी समझेंगे कि उज्जैन को कब समय का केंद्र माना जाता था
क्या कहा धर्मेंद्र प्रधान ने?
इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ‘महाकाल’ में बोलते हुए उन्होंने कहा, “मेरे अनुसार काल गणना हमारी देन, हमारी खोज और हमारी विरासत है। औपनिवेशिक शासकों ने इसे जीएसटी के नाम पर हमसे छीन लिया। ग्रीनविच स्टैंडर्ड टाइम को यूरोप में स्थापित कर दिया गया, जबकि इसका मूल केंद्र उज्जैन, अवंतिका, डोंगला या मध्य भारत का क्षेत्र माना जाता है। मैंने कुछ एआई टूल्स से भी पूछा कि क्या प्राइम मेरिडियन और कर्क रेखा उज्जैन में मिलते हैं? जवाब मिला कि ठीक उज्जैन में नहीं, लेकिन इसके आसपास ये रेखाएं मिलती हैं
क्या है ग्रीनविच मीन टाइम?
दुनिया में समय ग्रीनविच मीन टाइम से ही तय होता है, जो लंदन से गुजरने वाला एक रेखा है. इस रेखा को प्राइम मेरीडियन के नाम से भी जाना जाता है. हम सभी को ये पता है कि सूरज पूर्व दिशा से निकलता है और पश्चिम में अस्त होता है. इसी वजह से पृथ्वी पर पूर्व और पश्चिम की दूरी मापने के लिए एक संदर्भ बिंदु निर्धारित किया गया, जिसे GMT कहा जाता है।
1850–1860 के दशक में ब्रिटेन में व्यापार तेजी से बढ़ रहा था और यहीं से औद्योगिक क्रांति को गति मिली। सामान की सप्लाई के लिए रेलवे नेटवर्क विकसित हुआ, जिसके संचालन के लिए सटीक समय जानना बेहद जरूरी था। इसी जरूरत के चलते टाइम जोन की अवधारणा सामने आई, ताकि ट्रेनों की आवाजाही सही तरीके से हो सके। धीरे-धीरे आसपास के देशों ने भी इस व्यवस्था को अपनाना शुरू कर दिया और अंततः 13 अक्टूबर 1884 को पूरी दुनिया ने GMT को समय का मानक मान लिया
क्या GMT को सच में बदला जा सकता है?
पूर्व और पश्चिम की दूरी तय करने वाला बिंदु सिर्फ ब्रिटेन में ही हो, यह जरूरी नहीं है। पृथ्वी की संरचना ऐसी है कि यह संदर्भ बिंदु भारत या किसी अन्य देश में भी निर्धारित किया जा सकता है। जब ग्रीनविच मीन टाइम की शुरुआत हुई थी, तब कई देशों ने इसे अपनाने से इनकार कर दिया था। उस समय कई देश अपनी-अपनी राजधानियों से गुजरने वाली मध्याह्न रेखा को ही प्रधान रेखा मानते थे
ग्रीनविच को ही क्यों चुना गया?
अब सवाल उठता है कि प्राइम मेरिडियन (शून्य देशांतर) के लिए लंदन के ग्रीनविच को ही क्यों चुना गया। दरअसल, 1675 में ब्रिटेन के राजा ने ग्रीनविच में एक वेधशाला स्थापित करवाई थी, ताकि समुद्र में जहाजों को रास्ता तय करने में मदद मिल सके। यहीं से समय निर्धारण की शुरुआत हुई और यह अधिकतर मामलों में सटीक साबित हुआ। इसी वजह से ग्रीनविच को ही मुख्य संदर्भ बिंदु के रूप में स्वीकार कर लिया गया।
उज्जैन को कब माना जाता था केंद्रीय मेरिडियन?
दुनिया ने उज्जैन को कभी भी वैश्विक केंद्रीय मेरिडियन के रूप में नहीं अपनाया। हालांकि 1884 से पहले भारत में उज्जैन को समय निर्धारण का प्रमुख केंद्र माना जाता था। आज भी हिंदू पंचांग और कुंडलियां इसी आधार पर तैयार की जाती हैं, जिससे ज्योतिष में इसका ऐतिहासिक महत्व बना हुआ है। वहीं, भारत का वर्तमान मानक समय (IST) मिर्जापुर (प्रयागराज के पास) से तय किया जाता है, जिसे अंग्रेजों ने 1906 में लागू किया था।
प्राइम मेरिडियन बदलने की चुनौतियां
भले ही धर्मेंद्र प्रधान ने प्राइम मेरिडियन को महाकाल स्टैंडर्ड टाइम में बदलने की बात कही हो, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं है। इसके लिए कई देशों की सहमति के साथ-साथ वैज्ञानिक समुदाय की व्यापक मंजूरी भी आवश्यक होगी। अचानक ऐसा बदलाव करने से दुनियाभर में समुद्री परिवहन, व्यापार और तकनीकी प्रणालियों में भारी अव्यवस्था फैल सकती है।

