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वैश्विक अस्थिरता के बीच हमें चुनी हुई सरकार को समझने का समय आ गया है
(उत्कर्ष पटेल)
वैश्विक युद्धों के अस्थिर समीकरणों और उस अस्थिरता के कारण व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव दुनिया के हर देश में अस्थिरता और अव्यवस्था ला रहे हैं, ऐसे में हमारा देश भारत भी इन अस्थिर समीकरणों से गुजर रहा है। देश के हर नागरिक के जीवन स्तर पर इसके प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ रहे हैं।
अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच के युद्ध का असर हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। इन परिस्थितियों में हमें अपने देश की सरकार और नेतृत्व का सजगता से साथ देना चाहिए, क्योंकि आखिरकार हम ही वोट देकर सरकार बनाते हैं। यह बात निश्चित रूप से कही जा सकती है कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के समीकरणों में हमारे देश की सरकार अन्य देशों की सरकारों की तुलना में बेहतर काम कर रही है।

यहाँ हम किसी की प्रशंसा या आलोचना की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि वर्तमान वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर देशहित की समझ विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं।

हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी के विश्वभर के शीर्ष नेतृत्व के साथ मित्रतापूर्ण संबंधों का हमें लाभ मिल रहा है, जिसके कारण भारत सरकार वैश्विक व्यापार के समीकरणों का संतुलन बनाए रखने का पूरा प्रयास कर रही है और इसके परिणाम भी देशहित में मिल रहे हैं। साथ ही, कुछ विषयों में तुरंत अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने में पूर्ण सफलता न मिलने पर सरकार आलोचना का शिकार भी बन रही है, यह पहलू भी है।
लोकतंत्र में नागरिकों की आवाज बुलंद होनी ही चाहिए। लेकिन जब वैश्विक स्थिति बिगड़ी हुई हो, तब हमें अपने देश की सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का समर्थन करना चाहिए ताकि आंतरिक परिस्थितियाँ और समीकरण एकजुट रहें और सरकार वैश्विक व्यापार और संबंधों के समीकरणों पर ध्यान केंद्रित कर सके।

कठिन समय में देशहित का चिंतन यानी व्यक्तिगत और राजनीतिक पक्षों के निजी विचारों को कुछ समय के लिए अलग रखकर एकता को प्राथमिकता देना। वैश्विक युद्धों के प्रभाव से उत्पन्न हुई इस अनिश्चितता में भारत जैसे विकासशील देश को केवल मजबूत आंतरिक एकता के माध्यम से ही आगे बढ़ाया जा सकता है। यही एकता भारत को वैश्विक अस्थिर मंच पर अधिक आत्मविश्वास के साथ खड़ा रखेगी और हर नागरिक के जीवन में स्थिरता लाएगी।
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवक और khabarchhe.com के संस्थापक हैं)

