सावधान! 10 में से 4 कंपनियां निकाल रही हैं नकली नौकरियां, क्या होता है ‘घोस्ट हायरिंग’

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आजकल, कई नौकरी खोजने वाले एक अजीब चक्रव्यूह में फँस गए हैं। वे लगातार अच्छी नौकरियों के लिए आवेदन करते हैं, विवरण भी शानदार होता है, लेकिन बदले में कोई जवाब नहीं मिलता। विज्ञापित अवसरों और वास्तविक भर्ती के बीच का यह अंतर ‘घोस्ट हायरिंग’ के ट्रेंड को जन्म दे रहा है।

रिपोर्ट क्या कहती है?

CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में हर 10 में से 4 कंपनियों ने ‘फेक जॉब पोस्टिंग’ की थी। सर्वे यह भी दिखाता है कि, अभी भी हर 10 में से 3 कंपनियां ऐसे पदों का विज्ञापन कर रही हैं जो वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं। कई उम्मीदवार आवेदन करने के बाद कोई जवाब न मिलने से निराश हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या इन पदों को भरने का वास्तव में कोई इरादा है?

कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं?

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ऑर्गेनाइजेशनल साइकोलॉजिस्ट गुरलीन बरुआ ने कहा कि कंपनियाँ कई कारणों से ‘घोस्ट जॉब्स’ पोस्ट करती हैं। ये कारण कुछ इस प्रकार हैं:

टैलेंट पाइपलाइन: भविष्य की जरूरतों के लिए डेटा इकट्ठा करना।

विकास का दिखावा: निवेशकों को संकेत देना कि कंपनी तेजी से बढ़ रही है।

डेटा मैपिंग: नौकरी के आवेदनों के माध्यम से बाजार के रुझानों और प्रतिभा की जानकारी इकट्ठा करना।

कैसे पहचानें कि नौकरी ‘नकली’ या ‘भूतिया’ है?

अगर आप भी जॉब पोर्टल के जरिए आवेदन करके थक गए हैं, तो कुछ संकेतों पर ध्यान दें। जैसे सबसे पहले नौकरी की पोस्टिंग की तारीख जांचें। अगर कोई पद एक महीने से ज्यादा समय से खुला है और बार-बार दोबारा पोस्ट किया जा रहा है, तो संभावना है कि कंपनी सक्रिय रूप से भर्ती नहीं कर रही है। इसके अलावा यह भी देखें:

ऑफिशियल करियर पेज: अगर कोई नौकरी LinkedIn या अन्य पोर्टल पर दिख रही है लेकिन कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर नहीं है, तो सावधान हो जाएं।

सीधा संपर्क: LinkedIn के माध्यम से भर्ती मैनेजर या HR प्रतिनिधि से सीधे संपर्क करने की कोशिश करें। अगर वहाँ से भी कोई जवाब नहीं मिलता, तो मामला संदिग्ध हो सकता है।

गुरलीन बरुआ का कहना है कि उम्मीदवारों को उन चीजों पर ध्यान देना चाहिए जो उनके नियंत्रण में हैं। नई तकनीक सीखना, AI के प्रभाव को समझना और समस्या समाधान जैसे कौशल विकसित करना जरूरी है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे तकनीकी काम अधिक से अधिक स्वचालित होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे क्रिटिकल थिंकिंग, इमोशनल इंटेलिजेंस और लचीलापन जैसे मानवीय गुणों का महत्व बढ़ रहा है।

संगठनों को अपने संचार में स्पष्ट होना चाहिए। भले ही वे पूरी तरह पारदर्शी न हों, उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कोई पद तत्काल भर्ती के लिए है या भविष्य की पाइपलाइन बनाने के लिए, क्योंकि सिर्फ दिखावे के लिए पद पोस्ट करने से उम्मीदवारों का भरोसा कम हो जाता है।

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