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जैसे मानसून खत्म होते ही मेंढक गायब हो जाते हैं, वैसे ही चुनाव खत्म होते ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेता भी गायब हो जाते हैंः जगदीश विश्वकर्मा
गुजरात भाजपा के अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने हाल ही में गुजरात के विपक्षी दलों पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जैसे मानसून खत्म होते ही मेंढक गायब हो जाते हैं, वैसे ही चुनाव खत्म होते ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेता भी गायब हो जाते हैं! इस बयान के साथ उनकी बात का सार यह है कि जो लोग अपना घर संभाल नहीं सकते, वे गुजरात पर कब्जा करने के सपने देखते हैं। गुजरात की जनता ने ऐसे ‘बहुरूपिया’ नेताओं को पहचान लिया है। केवल चुनाव के समय ही दिखाई देने वाले इन नेताओं को जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

यह बात आने वाले 2026 के स्थानीय स्वराज्य चुनावों के संदर्भ में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। गुजरात में भाजपा का मजबूत वर्चस्व है। विपक्षी दल चुनाव से पहले ही सक्रिय होते हैं और बाद में गायब हो जाते हैं। जगदीश विश्वकर्मा ने इसे ‘मानसून के मेंढकों’ से तुलना करके विपक्ष की अस्थिरता को दर्शाया है। उनकी बात का सार यह है कि विपक्षी दल अपने आंतरिक विवादों और मतभेदों के कारण गुजरात के विकास में कोई योगदान नहीं दे पाते हैं।
गुजरात की जनता वर्षों से भाजपा की स्थिर सरकार का अनुभव कर रही है। विकास के कार्य लगातार जारी रहते हैं और इसके मुकाबले विपक्षी दलों के राजनीतिक समीकरण केवल वोट बैंक पर आधारित नजर आते हैं। चुनाव के बाद वे जनता के मुद्दों को समझने और हल करने के लिए भी नहीं आते। ऐसी कार्यशैली से मतदाताओं में असंतोष बढ़ा है और स्वीकार्यता घट गई है। जगदीश विश्वकर्मा जैसे अनुभवी संगठनात्मक नेताओं का मानना है कि जनता अब ऐसे वोट की राजनीति करने वालों को नकार रही है।
यहां एक बात निश्चित रूप से कहनी चाहिए कि विपक्षी नेताओं को इन आलोचनाओं का जवाब देने के बजाय अपने दल की आंतरिक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। गुजरात में विकास की गति को कोई रोक नहीं सकता। जनता विकास देखती है, विवाद, आलोचना और वादे नहीं।

