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युद्ध का साया चारधाम यात्रा पर भी दिख रहा, श्रद्धालुओं में उत्साह कम, रजिस्ट्रेशन कम होने से पर्यटन करोबार पर पड़ेगा असर
श्रद्धालु कम करा रहे हैं रजिस्ट्रेशन, ट्रैवल ऑपरेटर भी चिंता में- कहीं युद्ध की वजह से पेट्रोल-डीजल के रेट न बढ़ जाएं
देहरादून। ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब चारधाम यात्रा पर भी दिखने लगा है। चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ मानी जाती है। इस यात्रा पर होटल इंडस्ट्री के अलावा पूरा पयर्टन उद्योग टिका हुआ है। चारधाम यात्रा अब दो हफ्ते का समय शेष बचा हुआ है। इसके बावजूद चारधाम यात्रा इस बार अनिश्चितताओं के साए में नजर आ रही है। यात्रा शुरू होने से पहले ही रजिस्ट्रेशन में आई गिरावट ने पर्यटन कारोबार को चिंता में डाल दिया है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब इस धार्मिक यात्रा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। 19 अप्रैल से शुरू होने वाली इस वर्ष की यात्रा के लिए पंजीकरण के आंकड़े पिछले साल की तुलना में कमजोर नजर आ रहे हैं। बीते वर्ष यात्रा के शुरुआती 26 दिनों में ही 17 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जबकि इस बार अब तक केवल 11 लाख श्रद्धालुओं ने ही पंजीकरण कराया है। यह गिरावट पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है। माना जा रहा है कि वैश्विक तनाव की वजह से भक्तों में उत्साह कम है।
एडवांस बुकिंग से पीछे हट रहे ट्रैवल ऑपरेटर्स
इस बार ट्रैवल ऑपरेटर्स का रुख भी बदला हुआ नजर आ रहा है। आमतौर पर यात्रा शुरू होने से पहले एडवांस बुकिंग का सिलसिला तेज हो जाता है, लेकिन इस बार अधिकांश ऑपरेटर्स बुकिंग लेने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए आर्थिक जोखिम काफी बढ़ गया है। पर्यटन व्यवसायी बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध जैसी स्थिति के चलते ईंधन की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। यदि वे अभी के रेट पर बुकिंग लेते हैं और यात्रा शुरू होने तक डीजल-पेट्रोल महंगा हो जाता है, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी वजह से कई ऑपरेटर्स फिलहाल एडवांस बुकिंग से दूरी बना रहे हैं।
होटल कारोबारियों में भी बढ़ती जा रही है चिंता
चारधाम यात्रा का असर होटल व्यवसाय पर भी साफ देखने को मिल रहा है। होटल संचालकों का कहना है कि कपाट खुलने की तिथियों की घोषणा के बाद शुरुआत में बुकिंग में तेजी आई थी, लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की खबरों के बाद पहले से हुई बुकिंग पर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यही नहीं, अब तो नई बुकिंग भी लगभग बंद हो गई है।
2025 में भारत-पाकिस्तान तनाव से प्रभावित हुआ था चारधाम यात्रा
यह पहली बार नहीं है जब किसी तनावपूर्ण स्थिति का असर यात्रा पर पड़ा हो। वर्ष 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के कारण भी चारधाम यात्रा प्रभावित हुई थी। उस समय भी श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई थी और पर्यटन कारोबार को नुकसान झेलना पड़ा था।
अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ता खतरा
इस बार स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का सीधा असर ईंधन, परिवहन और यात्रा की कुल लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि श्रद्धालु भी फिलहाल यात्रा की योजना बनाने में सतर्कता बरत रहे हैं। चारधाम यात्रा से जुड़े हजारों छोटे-बड़े व्यवसाय इस पर निर्भर हैं। ट्रांसपोर्ट, होटल, गेस्ट हाउस, टूर गाइड, घोड़ा-खच्चर संचालक और स्थानीय दुकानदारों की आजीविका इसी यात्रा से चलती है। ऐसे में रजिस्ट्रेशन में आई गिरावट इन सभी के लिए संभावित आर्थिक संकट का संकेत मानी जा रही है।
फिलहाल आगे क्या है उम्मीद…
फिलहाल ग्लोबल तनाव के बीच हालातों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि वैश्विक तनाव कम होता है और ईंधन की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो आने वाले दिनों में यात्रा में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। वहीं प्रशासन के सामने भी चुनौती है कि वह श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखते हुए यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करे।

