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बिहार: रिश्तों को शर्मसार करती भ्रष्टाचार की दास्तां; छोटे भाई ने केरोसिन बेचकर इंजीनियर बनाया, बड़ा भाई नोटों के ढेर पर सोता मिला
भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी सामने आई है जो रिश्तों, त्याग और नैतिकता पर गहरे सवाल खड़ा करती है। बिहार के झाझा में ग्रामीण निर्माण विभाग में तैनात कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के ठिकानों पर जब EOU ने छापा मारा, तो नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। इंजीनियर साहब के बिस्तर के नीचे और कमरों से नोटों की ऐसी गड्डियां मिलीं कि उन्हें गिनना मुश्किल हो गया। लेकिन इस 'काली कमाई' के पीछे छिपी गरीबी और त्याग की दास्तां इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली है।
जर्जर पैतृक घर और गरीब परिवार
बनमनखी के राजहाट स्थित गोपाल कुमार का पैतृक घर आज भी जर्जर हालत में है। गोपाल के पिता राजकुमार गुप्ता खुद भवन निर्माण विभाग में एक छोटे पद पर थे। पांच भाइयों के इस परिवार में आज भी संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। कोई बेरोजगार है, तो कोई छोटी-मोटी दुकान चलाकर मेहनत की कमाई खा रहा है। गोपाल के एक भाई LIC में मैनेजर थे, जो लंबे समय से लापता हैं। विडंबना यह है कि करोड़ों की संपत्ति बनाने वाले इस इंजीनियर ने कभी मुड़कर अपने उन भाइयों की सुध नहीं ली, जिन्होंने उसे इस लायक बनाया था।
भाई का त्याग, इंजीनियर की बेवफाई
गोपाल कुमार आज जिस मुकाम पर हैं, वहां उन्हें पहुँचाने के लिए उनके छोटे भाई चंदन कुमार गुप्ता ने अपना जीवन दांव पर लगा दिया था। पूर्णिया के बनमनखी के रहने वाले चंदन ने कभी खुद के भविष्य की चिंता नहीं की। उन्होंने गाँव की सड़कों पर केरोसिन तेल बेच-बेचकर पैसे जुटाए ताकि उनका बड़ा भाई पढ़ लिखकर इंजीनियर बन सके। लेकिन अफ़सोस, सफलता के शिखर पर पहुँचते ही गोपाल कुमार ने उन अहसानों को भुला दिया। आज जहाँ बड़ा भाई करोड़ों की अवैध संपत्ति और नोटों के ढेर पर सो रहा था, वहीं उसे पढ़ाने वाला छोटा भाई आज भी पटना में एक छोटी सी कपड़ों की दुकान चलाकर अपना गुजारा कर रहा है।
बिस्तर से निकली नोटों की गड्डियां
EOU की छापेमारी में गोपाल कुमार के घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है। उनकी पत्नी, जो खुद एक इंजीनियर थीं, उन्होंने भी नौकरी छोड़ दी थी। घर में विलासिता के तमाम सामान थे, लेकिन नैतिकता का नामोनिशान नहीं था। इस खबर ने बनमनखी में उनके परिवार और गाँव वालों को स्तब्ध कर दिया है। चाचा वीरेंद्र गुप्ता के बच्चे आज भी मोबाइल की दुकान चलाकर ईमानदारी की मिसाल पेश कर रहे हैं, जबकि गोपाल ने भ्रष्टाचार के जरिए नोटों का पहाड़ खड़ा कर लिया। यह मामला समाज के लिए एक आईना है कि कैसे पद और पैसा इंसान को अपनों के त्याग के प्रति अंधा बना देता है।

